TNP DESK-बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार अब सुकून के साथ होली मना सकेगा। बता दे कि झारखंड के देवघर जिला कोषागार घोटाले मामले में मिली जमानत को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई है. यह सुनवाई अप्रैल में होगी। कोर्ट ने यह कहते हुए मामले को टाल दिया कि दलीले अभी पूरी नहीं हुई है और कुछ आरोपियों की मौत हो चुकी है. सीबीआई के वकील ने कहा कि सभी आरोपी अवैध रूप से बाहर है, सीबीआई की ओर से कहा गया कि हाईकोर्ट ने कानून के विपरीत सजा निलंबित कर जमानत दे दी, जो अवैध है.
यह भी कहा गया कि ट्रायल कोर्ट ने अधिकतम 7 वर्ष के दंडनीय अपराध में केवल साढ़े तीन वर्ष की सजा दी. जबकि लालू प्रसाद उस समय पशुपालन विभाग के प्रभारी थे और गवन की उन्हें जानकारी होने के बावजूद पर्याप्त सजा नहीं दी गई. लालू प्रसाद के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि मामले में एक से अधिक आरोपी हैं, कुछ आरोपियों को नोटिस तक नहीं मिला है. उन्होंने कहा कि अन्य आरोपी भी हैं. इतनी जल्दीबाजी की जरूरत नहीं है. जो भी हुआ है कानून के दायरे में हुआ है.
उल्लेखनीय है कि लालू यादव को देवघर कोषागार से जुड़े घोटाले में दोषी ठहराया गया था, जिसमें 89 लाख रुपए के गबन का आरोप था। विशेष सीबीआई अदालत ने लालू यादव को इस मामले में दोषी ठहराया था और उन्हें साढ़े तीन साल जेल की सजा सुनाई थी। सीबीआई ने आदेश के खिलाफ अपील करते हुए कहा कि लालू यादव उस समय पशुधन विभाग का कामकाज देख रहे थे. उसने कहा कि जांच में पता चला था कि उन्हें देवघर कोषागार में हुए गबन के बारे में पता था, फिर भी निचली अदालत ने इस जुर्म के लिए सिर्फ साढ़े तीन साल की सजा सुनाई, जिसमें अधिकतम सात साल की सजा हो सकती है. घोटाला सामने आने के समय झारखंड अविभाजित बिहार का हिस्सा था.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
