टीएनपी डेस्क(TNP DESK):एक तरफ जहां स्मार्टफोन के जमाने में लोगों की सारी परेशानियों का हल मिला है तो वहीं दूसरी तरफ काई परेशानी ने जन्म भी लिया है जहां अब यह मुश्किल बन कर लोगों के गले पड़ चुकी है.सोशल मीडिया के जमाने में लोग हाथों में स्मार्टफोन लेकर घूमते है और दिन में 100 बार ऐसा होता है जब वह फेसबुक,इंस्टाग्राम यूट्यूब खोलते है क्योंकि इसके बिना जिंदगी अधूरी सी लगती है. वहीं इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रोजाना हजारों वीडियो वायरल होते है जिनमे कभी बड़े-बड़े सेलिब्रिटी के चौंकने वाले बयान सामने आता है तो कभी उनका वीडियो.जिसमें से कई वीडियो तो असली होते है लेकिन कई वीडियो फेक भी होते है. जिसे एआई से जनरेट किया जाता है.ऐसे में लोगों को पहचान करना मुश्किल हो जाता है कि कौन सा वीडियो असली है और कौन सा नकली.
AI जमाने में पहचान करना हो गया है मुश्किल
जब तक सोशल मीडिया पर नेता या हीरो-हीरोइन के वीडियो वायरल होते है तब तक तो ठीक है, लेकिन कभी-कभी लोगों के जीवन में ऐसा भी समय आता है जब खुद उनके ही वीडियो को AI से जेनरेट करके ब्लैकमेल किया जाता है और आपसे पैसों की डिमांड भी की जाती है. ऐसे में आप घबरा जाते है क्योंकि वह वीडियो हुबहू आपके शकल आवाज और हावभाव से मैच करते है.यदि आप समझ रहे है कि आपने ऐसा कुछ नहीं किया है और वीडियो में जो भी दिख रहा है वह आपके साथ नहीं हुआ है तो यह पूरी तरह से फेक है, क्योंकि अब ऐसा करना संभव है.यदि कोई एआई से आपका वीडियो जनरेट करके आपको ब्लैकमेल कर रहा है तो फिर आपको घबराने की जरूरत नहीं है.
AI से किसी का भी वीडियो बन सकता है
AI के जमाने में आप किसी की भी फोटो लगाकर उसके हाव-भाव और आवाज से मिला सकते है और बिल्कुल आपके जैसा वीडियो तैयार कर सकते हैं जिसमे जो चाहें उसे करवा सकते है.बहुत से लोगों को तो इसकी जानकारी होती है लेकिन बहुत से लोग ऐसे भी है जिनको इसके बारे में जानकारी नहीं है और वह इस वीडियो को असली समझकर घबरा जाते है.अगर वीडियो अश्लिल क्रिएट किया गया है तो फिर लोगों के मन में बदनामी का डर आ जाता है और डर कर लोग पैसे धमकाने वाले को दे देते है लेकिन अगर आपके साथ ऐसा हो तो आपको घबराहने की जरूरत है.बल्की आपको धैर्य से काम लेना है और सबसे पहले इस वीडियो की पहचान करनी है कि ये असली है या जेनरेट.
टेक्नोलॉजी इंसान के हवाओं को मैच नहीं करता
AI वीडियो भले ही असली जैसे दिखते हो लेकिन वह असली नहीं होते है क्योंकि टेक्नोलॉजी कितना भी डेवलप हो जाए एक इंसान के एक्सप्रेशन को मैच नहीं कर पाता है.उसमे कुछ न कुछ ऐसी कमियाँ होती हैं जिसको यदि ध्यान से देखा जाए तो आप पहचान कर सकते है कि वह जनरेट किया गया वीडियो है.डीपफेक वीडियो में कई बार स्माइल असली जैसी नहीं लगती है, होंठों के मूवमेंट से मेल नहीं खाती है, आईब्रो और गाल अजीब तरह से मूव करते दिखाई देते है. इसके अलावा असली इंसान के चेहरे की मूवमेंट नैचुरल होती है, जबकि नकली वीडियो में थोड़ी
इस तरीका से कर सकते है असली नकली की पहचान
असली वीडियो में रोशनी चेहरे कपड़ो और बैकग्राउंड पर नैचुरल तरीके से पड़ती है.अगर कोई वीडियो वायरल हो रहा है तो उसके पीछे का सच पता लगानेके लिए गूगल लेंस या गूगल रिवर्स इमेज सर्च का इस्तेमाल किया जा सकता है. वीडियो के स्क्रीनशॉट को अपलोड करके भी आप उसका सोर्स पता लगा सकते है. इसके अलावा InVID जैसे टूल्स भी वायरल वीडियो की सच्चाई जांचने में मदद करते है.
AI डिटेक्शन टूल्स की मदद
आपको बताएं कि आप AI डिटेक्शन टूल्स की भी मदद ले सकते है. आज कई वेबसाइट और टूल्स ऐसे है जो फोटो, वीडियो, ऑडियो और टेक्स्ट को स्कैन करके बताते हैं कि वह एआई से बना है या नहीं. AI or Not, GPT Zero, Zero GPT, QuillBot Detector और ThecHive AI Detector जैसे टूल्स काफी आसान से वीडियो के असली नकली की पहचान कर लेते है.
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