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गया में देश के सबसे बड़े रबर डैम का आज सीएम नीतीश करेंगे उद्घाटन, जानिये यह होता क्या है 

BY -
Samiksha Singh
Samiksha Singh
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 16, 2026, 4:56:30 PM

पटना(PATNA): मोक्ष की भूमि गया में देश का सबसे बड़ा रबर डैम आज शुरू हो जाएगा. इसका विधिवत उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार करेंगे. वह पितृपक्ष मेले का भी शुभारंभ करेंगे. इसके साथ ही सीताकुंड तक जाने के लिए नए बने स्टील ब्रीज का भी मुख्यमंत्री लोकार्पण करेंगे. कार्यक्रम दोपहर लगभग एक बजे के आसपास होने की संभावना है. कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव शामिल होंगे. इसे लेकर भव्य मंच का निर्माण कराया गया है.

261 करोड़ की लागत से बनाया गया रबर डैम 

डीएम ने बताया की फल्गु नदी के तट पर विष्णुपद मंदिर के नजदीक सालों भर जल उपलब्ध कराने के लिए गयाजी डैम का निर्माण करवाया गया है. विष्णुपद मंदिर के निकट फल्गु नदी के सतही प्रवाह को रोकने के लिए 3 मीटर ऊंचा एवं 411 मीटर की लंबाई में भारत का सबसे लंबा रबर डैम का निर्माण करवाया गया है. जिसमें 65- 65 मीटर लंबाई के 06 span हैं. इसके रबर ट्यूब में आधुनिक स्वचालित विधि से हवा भरी एवं निकाली जा सकती है. जिसके कारण फल्गु नदी के जल के प्रवाह एवं भंडारण को प्रभावी रूप से संचालित किया जा सकेगा. रबर डैम 261 करोड़ की लागत से बनाया गया है. 

411 मीटर लंबा स्टील पैदल पुल का भी हुआ निर्माण

पहले गया जी डैम के निर्माण का लक्ष्य 2023 तक पूरा करने का था, लेकिन बाद में सीएम के निर्देश पर इसे पितृपक्ष मेले से पहले पूरा कर दिया गया. ताकि मेले में आनेवाले लोगों को इसका लाभ मिल सके. इसके साथ ही श्रद्धालुओं के विष्णुपद घाट से सीताकुंड तक पिंडदान देने जाने के लिए रबड़ डैम के ऊपर 411 मीटर लंबा स्टील पैदल पुल का भी निर्माण किया गया है. इसके साथ ही स्टील पैदल पुल से उतरकर सीताकुंड तक पहुंचने के लिए पैदल पथ भी तैयार किया गया है. श्रद्धालुओं द्वारा पिंडदान के समय उपयोग किए जा रहे नदी के पानी की स्वच्छता बनाए रखने के लिए बाएं तट पर 752 मीटर की लंबाई में भूमिगत मनसरवा नाला का भी निर्माण किया गया है.

क्या होता है रबर डैम

रबर बांध की तकनीक चीन और साउथ कोरिया में वर्षों से उपयोग में आ रही है. भारत में ये हैदराबाद, लखनऊ, आगरा सहित कई स्थानों पर बनाया गया है. इसमें नदी के सतही जल को रोककर पानी जमा करने के लिए कंक्रीट के साथ बैलून का भी इस्तेमाल किया जाता है. इस नई तकनीक का प्रयोग बिहार में पहली बार हुआ है. गयाजी डैम योजना का प्रारूप आईआईटी रूड़की ने तैयार किया था. रबर बांध का बेस तो कंक्रीट पर ही खड़ा होता है, लेकिन इसमें स्टील के गेट की जगह रबर बैलून लगे होंते हैं, जिनके अंदर हवा भरी होती है. ये बैलून विशेष प्रकार की रबर से तैयार होते हैं, जिसे एथेलिन प्रोपाइलिन डाइन मोनोमर कहा जाता है। आवश्यकता अनुसार इसे छोटा, बड़ा भी किया जा सकता है. बैलून के स्पिल वे के माध्यम से पानी का फ्लो बना रहेगा.

Tags:News

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