TNP DESK : भारत में डायबिटीज़ एक गंभीर लेकिन “खामोश” बीमारी बनती जा रही है. चिंताजनक बात यह है कि देश में हर 10 में से लगभग 4 लोग डायबिटीज़ के खतरे से पूरी तरह अनजान हैं. जागरूकता की कमी, अनियमित जीवनशैली और गलत खानपान के कारण यह बीमारी तेजी से फैल रही है. विशेषज्ञों के अनुसार समय पर पहचान और सही जीवनशैली अपनाकर डायबिटीज़ को रोका या नियंत्रित किया जा सकता है.
शुरू-शुरू में नजर नहीं आते हैं डायबिटिज के लक्षण
डायबिटीज़ के प्रमुख लक्षण अक्सर शुरुआत में नजर नहीं आते, इसी वजह से लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते. बार-बार प्यास लगना, ज्यादा पेशाब आना, अचानक वजन घटना या बढ़ना, लगातार थकान महसूस होना, धुंधला दिखना, घावों का देर से भरना और बार-बार संक्रमण होना इसके सामान्य लक्षण हैं. कई मामलों में जब तक मरीज डॉक्टर तक पहुंचता है, तब तक शुगर लेवल काफी बढ़ चुका होता है.
भविष्य के लिए गंभीर संकेत
भारत में डायबिटीज़ फैलने के मुख्य कारणों में शारीरिक गतिविधि की कमी, जंक फूड का बढ़ता सेवन, मोटापा, तनाव और अनुवांशिक कारण शामिल हैं. शहरी जीवनशैली के साथ-साथ अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी यह समस्या तेजी से बढ़ रही है. कम उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं, जो भविष्य के लिए गंभीर संकेत है.
जीवनशैली में बदलाव सबसे अहम
डायबिटीज़ से बचाव के लिए जीवनशैली में बदलाव सबसे अहम है. रोजाना कम से कम 30 मिनट टहलना या व्यायाम करना, संतुलित और पौष्टिक आहार लेना, मीठा और तला-भुना कम करना, वजन नियंत्रित रखना और तनाव से दूरी बनाना जरूरी है. इसके साथ ही 30 वर्ष की उम्र के बाद या परिवार में डायबिटीज़ का इतिहास होने पर नियमित ब्लड शुगर जांच कराना बेहद आवश्यक है.
जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार
विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है. यदि लोग समय रहते लक्षणों को पहचान लें और स्वस्थ आदतें अपनाएं, तो डायबिटीज़ जैसी गंभीर बीमारी से होने वाली जटिलताओं से बचा जा सकता है.
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