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किस समझौते की आड़ में भारत और अमेरिका के बीच सैन्य अभ्यास का विरोध कर रहा चीन

BY -
Prakash Tiwary
Prakash Tiwary
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 15, 2026, 3:28:39 AM

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): भारत और अमेरिका के बीच अक्टूबर में सैन्य अभ्यास होने वाला है. मगर, इसके पहले ही इस सैन्य अभ्यास का चीन विरोध कर रहा है. चीन का कहना है कि यह युद्धाभ्यास द्विपक्षीय सीमा मुद्दे में हस्तक्षेप (interference in the bilateral boundary issue) है.

बता दें कि अभी भारत और अमेरिका के बीच होने वाले सैन्य अभ्यास की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. यह अभी सिर्फ अनुमान है कि दोनों देश अक्टूबर 2022 में उत्तराखंड के औली में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से लगभग 100 किमी दूर "युद्ध अभ्यास(Yudh Abhyas)" के 18वें संस्करण में भाग लेंगे.

चीन LAC के पास सैन्य अभ्यास का विरोध क्यों करता है?

भारत और अमेरिका के बीच अगर, सैन्य अभ्यास हो रहा है तो इससे चीन को क्या आपत्ति हो सकती है. चलिए इसका जवाब समझते हैं. दरअसल, चीन का कहना है कि दोनों देश इस बात पर सहमत हुए हैं कि दोनों देशों के बीच वास्तविक सीमा एलएसी(LAC) के पास कोई सैन्य अभ्यास नहीं किया जाएगा. चीन ने 1993 और 1996 में भारत और चीन द्वारा हस्ताक्षरित दो समझौतों का हवाला देते हुए कहा कि यह अभ्यास दोनों का उल्लंघन करता है. 1993 में भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति और शांति बनाए रखने पर समझौता हुआ थ. वहीं 1996 में भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ सैन्य क्षेत्र में विश्वास-निर्माण उपायों पर समझौता हुआ था.

1993 और 1996 दोनों समझौतों का एक प्रमुख तत्व यह है कि दोनों पक्ष LAC के साथ-साथ क्षेत्रों में अपनी सेना को न्यूनतम स्तर तक रखेंगे. हालांकि, समझौते यह परिभाषित नहीं करते हैं कि न्यूनतम स्तर में क्या शामिल है. 1993 और 1996 के समझौतों में यह भी अनिवार्य है कि सीमा प्रश्न का अंतिम समाधान लंबित होने तक दोनों पक्ष एलएसी(LAC) का कड़ाई से सम्मान करेंगे. 1993, 1996 और 2005 के समझौतों के अनुसार LAC पर आग्नेयास्त्रों(firearms) के उपयोग को सख्ती से नियंत्रित किया जाता है.

युद्ध अभ्यास क्या है?

भारत और अमेरिका के बीच जिस युद्धाभ्यास का चीन विरोध कर रहा है, उसे भी जान लेते हैं. ‘युद्ध अभ्यास’ भारत और अमेरिका के बीच सबसे बड़ा चल रहा संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण और रक्षा सहयोग प्रयास (joint military training and defence cooperation endeavor) है.

इस अभ्यास की शुरुआत 2004 में यूएस आर्मी पैसिफिक पार्टनरशिप प्रोग्राम(US Army Pacific Partnership Program) के तहत की गई थी. अभ्यास दोनों देशों के बीच बारी-बारी से आयोजित किया जाता है.इस अभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच समझ, सहयोग और अंतःक्रियाशीलता को बढ़ाना है. इससे उन्हें संयुक्त राष्ट्र के दायरे में ठंडी जलवायु परिस्थितियों वाले पहाड़ी इलाकों में बटालियन स्तर पर संयुक्त अभियान चलाने में मदद मिलेगी.

क्या है दो देशों के बीच विवाद का मुद्दा?

भारत और चीन के बीच बहुत पहले से सीमा विवाद चला आ रहा है. 1962 के युद्ध के बाद चीनियों ने दावा किया कि वे नवंबर 1959 में एलएसी (LAC) से 20 किमी पीछे हट गए थे. पूर्वी क्षेत्र में सीमा मुख्य रूप से तथाकथित मैकमोहन रेखा (McMahon Line) के साथ मिलती है और पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों में यह पारंपरिक प्रथागत रेखा (traditional customary line) के साथ मुख्य रूप से मेल खाती है जिसे लगातार चीन द्वारा इंगित किया गया है.

2017 में डोकलाम संकट के दौरान, चीन ने भारत से "1959 LAC" का पालन करने का आग्रह किया था. लेकिन, भारत ने 1959 और 1962 दोनों में LAC की अवधारणा को खारिज कर दिया.

 

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