टीएनपी डेस्क(TNP DESK):आजकल की महिलाएं भी अपने पति की तरह नौकरी करती है और खुद की बचत भी करती है और संपत्ति भी बनाती है.ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कोई महिला भी अपनी संपत्ति का वसीयतनामा बनवा सकती है.अगर इसका जवाब हाँ है तो इसका तरीका क्या है और कानून इसके बारे में क्या कहता है चलिए जानते है.
क्यों बनवाना चाहिए महिलाओं को वसीयतनामा
दरअसल कई मामलों में देखा जाता है कि जब महिला के नाम पर कोई संपत्ति होती है तो उसके मृत्यु के बाद उसके मायके वाले और ससुराल वाले एक दूसरे से विवाद करने लगते है.महिला के ससुराल वाले महिला के सम्पत्ति पर दावा करते है तो वहीं मायके वाले भी सम्पत्ति पर दावा ठोकते है. महिलाओं के मन में यह सवाल उठता है कि क्या वह भी अपनी सम्पत्ति का वसीयतनामा बनवा सकती है.ताकि उनकी मृत्यु के बाद किसी तरह का कोई विवाद खड़ा न हो.
पढ़ें वसीयतनामा पर क्या कहता है कानून
आपको बता दें शादीशुदा महिलाएं पूरी तरह से वसीयत बना सकती है, चाहे उनकी संपत्ति स्वयं अर्जित हो या उन्हें विरासत में मिली हो. सुप्रीम कोर्ट ने भी हाल ही में इसे लेकर टिप्पणी की है. अगर कोई हिंदू महिला बिना वसीयत के मर जाती है और उसके पति, बेटे या बेटी नहीं है.
महिला के जाने के बाद किसे मिलती है संपत्ति
दरअसल जिन महिलाओं के पति बच्चे नहीं होते हैं उन्हें अपने मरने से पहले ही वसीयतनामा बनवा लेना चाहिए ताकि उनके मरने के बाद उनकी संपत्ति सही जगह पर पहुंच सके.महिला चाहे तो अपने मायके वालों के नाम पर संपत्ति का वसीयतनामा बनवा सकती है ताकि विवाद खत्म हो जाए.
संपत्ति का बंटवारा हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 15 के तहत होता है
आपको बता दें कि जब कोई महिला अपनी संपत्ति का वसीयतनामा बनाए बिना मर जाती है तो उसकी संपत्ति का बंटवारा हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 15 के तहत होता है.यदि महिला के पति और बेटे जिंदा हैं तो पहला हक उनका बनता है यदि इन दोनों में से कोई भी नहीं है तो संपत्ति मायके वालों को मिलता है.
किस स्थिति में महिला के मायके वालों को मिलती है संपत्ति
वही आपको बताओ कि जब पति के परिवार में कोई वारिस न हो. कुछ मामलों में पति की बहन, माता या अन्य रिश्तेदार मृत महिला की संपत्ति पर दावा करते है, जबकि महिला के माता पिता भी इसे अपना हक बताते है.इसकी स्थिति से बचने के लिए महिलाओं को वसीयतनामा जरूर बनवाना चाहिए.
