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झारखंड -बंगाल कोयला घोटाला: क्या है "लाला पैड" की रोचक कहानी, कैसे करता था यह काम ?

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: April 16, 2026, 2:17:35 PM

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): प्रवर्तन निदेशालय ने झारखंड और बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में चल रहे कोयले के अवैध खनन और तस्करी के एक बड़े सिंडिकेट का खुलासा किया है. निदेशालय ने इस मामले में विशेष अदालत में चार्ज शीट दाखिल की है, जिसमें 650 करोड रुपए से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग का जिक्र है. यह सिंडिकेट केवल बंगाल ही नहीं, बल्कि झारखंड में भी सक्रिय था. इसमें एक प्रमुख नाम अनुप मांझी उर्फ लाला का सामने आया. जानकारी के अनुसार लाला की अपनी समानांतर व्यवस्था थी. जांच में यह बात सामने आई है कि बड़े पैमाने पर इलीगल माइनिंग और कोयला चोरी का वह बादशाह था. पश्चिम बंगाल सहित झारखंड की कई फैक्ट्रियों में उसका सिंडिकेट कोयले की आपूर्ति करता था. 

"लाला पैड" नामक एक अवैध परिवहन चालान सिस्टम करता था काम 
 
वह "लाला पैड" नामक एक अवैध परिवहन चालान सिस्टम का उपयोग करता था. जानकार बताते हैं कि "लाला पैड" के उपयोग का तरीका भी काफी रोचक था. फर्जी परिवहन चालान के साथ ट्रांसपोर्टों को 10 या 20 रुपये का एक नोट दिया जाता था. ट्रांसपोर्टर अवैध कोयले से भरे ट्रक, डंपर या अन्य किसी वाहन के नंबर प्लेट के पास नोट को पकड़कर उसकी तस्वीर लेते थे. उसके बाद यह तस्वीर कोयला गिरोह के संचालक को भेजी जाती थी. संचालक फिर उसे तस्वीर को व्हाट्सएप के जरिए सड़क में पड़न  वाले सभी संबंधित पुलिस पदाधिकारी को भेजता था. यह इसलिए होता था कि ट्रक रोका नहीं जाए और अगर रोक भी लिया गया है, तो उसे तुरंत छोड़ दिया जाए.  

पैसे के लेन-देन के लिए किया जा रहा था अजीब "हवाला नेटवर्क" का उपयोग

जानकारी तो यह भी निकल कर आ रही है कि कोयला चोरी से प्राप्त राशि नगद में स्थानांतरित करने के लिए एक अजीब "हवाला नेटवर्क" का उपयोग किया जा रहा था. कहा जाता है कि लेनदेन को विशिष्ट पहचान कर्ता, प्रेषक और प्राप्तकर्ताओं के बीच साझा किए गए करेंसी नोट के सीरियल नंबर के जरिए लेनदारी और देनदारी को प्रमाणित किया जाता था.  प्रमाणित होने के बाद उसे राशि सौंप दी जाती थी. बैंकों से इनका कोई लेना-देना नहीं होता. उल्लेखनीय है कि कोयले के अवैध कारोबार से कोल इंडिया की सहायक कंपनियों को बड़ा नुकसान हुआ है और अभी भी हो रहा है. बता दें कि कोयले के इतिहास में पहली बार प्रवर्तन निदेशालय ने झारखंड और बंगाल के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी. उसे छापेमारी में धनबाद भी शामिल था. उसके बाद अब जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, प्याज के छिलके की भांति परत दर परत मामले सामने आ रहे हैं.

रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो  

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