टीएनपी डेस्क(TNP DESK):आजकल के दौर में स्मार्टफोन हर किसी के हाथ में होता है जिसमें लोग कॉलिंग, मैसेजिंग, नेट बैंकिंग, सोशल मीडिया लोकेशन व्यक्तिगत फोटो वीडियो आदि के लिए उपयोग करते है ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठता है कि किसी का भी फोन सरकार ट्रेक कर सकती है. अगर हाँ तो इसके लिए भारत का कानून क्या कहता है.चलिए आज हम आपको इसके बारे में पूरी जानकारी देते है.
क्या आपका फ़ोन ट्रैक कर सकती है सरकार ?
आपको बता दें कि भारत के किसी भी यूजर का फोन सरकार है ट्रैक नहीं सकती है लेकिन इसको लेकर नियम और कानून बनाए गए है, जिसका उल्लंघन कोई भी नहीं कर सकता है.कोई भी मनमाने तरीके से इसका उपयोग नहीं कर सकता है. कुछ खास परिस्थिति में सरकार फोन ट्रैक करती है लेकिन इसके लिए किसी को भी गृह मंत्रालय से अनुमति लेनी पड़ती है.
किन परिस्थितियों में ट्रैक किया जाता है फोन
आपको बता दें कि सभी स्मार्टफोन में अपना एक अनोखा IMEI अंतरराष्ट्रीय मोबाइल उपकरण पहचान पहचान संख्या होती है.जो 15 अंकों का होता है हर डिवाइस का अपना एक अलग नंबर होता है जब भी फोन मोबाइल नेटवर्क से कनेक्ट होता है, तो टेलीकॉम कंपनियों के पास या रिकॉर्ड रहता है कि कौन सा IMEI किस सिम कार्ड के साथ और किस नेटवर्क से जुड़ा है.वही कभी-कभी जरूरत पड़ने पर कानूनी एजेंसी टेलीकॉम कंपनियों की मदद से फोन की लोकेशन या एक्टिविटीज से जुड़ी जानकारी प्राप्त करती है जिसे फोन ट्रैकिंग कहा जाता है.
फ़ोन ट्रैकिंग की अनुमति कौन देता है
ऐसे में आपको सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि हर यूजर का फोन सरकार ट्रैक नहीं कर सकता है लेकिन कुछ विशेष परिस्थितयों में गृह मंत्रालय फोन ट्रैकिंग की अनुमति देता है जब किसी आपराधिक मामले की जांच करनी हो, राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मामला हो या किसी भी यूजर का फोन चोरी हो जाए ऐसे मामले पर आमतौर पर संबंधित एजेंसियों को तय कानून के तहत फोन ट्रैकिंग किया जाता है.
पढ़े इससे संबंधित कानून
कानूनी तौर पर देखा जाए तो भारत में संचार डेटा से जुड़ी गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए कई नियम बनाए गए है.टेलीकॉम सेवाओं से जुड़े कानून और नियमों की वजह से केवल सरकारी एजेंसी या संचार डेटा को अधिकृत किया जा सकता है, इसके अलावा भारत के संविधान में नागरिको को गोपनीयता का मौलिक अधिकार दिया गया है.जहां किसी वैध वजह के बिना किसी का फोन ट्रैक नहीं किया जा सकता.
