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कॉनवेंट स्कूल के तर्ज पर गरीबों के लिए शुरू किया गया सीएम एक्सीलेंस स्कूल, देखिए कैसे बदली आदिवासी बच्चों की किस्मत

BY -
Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 4:18:17 AM

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): झारखंड अपने गौरवशाली 25 वर्षों का जश्न मना रहा है. इन 25 सालों में राज्य ने शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास जैसे कई क्षेत्रों में नई ऊंचाइयों को छुआ है. राज्य गठन के समय जिस झारखंड का सपना देखा गया था, एक ऐसा राज्य जहां हर बच्चे को शिक्षा का समान अधिकार मिले. आज वह परिकल्पना साकार होता नज़र आ रहा है. पर इस सपने को हकीकत में उतारने की दिशा में सबसे बड़ा कदम मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार का “सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस (CM School of Excellence)” है, जिसने सरकारी स्कूलों की परिभाषा ही बदल दी है.

एक समय था जब सरकारी स्कूलों की हालत बद से बदत्तर थी पर आज स्थिति काफी अलग है. सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस एक ऐसा स्कूल साबित हुआ है जो राज्य के उन गरीब और आदिवासी बच्चों के लिए वरदान बन गया है जो पहले कॉनवेंट स्कूलों की शिक्षा का केवल सपना ही देख सकते थे.

शिक्षा में झारखंड की नई पहचान

“सीएम एक्सीलेंस स्कूल” झारखंड सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण और गरीब तबके के बच्चों को विश्वस्तरीय शिक्षा देना है. इन स्कूलों को सीबीएसई (CBSE) पैटर्न पर आधारित किया गया है, ताकि छात्र राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी अपनी पहचान बना सकें. राज्य में वर्तमान में 80 सीएम एक्सीलेंस स्कूल संचालित हो रहे हैं. इसके अलावा, प्रखंड स्तरीय आदर्श विद्यालयों को भी अपग्रेड कर इन्हें सीएम एक्सीलेंस स्कूल में बदला जाएगा.

इन स्कूलों में मिलती हैं कॉनवेंट जैसी सुविधाएं

इन स्कूलों को देखकर कोई यह नहीं कह सकता कि यह सरकारी स्कूल हैं. आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, सुसज्जित कक्षाएं, लैब्स और खेल मैदान, सब कुछ कॉनवेंट स्कूलों जैसा है.
भाषा लैब (Language Lab) – जहां छात्र अंग्रेजी और अन्य भाषाओं पर दक्षता हासिल करते हैं.
कंप्यूटर लैब (Computer Lab) – डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करते हुए बच्चों को तकनीकी ज्ञान दिया जाता है.
साइंस और मैथ्स लैब (Science & Maths Labs) – प्रयोगों और एक्टिव लर्निंग के जरिए बच्चों की समझ बढ़ाई जाती है.
स्मार्ट क्लासरूम और पुस्तकालय (Smart Classroom & Library) – आधुनिक शिक्षण तकनीकों और रिच लर्निंग मटेरियल से छात्रों का ज्ञान विस्तारित होता है.
खेलकूद की सुविधाएं – शारीरिक विकास और टीम स्पिरिट को बढ़ावा देने के लिए हर स्कूल में खेल के मैदान और सुविधाएं हैं.

इन स्कूलों में कोई फीस नहीं ली जाती, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे भी अच्छी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं.
नामांकन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी
सीएम एक्सीलेंस स्कूल में नामांकन के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है.
आवेदन ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों माध्यमों से किया जा सकता है.
कोई आवेदन शुल्क नहीं लिया जाता.
परीक्षा के बाद मेरिट लिस्ट जारी की जाती है और चयनित छात्रों को निर्धारित समय में नामांकन का मौका दिया जाता है.
शैक्षणिक सत्र 2025–26 के लिए आवेदन की तिथि 20 जनवरी से 10 फरवरी 2025 तय की गई है.

राज्य सरकार की योजना है कि आने वाले वर्षों में इन स्कूलों की संख्या को 4,496 तक बढ़ाया जाए. यह केवल एक संख्या नहीं बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में झारखंड के स्वप्न और संकल्प का प्रतीक है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि “सीएम एक्सीलेंस स्कूल सिर्फ शिक्षा का माध्यम नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने का द्वार हैं.” उनका लक्ष्य है कि झारखंड के हर प्रखंड में ऐसा एक स्कूल हो जो बच्चों को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने की प्रेरणा दे.

पहले जहां ग्रामीण इलाकों के बच्चे संसाधनों के अभाव में पढ़ाई बीच में छोड़ देते थे, अब वही बच्चे सीएम एक्सीलेंस स्कूलों से निकलकर डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक और प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना देख रहे हैं.

कई छात्रों ने बताया कि पहले वे कॉनवेंट स्कूलों के बच्चों से मुकाबला नहीं कर पाते थे, लेकिन अब वे खुद आत्मविश्वास से भरे हैं. आधुनिक लैब, अंग्रेजी बोलने की सुविधा और अच्छे शिक्षकों की वजह से उनकी सोच और जीवन दोनों बदल गए हैं. ऐसे में 25 साल पहले जिस झारखंड ने एक समृद्ध और शिक्षित समाज का सपना देखा था, वह सपना “सीएम एक्सीलेंस स्कूल” की पहल से साकार हो रहा है.

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