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अबुआ राज में कलम पर पहरा: पत्रकारों की गिरफ्तारी पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने उठाए लोकतंत्र पर सवाल

BY -
Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 4:30:22 AM

रांची (RANCHI) : लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहलाने वाले पत्रकार भी अब अबुआ राज में सुरक्षित नहीं है. उन्हें यह खतरा किसी क्रिमिनल से नहीं बल्कि खुद कानून के रखवालों में से है. अब यह हम नहीं कह रहे, यह तो कह रहें हैं झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मारंडी.

दरअसल बीती रात अरगोड़ा थाना द्वारा पत्रकार तीर्थनाथ आकाश और सुनीता मुंडा को गिरफ्तार किया था. दोनों को बिना वारंट और बिना किसी केस के थाने ले जाकर घंटों तक बैठाया गया था. हालांकि रात करीबन 12 बजे इस शर्त पर दोनों पत्रकारों को छोड़ गया की आज यानि की 24 अगस्त को वाह दोनों रांची में मौजूद नहीं रहेंगे. तीर्थनाथ आकाश और सुनीता मुंडा, ने बीते दिनों अपने चैनल पर रिम्स 2 विवाद और सूर्या हांसदा एनकाउंटर पर विडिओ बनाकर सरकार को सवालों के घेरे में डाल दिया था. अब माना जा रहा है की इसी वजह से दोनों को अरगोड़ा थाना ले जाया गया था. हालांकि बात यहइन तक नहीं रुकी. मामले पर विपक्ष के नेताओं ने भी चिंता जताते हुए सोशल मीडिया हैन्डल X के जरिए सरकार से तीखे सवाल किए हैं. ऐसे में भाजपा के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मारंडी ने लिखा :

'रांची पुलिस ने बिना वारंट और बिना किसी केस के पत्रकार तीर्थनाथ आकाश को गिरफ्तार किया है. यह केवल एक पत्रकार की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पूरे लोकतांत्रिक सिस्टम का गला घोंटने की साज़िश है.

तीर्थनाथ आकाश ने जिस तरह लगातार सूर्या हांसदा के फ़र्ज़ी एनकाउंटर और रिम्स-2 में आदिवासी ज़मीन की लूट का सच सामने रखा, उसी से बौखलाई हेमंत सरकार ने यह कदम उठाया है.
@HemantSorenJMM सरकार ने अब खुलकर आदिवासी दमन का बीड़ा उठा लिया है. यह सरकार कॉरपोरेट दलालों के साथ मिलकर आदिवासियों की ज़मीन और खनिज लूट रही है और जो इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएगा, उसका हश्र या तो फर्जी एनकाउंटर होगा या रात के अंधेरे में गिरफ़्तारी!

यह लोकतंत्र पर हमला है, यह संविधान पर हमला है और यह आदिवासी अस्मिता पर हमला है. हेमंत सरकार अब जनता के सवालों से डरकर कलम और आवाज़ को कैद करने की नीति अपना चुकी है.'

ऐसे में यह घटना सिर्फ दो पत्रकारों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी गहरा प्रहार है और यह लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है. अब देखना यह है कि सरकार इस आलोचना पर क्या रुख अपनाती है और न्याय प्रणाली कैसे प्रतिक्रिया देती है.

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