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क्या देश में लोकतंत्र की हो रही है हत्या? सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी के बाद उठ रहे कई सवाल

BY -
Sanjeev Thakur CW
Sanjeev Thakur CW
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 17, 2026, 8:45:58 AM

TNP Desk : देश में क्या लोकतंत्र की हत्या हो रही है? या देश में लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश रची जा रही है? क्या इसकी शुरुआत चंडीगढ़ मेयर चुनाव के परिणाम से आगाज हो चुका है या इससे पहले से ही हो चुकी है? इन तमाम सवालों का जवाब लोग ढूंढ रहे हैं. क्योंकि जब से सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी आई है कि हम लोकतंत्र की हत्या नहीं होने देंगे तभी से लोगों के मन में उधेरबुन है. कई तरह के सवाल लोगों के जेहन उठ रहा है. क्योंकि अभी लोकसभा चुनाव होने वाला है.

किस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने की टिप्पणी

दरअसल अभी हाल ही में चंडीगढ़ में मेयर चुनाव हुआ. चुनाव के परिणाम के बाद वहां बवाल मचा हुआ है. कांग्रेस और आप का कहना है चुनाव में हमें 36 वोट मिले जिसमें से आठ वोट को निरस्त कर भाजपा प्रत्याशी को मेयर बना दिया गया. आप ने इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. जब इस पर सुनवाई हुई तो उच्चतम न्यायालय ने चुनाव कराने वाले निर्वाचन अधिकारी को फटकार लगाते हुए कि ये साफ है कि उन्होंने बैलेट पेपर्स के साथ छेड़छाड़ की जिसके लिए उन पर मुकदमा चलना चाहिए और उनका ये कृत्य लोकतंत्र की हत्या व माखौल है.

चंडीगढ़ मेयर चुनाव में गड़बड़ी से स्तब्ध सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि यह इस प्रकार से लोकतंत्र की हत्या करने नहीं देगी और अदालत चुनावी प्रक्रिया की शुचिता से संतुष्ट नहीं होने पर नये सिरे से चुनाव कराने का आदेश देगी. कोर्ट ने पूछा कि निर्वाचन अधिकारी एक अधिकारी हैं या भगोड़ा. सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ मेयर चुनाव मामले में 19 फरवरी को अगली सुनवाई के दौरान उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति का निर्देश देने के अलावा मतपत्रों और चुनाव कार्यवाही के वीडियो को संरक्षित करने का भी आदेश दिया है.

आप पार्षद की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई

न्यायालय ने यह आदेश महापौर का चुनाव हारने वाले आम आदमी पार्टी (आप) के पार्षद कुलदीप कुमार की उस याचिका पर गौर करने के बाद दिया, जिसमें कहा गया था कि निर्वाचन अधिकारी ने कांग्रेस-आप गठबंधन के पार्षदों के आठ मत पत्रों पर निशान लगाते हुए उन्हें अमान्य करार दिया. बीजेपी ने 30 जनवरी को चंडीगढ़ महापौर चुनाव में जीत हासिल की और सभी तीन पद बरकरार रखे, जिसपर कांग्रेस-आप गठबंधन ने निर्वाचन अधिकारी पर मतपत्रों के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया था.

वीडियो देखने के बाद चीफ जस्टिस ने लगाई फटकार

महापौर पद के लिए हुए चुनाव में बीजेपी के मनोज सोनकर ने आप के कुलदीप कुमार को हराया. मनोज सोनकर को 16, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी कुलदीप कुमार को 12 वोट मिले थे. वहीं, आठ वोट को अवैध घोषित कर दिया गया था. चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने चुनावी प्रक्रिया की वीडियो रिकार्डिंग देखने के बाद कहा, ‘‘यह स्पष्ट है कि उन्होंने (निर्वाचन अधिकारी) मतपत्रों को विरूपित कर दिया. इस व्यक्ति पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए. देखिये, वह कैमरे की ओर क्यों देख रहे हैं. श्रीमान सॉलिसिटर (जनरल), यह लोकतंत्र का माखौल है और लोकतंत्र की हत्या है, हम स्तब्ध हैं. क्या यह एक निर्वाचन अधिकारी का आचरण है.’’

सभी पर सुप्रीम कोर्ट की नजर

चंडीगढ़ के अधिकारियों की ओर से कोर्ट में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा, ‘‘कोर्ट के पास तस्वीर का केवल एक पहलू है. चुनिंदा रूप से कही गई किसी बात के आधार पर कोई राय न बनाएं.’’ पीठ में, जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा भी शामिल हैं. पीठ ने कहा, ‘‘...यह व्यक्ति मतपत्र को विरूपित कर देता है और कैमरे की ओर देखता है. कृपया अपने चुनाव अधिकारी को बताएं कि सुप्रीम कोर्ट उन पर नजर रख रहा है. हम इस तरह लोकतंत्र की हत्या नहीं होने देंगे. सबसे बड़ी स्थिरकारी शक्ति चुनाव प्रक्रिया की शुचिता है और यहां क्या हुआ.’’

बीजेपी के बड़े नेताओं ने दी थी जीत बधाई

मेयर चुनाव में बीजेपी के मनोज सोनकर की जीत पर भाजपा के बड़े-बड़े नेताओं ने जीत की बधाई थी. अब सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी के बाद किसी नेता का कोई बयान नहीं आया है. बता दें कि चुनाव में आप और कांग्रेस गठबंधन ने दावा किया था उनके पास 20 वोट हैं और उन्हें ही जीत मिलेगी. वहीं जब वोटिंग के बाद नतीजा आया तो 8 वोट अवैध घोषित कर दिया गया और बीजेपी प्रत्याशी को 16 वोटों से विजयी घोषित कर दिया. वहीं आम आदमी पार्टी के कुलदीप कुमार को 12 वोटों के साथा पराजित बताया गया. चुनाव परिणाम के बाद कुलदीप फूट-फूटकर रोने लगे थे.

लोकसभा चुनाव में पड़ेगा असर ?

चुनाव में जनता के द्वारा ही नेता चुने जाते हैं जो लोकतंत्र के मंदिर तक पहुंचते हैं. लेकिन किसी खास पार्टी या नेता को जिताने के लिए अगर जनता के द्वारा वोटों को ही निरस्त कर दिया जाए तो लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा है. वहीं सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद इसका असर आने वाले लोकसभा चुनाव में भी दिखेगा.

 

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