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झारखंड: राज्यपाल ने बताया लंबित विधेयक को रोकने का कारण, जानिए हेमंत सोरेन से जुड़े बंद लिफाफे पर क्या बोले

BY -
Sanjeev Thakur CW
Sanjeev Thakur CW
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 11, 2026, 11:31:42 AM

रांची (TNP DESK) : हेमंत सोरेन जब झारखंड के मुख्यमंत्री थे तो उस समय उन्होंने कई विधेयक को विधानसभा से पारित कराया था. उसके बाद सभी विधेयक राजभवन भेज दिया गया था. जो अभी भी राजभवन में लंबित है. लंबित होने की वजह से अभी तक राज्य में लागू नहीं किया जा सका है. जो विधेयक विधानसभा से पारित हुआ था उनमें मॉब लिंचिंग विधेयक, ओबीसी आरक्षण, निजी विश्वविद्यालय से संबंधित विधेयक, 1932 खतियान अधारित स्थानीय नीति, नियोजन नीति सहित कई विधेयक शामिल थे. वहीं झारखंड के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने लंबित विधेयक के रोकने के कारण बताए हैं.

राजभवन में क्यों रूका है विधेयक

राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने राज्य सरकार द्वारा विधानसभा से पारित कराकर भेजे गए विधेयकों से जुड़े प्रश्नों पर कहा कि फिलहाल चार विधेयक राजभवन में लंबित है. मॉब लिंचिंग से जुड़े विधेयक पर गवर्नर ने कहा कि कम से कम पांच लोगों के समूह को भीड़ कहा जा सकता है. जबकि विधेयक में दो लोगों के समूह को भी भीड़ बताया गया है. उन्होंने विधिक परामर्श लेने की भी बात कही है. ओबीसी के आरक्षण बढ़ाने से संबंधित विधेयक पर कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण नहीं दिया जा सकता है. आरक्षण पर राज्य सरकार को न्यायालय से आदेश प्राप्त करना चाहिए. राज्यपाल के अनुसार, कुछ निजी विश्वविद्यालयों से संबंधित विधेयक आए हैं, लेकिन राज्य में पहले से ही कई निजी विश्वविद्यालय कार्य कर रहे हैं. रैकिंग का विषय देखा जाना चाहिए.

राजभवन ने दूसरी बार लौटाया खतियान आधारित स्थानीय नीति विधेयक

बता दें कि झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार को उस वक्त झटका लगा जब राजभवन की ओर 1932 खतियान आधारित स्थानीय नीति विधेयक को दोबारा लौटा दिया गया था. सरकार यह विधेयक स्थानीय लोगों को कई तरह के लाभ देने के उद्देश्य से लाई थी. राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने 1932 खतियान आधारित स्थानीय नीति संबंधित विधेयक झारखंड स्थानीय व्यक्तियों की परिणामी सामाजिक, सामाजिक सांस्कृतिक और अन्य लाभों का विस्तार करने के लिए विधेयक-2022 को एक बार फिर से राज्य सरकार को लौटा दिया. इससे पहले पूर्व राज्यपाल रमेश बैस ने भी इस विधेयक को संविधान सम्मत नहीं होने का हवाला देते हुए लौटा दिया था.

बंद लिफाफे पर क्या बोले गवर्नर

पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के ऑफिस ऑफ प्राफिट मामले में गवर्नर सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि वे चुनाव आयोग के बंद लिफाफे को भी देखेंगे. विधानसभा में वह अभिभाषण में सरकार की उपलब्धियां ही रख रहे थे. हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री चंपई सोरेन से पूछना चाहिए कि उन्होंने इतना लंबा भाषण क्यों तैयार करवाया.

राज्यपाल ने नए सीएम को दी ये सलाह

झारखंड के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने राज्य के नए मुख्यमंत्री चंपई सोरेन की सरकार को कई सलाह दिये. उन्होंने कहा कि नए सीएम लोगों की जरूरतों के अनुरुप ही करें. भ्रष्टाचार से मुक्ति के लिए पावर में बैठे लोगों को पहल करनी होगी. राज्य सरकार को जल जीवन योजना पर तेजी से काम करना चाहिए. बच्चों के ड्रॉप आउट रोकने पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है.

भ्रष्टाचार से मुक्ति के लिए मिलकर करें काम : गवर्नर

राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि नए मुख्यमंत्री चंपई सोरेन सादे परिवेश में आते हैं. वह लोगों की जरूरतों को जानते हैं. नई सरकार से अपेक्षित प्राथमिकताओं पर चर्चा करते हुए गवर्नर ने कहा कि भ्रष्टाचार मुक्त राज्य की दिशा में काम करना होगा. भ्रष्टाचार से मुक्ति के लिए पावर में बैठे लोगों को पहल करनी होगी. इसके लिए जन प्रतिनिधियों, आम लोगों और पदाधिकारियों को मिलकर काम करना चाहिए, तभी भ्रष्टाचार से मुक्ति मिल पाएगी.

 

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