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हनुमान जयंती आज: जानिए रामनवमी के ठीक बाद क्यों होती है पवनसूत की पूजा और अर्चना

BY -
Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: April 2, 2026, 12:15:14 PM

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): हर साल चैत्र माह का समय आते ही धार्मिक आस्था अपने चरम पर पहुंच जाती है, और इसी पावन क्रम में एक के बाद एक बड़े पर्व मनाए जाते हैं. पहले रामनवमी की धूम रहती है, तो ठीक उसके कुछ दिनों बाद हनुमान जयंती का उल्लास देखने को मिलता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इन दोनों पर्वों के बीच इतना गहरा संबंध क्यों है? यह केवल कैलेंडर का संयोग नहीं, बल्कि आस्था, भक्ति और दिव्य उद्देश्य से जुड़ी एक अनोखी कहानी है. हनुमान जयंती सिर्फ जन्मोत्सव नहीं, बल्कि भगवान राम के प्रति अटूट समर्पण और शक्ति के प्रतीक की पूजा का दिन है, जो इस पर्व को और भी खास बना देता है.

भगवान हनुमान को शक्ति, साहस, निष्ठा और भक्ति का प्रतीक माना जाता है. वे भगवान राम के परम भक्त हैं, इसलिए उन्हें “राम भक्त हनुमान” भी कहा जाता है. यही कारण है कि रामनवमी के कुछ दिनों बाद ही हनुमान जयंती का पर्व मनाया जाता है. मान्यता है कि भगवान राम के जन्म के लगभग छह दिन बाद हनुमान जी का अवतार हुआ था, जो इस धार्मिक क्रम को और भी विशेष बनाता है.

धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार, भगवान हनुमान को भगवान शिव का 11वां रुद्रावतार माना जाता है. वहीं भगवान राम, विष्णु के अवतार हैं. जब भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में पृथ्वी पर जन्म लेकर असुरों के विनाश और धर्म की स्थापना का कार्य शुरू किया, तब उनकी सहायता के लिए भगवान शिव ने हनुमान के रूप में अवतार लिया. इस प्रकार हनुमान जी का जन्म केवल एक संयोग नहीं, बल्कि एक दिव्य उद्देश्य से जुड़ा हुआ माना जाता है.

हनुमान चालीसा में भी वर्णन मिलता है कि हनुमान जी ने अपने पराक्रम से असुरों का संहार किया और भगवान राम के हर कार्य को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. चाहे लंका दहन हो या संजीवनी लाना, हर कठिन परिस्थिति में उन्होंने अपनी शक्ति और बुद्धि का परिचय दिया.

हनुमान जयंती के दिन भक्त मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना करते हैं, प्रसाद चढ़ाते हैं और अपने जीवन से कष्ट दूर करने की कामना करते हैं. कई स्थानों पर भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है. यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति, समर्पण और सेवा से जीवन में हर बाधा को पार किया जा सकता है. इस प्रकार रामनवमी के बाद हनुमान जयंती का आना भक्त और भगवान के अटूट संबंध और सहयोग की भावना को दर्शाता है, जो सनातन परंपरा की गहराई और आध्यात्मिकता को उजागर करता है.

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