भागलपुर(BHAGALPUR): बिहार में मन्त्रियों और नेताओं द्वारा विवादित बयान देने का दौर जारी है. कभी मंत्री चंद्रशेखर रामचरितमानस को नफरत फैलाने वाला ग्रन्थ बताते हैं तो कभी जदयू नेता गुलाम रसूल बलियावी शहर को कर्बला बना देने की बात करते हैं. अब बिहार सरकार के मंत्री आलोक मेहता ने विवादित बयान दे दिया है. भागलपुर के गोराडीह पहुंचे बिहार सरकार के मंत्री आलोक मेहता ने एक सभा को सम्बोधित करते हुए अनर्गल बयान दिया है. इस बार का बयान धर्म नहीं बल्कि सवर्णों को लेकर दिया गया है.
मंत्री आलोक मेहता ने कहा कि जो दस प्रतिशत वाले लोग हैं, वह कभी अंग्रजों के दलाल हुआ करते थे. उनका काम सिर्फ घण्टी बजाना था. जो 10% लोग हैं, उनके सामने जो आवाज उठाता था, उनकी जुबान बंद कर दी जाती थी. उन्होंने कहा कि जो लोग दस प्रतिशत हैं, उन्हें ईडब्ल्यूएस कहा जाता है या दलित शोषित के लिए उचित नहीं है, आने वाले समय में आरक्षण पर खतरा है.