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गुरु-शिष्य या दोस्ती? कौन हैं शांतनु नायडू जो रतन टाटा के अंतिम समय तक साये की तरह साथ रहे

BY -
Priyanka Kumari CE
Priyanka Kumari CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: May 18, 2026, 12:57:30 PM

टीएनपी डेस्क(TNP DESK):देश के बड़े उद्योगपतियों में शामिल रतन टाटा ने अपने जीवन में हर क्षेत्र में सफलता हासिल की.उनके जीवन से जुड़ी प्रेरणादायक कहानियाँ हमेशा चर्चा में रही है लेकिन उनके अंतिम दिनों में एक नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहा वो शांतनु नायडू थे.रतन टाटा के निधन के बाद जब उनकी चर्चा सबसे ज्यादा हुई, तो लोगों के बीच शांतनु नायडू को लेकर भी काफी जिज्ञासा देखने को मिली.उनके रिश्ते और जुड़ाव को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की बातें सामने आईं, जिससे उनकी लोकप्रियता और चर्चा और बढ़ गई.

 कौन हैं शांतनु नायडू ?

आपको बताएं कि शांतनु नायडू रतन टाटा के बेहद करीबी सहयोगी और भरोसेमंद सहायक के रूप में उनके साथ रहते थे.कहा जाता है कि वे कई मौकों पर उनके साथ यात्रा करते थे और उनके व्यक्तिगत व सामाजिक कार्यों में मदद करते थे.शांतनु नायडू आज के समय में युवाओं के बीच एक चर्चित नाम बन चुके है. उनकी पहचान सिर्फ एक इंजीनियर या उद्यमी के रूप में नहीं, बल्कि रतन टाटा के करीबी सहयोगी और समाजसेवा से जुड़े व्यक्ति के रूप में भी होती है.

दोनों के बीच था खास जुड़ाव

शांतनु नायडू ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद कॉरपोरेट सेक्टर में काम किया, लेकिन उनका झुकाव हमेशा समाजसेवा की ओर रहा उन्होंने “Goodfellows” नाम की एक सामाजिक पहल शुरू की, जिसका उद्देश्य अकेले रहने वाले बुजुर्गों को companionship और emotional support देना है. इस अनोखी सोच ने रतन टाटा का ध्यान आकर्षित किया और यहीं से दोनों के बीच एक खास जुड़ाव की शुरुआत हुई.

गुरु-शिष्य या दोस्ती? 

धीरे-धीरे शांतनु नायडू, रतन टाटा के भरोसेमंद सहयोगियों में शामिल हो गए. वे कई सामाजिक प्रोजेक्ट्स, मीटिंग्स और यात्रा के दौरान उनके साथ नजर आने लगे.मीडिया और लोगों के बीच उनकी चर्चा इसलिए बढ़ी क्योंकि वे अक्सर टाटा के साथ “साये की तरह” दिखाई देते थे.हालांकि, यह रिश्ता केवल नौकरी या औपचारिक सहयोग तक सीमित नहीं था. दोनों के बीच एक गहरा गुरु-शिष्य जैसा संबंध और दोस्ती भी देखा जाता है. रतन टाटा हमेशा युवाओं को प्रोत्साहित करते थे, और शांतनु नायडू उनके उस सोच के एक मजबूत उदाहरण माने जाते हैं, जो समाज के लिए कुछ अलग करने की प्रेरणा रखते है.हाल ही में सोशल मीडिया पर यह भी दावा किया गया कि शांतनु नायडू का नाम रतन टाटा की वसीयत में है, लेकिन इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। ऐसे दावे अक्सर बिना प्रमाण के वायरल हो जाते है.

रतन टाटा की कहानी एक ऐसे रिश्ते की मिसाल

 शांतनु नायडू और रतन टाटा की कहानी एक ऐसे रिश्ते की मिसाल है जिसमें सम्मान, विश्वास और समाज के लिए कुछ अच्छा करने की भावना शामिल है. यह संबंध दिखाता है कि कैसे अनुभव और युवा सोच मिलकर समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते है.

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