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कॉकरोच ने पहली बार किया इतना बड़ा काम, भूकंप प्रभावित म्यांमार में लोगों की बचाई जान, जानिए कैसे

कॉकरोच ने पहली बार किया इतना बड़ा काम, भूकंप प्रभावित म्यांमार में लोगों की बचाई जान, जानिए कैसे

टीएनपी डेस्क : क्या आप सोच सकते हैं कि कॉकरोच जिसको देखकर ही लोग उसे घृणा करने लगते हैं, उसे मारने का, भगाने का प्रयास करते हैं. वह मानव जीवन के लिए कितना महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा भूकंप प्रभावित म्यांमार में लगा जहां कॉकरोच ने मलबे में दबे लोगों की जानकारी राहत टीम को पहुंचाई.ऐसा दुनिया में पहली बार हुआ है.

भूकंप प्रभावित म्यांमार में कॉकरोच के सहयोग के बारे में जानिए

आपको पता है कि पिछले 27 मार्च को म्यांमार में भयंकर भूकंप आया इसकी तीव्रता 7.7 थी. 3000 से अधिक लोगों की मौत हो गई. महल के महल इमारतें ताश के पत्तों की तरह के ढह गए. आर्थिक रूप से तंगहाल म्यांमार में इस प्रकार की विपदा बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण रही है. भारत ने भी बड़ी मात्रा में राहत सामग्री पहुंचाई. वहां भारतीयों का दल पहुंचकर लोगों का इलाज किया. लोगों को सहायता दी. सहायता देने के लिए अन्य देशों ने भी हाथ बढ़ाए पर हम बात करना चाह रहे हैं कॉकरोच की.  कॉकरोच के बारे में इस तरह की जानकारी आपको शायद सच्ची ना लगे, परंतु सच है यह कॉकरोच सिंगापुर से भेजे गए. इन सायबॉर्ग कीड़ों को नेपीडॉ और मंडले में मलबे के नीचे फंसे लोगों को ढूंढ़ने के काम में लगा गया. साइबार्ग का इस्तेमाल मानवीय अभियान में पहली बार किया गया है. पहली बार कीट हाइब्रिड रोबोट को क्षेत्र में तैनात किया गया.

साइबोर्ग कॉकरोच को होम टीम साइंस एंड टेक्नोलॉजी एजेंसी ने नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी और क्लास इंजीनियरिंग एंड सॉल्यूशंस के साथ मिलकर विकसित किया है. उन्हें पहली बार 31 मार्च को  और दो बार 3 अप्रैल को राजधानी नेपिता में तैनात किया गया. बताया जा रहा है कि ऐसा अभियान में उन्हें कोई जीवित व्यक्ति नहीं मिला है लेकिन साइबार्ग ने टीम को सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में से कुछ जमीन को कवर करने में मदद की. एससीडीएफ ने 29 मार्च को म्यांमार में 80 सदस्य बल और चार फौजी कुत्ते भेजे. एक टीम इसमें इसके दो इंजीनियर और क्लास इंजीनियर एंड सॉल्यूशंस के दो इंजीनियर के एक दिन बाद कॉकरोच के साथ ऑपरेशन में गए थे. इंफ्रारेड कैमरे और सेंसर से लैस प्रत्येक मेडागास्कर एशियाई कॉकरोच लगभग 6 सेंटीमीटर लंबा होता है.अपने छोटे आकार के कारण यह दूर से नियंत्रित होने के दौरान मलबे के नीचे छोटी जगह पर आसानी से  आ जा सकता है.कॉकरोच को नियंत्रित करने के लिए इलेक्ट्रोड का उपयोग किया गया है.जानकार बताते हैं कि कॉकरोच के पास कैमरा से कैमरा और सेंसर के माध्यम से  जानकारी एकत्रित किया जाता है इससे पता चला कि अंदर कुछ है या नहीं.

Published at:09 Apr 2025 08:58 AM (IST)
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