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सात लाख अभ्यर्थियों से वन टू वन बात कर सरकार लाने जा रही है नियोजन नीति, घड़ियाली आंसू बहाने के बजाय रमेश हांसदा के साथ अपने रिश्तों का खुलासा करें भाजपा

BY -
Devendra Kumar CW
Devendra Kumar CW
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 15, 2026, 7:05:45 AM

रांची(RANCHI): भाजपा विधायकों के द्वारा विधान सभा के गेट पर नियोजन नीति की मांग के समर्थन में धरना, प्रदर्शन और हंगामें पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए झामुमो विधायक सुदिव्य कुमार सोनू ने तंज कसते हुए कहा है कि भाजपा को पहले इस बात का जवाब देना चाहिए कि रमेश हांसदा कौन है, किसके इशारे पर रमेश हासंदा ने हमारी नियोजन नीति का कोर्ट में चैलैंज किया.

राज्य के अभ्यर्थियों और छात्रों को आश्वास्त करते हुए सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि हमने सात लाख अभ्यर्थियों और छात्रों से उनकी राय जानी है, उनकी मांगों को पूरे गौर से सुना है, उनके सुझाव लिए है, अब राज्य सरकार इन अभ्यर्थियों की मांग और सुझाव के आधार पर ही दूसरी नियोजन नीति लाने जा रही है.

कल हो सकती है  नियोजन नीति की घोषणा

सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि संभव है कल ही हम विधान सभा में इसकी घोषणा करें, भाजपा धरना-प्रदर्शन और हंगामा खड़ा कर छात्रों का दिल जीतना चाहती है, छात्र और अभ्यर्थियों को भी इस बात की जानकारी प्राप्त करनी चाहिए कि रमेश हांसदा कौन है? और उसका भाजपा से क्या रिश्ता है, किसके इशारे पर राज्य सरकार की नियोजन नीति को चैलेंज किया गया था, राज्य की जनता और अभ्यर्थियों को यह सच्चाई जानना चाहिए.

इसके पहले की नियोजन नीति को हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया था

यहां याद रहे कि हेमंत सोरेन सरकार के द्वारा लायी गयी नियोजन नीति को हाईकोर्ट में चैलेंज किया गया था, बाद में हाईकोर्ट ने उसे निरस्त कर दिया था. जिसके बाद राज्य भर में छात्रों और अभ्यर्थियों के बीच राज्य सरकार के प्रति नाराजगी देखी जा रही थी, जिसके बाद राज्य सरकार ने एक-एक अभ्यर्थियों से संवाद कायम कर उनके सुझावों को लिया, माना जाता है कि इस बार की नियोजन नीति में अभ्यर्थियों के द्वारा दिये गये सुझावों की झलक मिलेगी.

नियोजन नीति और 1932 को लेकर काफी मुखर रहे हैं सुदिव्य कुमार सोनू

यहां यह भी बता दें कि सुदिव्य कुमार सोनू नियोजन नीति और 1932 के खतियान को लेकर काफी मुखर रहे हैं, विधान सभा के अन्दर भी उनके द्वारा इस मुद्दे पर काफी मुखरता से अपनी बात रखी गयी थी, दावा किया जाता रहा है कि पूर्व की नियोजन नीति को गढ़ने में उनकी बड़ी भूमिका रही थी. अब जब की उस नियोजन नीति को कोर्ट ने निरस्त कर दिया है, राज्य सरकार इस बार उसकी खामियों को दूर करने की कोशिश करेगी.

 

 

Tags:सात लाख अभ्यर्थियोंनियोजन नीतिहेमंत सोरेन सरकारसुदिव्य कुमार सोनू

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