टीएनपी डेस्क(TNP DESK): एनीमिया यानी की खून की कमी एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है, जिसका असर खासकर महिलाओं और बच्चों पर ज्यादा देखा जा रहा है. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 (एनएचएफएस) की रिपोर्ट में ये बातें सामने आयी है कि राज्य में करीब 70% लड़कियां और 60% बच्चे एनीमिया से पीड़ित हैं. यह स्थिति न केवल उनके शारीरिक विकास को प्रभावित कर रही है, बल्कि मानसिक क्षमता पर भी नकारात्मक असर डाल रही है.
एनीमिया शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी के कारण होता है. हीमोग्लोबिन वह है जो खून के जरिए शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाता है. जब इसकी मात्रा कम हो जाती है, तो व्यक्ति को कमजोरी, थकान, चक्कर आना, सांस फूलना जैसे समस्याएं होने लगती हैं.एनीमिया बढ़ने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं. सबसे बड़ा कारण है पोषण की कमी. खासकर आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन B12 की कमी एनीमिया का प्रमुख कारण बनती है. ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग संतुलित आहार नहीं ले पाते, जिससे शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते.
महिलाओं और किशोरियों में मासिक धर्म के दौरान खून की कमी की पूर्ति न होना. कई बार सही खानपान और जागरूकता की कमी के कारण यह समस्या और गंभीर हो जाती है. गर्भवती महिलाओं में भी एनीमिया का खतरा ज्यादा होता है, जिससे मां और बच्चे दोनों की सेहत पर असर पड़ता है. बच्चों में एनीमिया का एक कारण कीड़े भी हैं, जो शरीर में खून की कमी का कारण बनते हैं. इसके अलावा, बार-बार होने वाले संक्रमण, साफ-सफाई की कमी और खराब पानी से भी समस्या को बढ़ाते हैं. कई परिवारों में लड़कियों और महिलाओं को पर्याप्त और पौष्टिक खाना नहीं मिल पाता, जिससे वे ज्यादा प्रभावित होती हैं. इसके साथ ही कम उम्र में शादी और जल्दी गर्भधारण भी एनीमिया की स्थिति को और गंभीर बना देता है.
सरकार इस समस्या से निपटने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जैसे आयरन-फोलिक एसिड की गोलियां देना, स्कूलों में मिड-डे मील के जरिए पोषण सुधारना, और गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना. इसके बावजूद जागरूकता की कमी और योजनाओं का सही तरीके न होने के कारण समस्या बनी हुई है.
एनीमिया से बचाव के लिए जरूरी है कि लोग अपने खाना में आयरन की मात्रा शामिल करें, जैसे हरी पत्तेदार सब्जियां, दाल, गुड़, चना, मूंगफली, अंडा और मांस. इसके साथ ही विटामिन C युक्त फल जैसे संतरा और नींबू भी खना जरूरी है, क्योंकि यह आयरन में मदद करता है. साफ-सफाई का ध्यान रखना, समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना और डॉक्टर की सलाह से ही दवाइयों खाना बेहद जरूरी है. खासकर महिलाओं और बच्चों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच और पोषण पर ज्याद ध्यान देना चाहिए.
एनीमिया की बढ़ती समस्या एक चेतावनी है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. यदि समय रहते सही कदम नहीं उठाए गए, तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य और विकास पर गंभीर रूप से पड़ सकता है. जागरूकता, सही पोषण और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के जरिए ही इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है