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चैती छठ पूजा : नहाए खाए के साथ आज से शुरू हुआ चैती छठ महापर्व, जानिए क्यों इसे माना जाता है दुनिया का सबसे कठिन व्रत

BY -
Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: March 22, 2026, 11:05:49 AM

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): आज से चैती छठ महापर्व की शुरुआत हो रही है. आज नहाए खाए के साथ चार दिवसीय छठ पर्व की शुरुआत हो चुकी है. ऐसे में पहले दिन यानि की 22 मार्च को नहाए खाए के साथ कद्दू भात खाने की परंपरा निभाई जाएगी. है. चार दिनों तक चलने वाला यह कठिन और पवित्र पर्व खासतौर पर बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में गहरी आस्था के साथ मनाया जाता है. यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है, जिसमें व्रती 36 घंटे का कठोर निर्जला व्रत रखकर पूरी श्रद्धा से पूजा-अर्चना करते हैं. आइए जानते हैं इस वर्ष चैती छठ की तिथियां और इससे जुड़े प्रमुख नियम.

चैती छठ 2026 की तिथियां
22 मार्च : नहाय-खाय
23 मार्च : खरना
24 मार्च : संध्या अर्घ्य
25 मार्च : उषा अर्घ्य और पारण

नहाय-खाय से होती है शुरुआत
पहले दिन व्रती स्नान कर शुद्ध और सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं. इस दिन घर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है और पूरी पवित्रता के साथ भोजन तैयार किया जाता है.

खरना का विशेष महत्व
दूसरे दिन खरना के अवसर पर व्रती दिनभर उपवास रखते हैं. शाम को पूजा के बाद गुड़-चावल की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण किया जाता है. इसके साथ ही 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है.

संध्या और उषा अर्घ्य
तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाता है, जबकि चौथे दिन उगते सूर्य की पूजा की जाती है. यह छठ पूजा का सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है, जिसमें व्रती नदी, तालाब या घाट पर जाकर विधि-विधान से पूजा करते हैं.

व्रत के नियम
इस पर्व के दौरान शुद्धता और अनुशासन का विशेष ध्यान रखा जाता है. घर में तामसिक भोजन पूरी तरह वर्जित रहता है और सात्विक जीवनशैली अपनाई जाती है. व्रती 36 घंटे तक जल तक ग्रहण नहीं करते. पूजा में बांस के सूप, दौरा और ठेकुआ जैसे पारंपरिक प्रसाद का उपयोग किया जाता है.

छठ का महत्व
छठ महापर्व को सूर्य उपासना का सबसे श्रेष्ठ पर्व माना जाता है. मान्यता है कि इस व्रत को करने से परिवार में सुख-समृद्धि, आरोग्य और संतान की दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है. यह पर्व प्रकृति और सूर्य ऊर्जा के प्रति आभार व्यक्त करने का भी संदेश देता है. इस तरह चैती छठ आस्था, अनुशासन और प्रकृति के प्रति समर्पण का अद्भुत संगम है, जिसे पूरे देश में भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाता है.

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