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समलैंगिक सौरभ किरपाल बन सकते हैं दिल्ली उच्च न्यायालय में न्यायाधीश, कॉलेजियम की अनुशंसा

BY -
Ranjana Kumari
Ranjana Kumari
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 18, 2026, 3:01:14 PM

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने वरिष्ठ वकील सौरभ किरपाल को दिल्ली उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रुप में नियुक्त करने के लिए एक बार फिर से अपनी अनुशंसा की है. यहां बता दें कि एक सौरभ किरपाल समलैंगिक हैं और वर्ष 2017 में भी सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के द्वारा इनके नाम की अनुशंसा की गयी थी. लेकिन तब इंटेलिजेंस ब्यूरो ने अपनी रिपोर्ट में सौरभ किरपाल के खिलाफ टिप्पणी की थी. आईबी की ओर से कहा गया था कि करपाल का साथी एक यूरोपीय है, और यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के जोखिम पैदा कर सकता है. इस प्रकार वर्ष 2019 और 2020 में तीन बार आईबी ने कॉलेजियम को कृपाल के नाम पर अंतिम फैसला टालने के लिए कहा.

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सभी आपत्तियों को खारिज किया

लेकिन सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सभी आपत्तियों को खारिज कर एक बार फिर से दिल्ली उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में उनकी नियुक्ति के लिए केंद्र सरकार को उनका नाम देने का फैसला किया है. साथ ही कहा है कि वरिष्ठ वकील संवैधानिक अदालत में न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने के लिए सभी पहलुओं से योग्य है.

सौरभ किरपाल के साथ ही मद्रास, इलाहाबाद, कर्नाटक और पंजाब के उच्च न्यायालयों में नियुक्ति के लिए सिफारिशें की गयी है.

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) धनंजय वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और केएम जोसेफ समेत कॉलेजियम ने इस बारे में फैसला किया है. कल की  मुलाकात में सौरभ किरपाल के साथ ही मद्रास, इलाहाबाद, कर्नाटक और पंजाब के उच्च न्यायालयों में नियुक्ति के लिए सिफारिशें की गयी है.

कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने की है कॉलेजियम को समावेशी और लोकतांत्रिक बनाने की मांग

यहां बता दें कि कॉंलेजियम का फैसला उस वक्त आया है जब कानून मंत्री किरेन रिजिजू के द्वारा यह कहा जा रहा है कि कॉंलेजियम सिस्टम को और भी लोकतांत्रिक, पारर्दशी और समावेशी बनाने की जरुरत है, किरेन रिजिजू ने इस बात की भी मांग की है कि कॉलेजियम में सरकार के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाय.

केवल एक बार नाम को वापस कर सकती है सरकार

यहां बता दें कि मौजूदा व्यवस्था के तहत सरकार किसी भी नाम को केवल एक बार ही आपत्ति कर सकती है, लेकिन यदि वही नाम फिर से आता है तब उस स्थिति में सरकार सुझाये गये नाम को स्वीकार करने को बाध्य है.

रिपोर्ट: देवेन्द्र कुमार 

Tags:GayJharkhandJudge

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