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संताल में कांग्रेस को है जमीन की तलाश! उधर पलामू में झामुमो की बढ़ रही है सक्रियता, क्या है इसके सियासी मायने, देखिए यह रिपोर्ट 

संताल में कांग्रेस को है जमीन की तलाश! उधर पलामू में झामुमो की बढ़ रही है सक्रियता, क्या है इसके सियासी मायने, देखिए यह रिपोर्ट 

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में आज कांग्रेस दुमका से हाथ से हाथ जोड़ो कार्यक्रम की शुरुआत करने जा रही है. कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे का यह पहला झारखंड दौरा है. और उनके द्वारा अपने पहले दौरे के लिए संथाल की जमीन को मुफीद पाया गया. 

संताल की जमीन कभी भी कांग्रेस के लिए मुफीद नहीं रहा

वही संताल, जहां कांग्रेस कभी भी बहुत प्रभावकारी नहीं रहा. यह पूरा संताल झामुमो का पुराना गढ़ माना जाता है. वह संताल जिसे झामुमो का घोर विरोधी भाजपा भी फतह नहीं कर पायी. कांग्रेस के द्वारा फतह करने की रणनीति बनायी जा रही है. 

कांग्रेस का पुराना किला है पलामू

कांग्रेस इस कार्यक्रम की शुरुआत पलामू से भी कर सकती थी, पलामू उसका पुराना गढ़ भी रहा है, लेकिन उसने इस कार्यक्रम की शुरुआत के लिए दुमका को ही क्यों चुना?  यह कई सवाल खड़े कर रहा है, सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि क्या झामुमो के जिस किले को भाजपा फतह नहीं कर पायी उसे क्या कांग्रेस हथियाना चाहती है.

दो मित्र दलों के द्वारा एक दूसरे की जमीन को हथियाने की अनोखी पहल

वैसे देखा जाय तो हर राजनीतिक दल अपना विस्तार चाहती है, विरोधी दलों के किले को भेदना चाहती है, उसके समर्थक और आधार मत में सेंधमारी करने की रणनीति भी बनाती है. लेकिन यहां तो यह पूरा मामला दो मित्र दलों का है. एक साथ मिल बैठ कर सत्ता का रसास्वाद करते कांग्रेस और झामुमो के द्वारा एक दूसरे के किले में सेंधमारी की जा रही है.

क्या कांग्रेस और झामुमो को इस बात का एहसास है कि दोनों की दोस्ती लम्बी नहीं चलने वाली

क्या इसका अर्थ यह भी लगाया जाय कि दोनों दलों को इस बात का अहसास है कि लम्बे समय उनकी जोड़ी नहीं जमने वाली, साथ ही क्या कांग्रेस के अन्दर इस बात की भी पीड़ा है कि झामुमो के द्वारा चुन-चुन कर अपना हर राजनीतिक घोषणा पत्र को लागू कर दिया  गया, और इसके सहारे एक मजबूत राजनीतिक जमीन तैयार कर ली गयी, वहीं कांग्रेस के पास सिवा हेमंत सोरेन के साथ खड़ा होने के कोई विकल्प नहीं बचा. 
1932 का खतियान का हो या सरना धर्म कोड का मुद्दा या फिर ओबीसी आरक्षण में विस्तार हेमंत सोरेन इसे लागू करवाने में कामयाब रहें, लेकिन कांग्रेस चाह कर भी इन मुद्दों पर अपना स्टैंड नहीं ले सकी. उल्टे उसके तीन विधायकों पर हेमंत सरकार को अस्थिर करने का आरोप भी लगा, कांग्रेस की ओर से इन विधायकों के खिलाफ कार्रवाई भी की गयी. कांग्रेस के विधायकों पर बिकने का आरोप भी लगा. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इसके बदले कांग्रेस को मिला क्या? 

मल्लिकार्जुन खड़गे की रणनीति का हिस्सा है दुमका से हाथ से हाथ जोड़ो कार्यक्रम की शुरुआत

शायद कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेवारी संभालाने के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे इसी सवाल को खंगाल रहे हों, और एक सुनियोजित तरीके से कांग्रेस को धारदार बनाने की शुरुआत के लिए दुमका का चयन किया गया हो. यहां हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि हाल के दिनों में कांग्रेस का गढ़ माना जाने वाला पलामू में झामुमो की सक्रियता बढ़ी है, झामुमो की पलामू में एक विशेष रणनीति के तहत अपने जनाधार में विस्तार करने की कोशिशों में जुटा है.

रिपोर्ट: देवेन्द्र कुमार 

Published at:11 Feb 2023 12:50 PM (IST)
Tags:jharkhandcongressमल्लिकार्जुन खड़गे
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