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Breaking: सम्मेद शिखरजी को पर्यटन स्थल घोषित करने वाले प्रावधान पर केंद्र ने लगाई रोक, आगे का फैसला राज्य सरकार पर छोड़ा

BY -
Prakash Tiwary
Prakash Tiwary
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 12, 2026, 7:46:48 AM

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): सम्मेद शिखरजी विवाद अब थमता हुआ दिखाई दे रहा है. केंद्र सरकार ने सम्मेद शिखरजी को पर्यटन स्थल घोषित करने वाले प्रावधान पर रोक लगाने का फैसला किया है. इसके साथ ही आगे की कार्रवाई और तीर्थ स्थल की पवित्रता को बनाए रखने के लिए राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं. बता दें कि झारखंड सरकार ने पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव को पत्र लिख कर इस मामले में कार्रवाई की मांग की थी.  

अपने आदेश में केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने कई आदेश और निर्देश दिए हैं. केंद्र सरकार की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि सम्मेद शिखरजी पर्वत क्षेत्र जैन धर्म का विश्व का सबसे पवित्र और पूजनीय तीर्थ स्थान है. यह मंत्रालय जैन समुदाय के साथ-साथ समूचे देश के लिए इसकी पवित्रता और महत्व को स्वीकार करता है और इसे बनाए रखने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराता है.

राज्य सरकार को दिया ये निर्देश

पत्र के माध्यम से केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह पारसनाथ वन्यजीव अभयारण्य की प्रबंधन योजना, जो पूरे पारसनाथ पर्वत क्षेत्र की रक्षा करता है, के खंड 7.6.1 के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने के लिए तत्काल सभी आवश्यक कदम उठाए, जिनके अनुसार पारसनाथ पर्वत क्षेत्र पर शराब, ड्रग्स और अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री करना; तेज़ संगीत बजाना या लाउडस्पीकर का उपयोग करना; धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के अपवित्र स्थल जैसे पवित्र स्मारक, झीलें, चट्टानें, गुफाएँ और मंदिर; हानिकारक वनस्पतियों या जीवों पर्यावरण प्रदूषण के कारण; जंगलों, जल निकार्यों, पौधों, जानवरों के लिए हानिकारक कार्य करना या ऐसे स्थलों की प्राकृतिक शांति को भंग करना, पालतू जानवरों के साथ आना और पारसनाथ पर्वत क्षेत्र पर अनधिकृत कैंपिंग और ट्रेकिंग आदि की अनुमति नहीं है. राज्य सरकार द्वारा पारसनाथ पर्वत क्षेत्र पर शराब एवं मांसाहारी खाद्य वस्तुओं के विक्रय और उपभोग पर प्रतिबंध को भी कड़ाई से लागू किया जाए.

इसके साथ ही पत्र में लिखा गया कि 2 अगस्त 2019 को जारी पवित्र पार्श्वनाथ पर्वत क्षेत्र से परे एक बफर जोन की रक्षा के लिए जारी किया गया उक्त इको सेंसिटिव जोन अधिसूचना के खंड 3 के प्रावधानों के कार्यान्वयन पर तत्काल रोक लगाई जाती है, जिसमें अन्य सभी पर्यटन और इको-टूरिज्म गतिविधियां शामिल हैं. राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए तत्काल सभी आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया जाता है.

इसके साथ ही पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 3 की उप-धारा (3) के तहत इस अधिसूचना के प्रावधानों की प्रभावकारी निगरानी के लिए केंद्रीय सरकार द्वारा उक्त अधिसूचना के खंड 5 के तहत एक निगरानी समिति गठित की गई है. राज्य सरकार को निर्देश दिया जाता है कि वह इस समिति में जैन समुदाय से दो सदस्यों तथा स्थानीय जनजातीय समुदाय से एक सदस्य को स्थायी सदस्यों के रूप में आमंत्रित करे ताकि उक्त ईको सेन्सिटिव जोन अधिसूचना के प्रावधानों की प्रभावकारी निगरानी में स्थानीय समुदायों को भी शामिल किया जा सके जिससे महत्वपूर्ण हितधारकों द्वारा उचित भागीदारी और निरीक्षण किया जा सके.

झारखंड सीएम ने लिखा था केन्द्रीय मंत्री को पत्र

बता दें कि इससे पहले झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव को पत्र लिखा था और इस स्थल को पर्यटन स्थल से हटाने की गुजारिश की थी. सीएम ने लिखा था कि वर्तमान में कई जैन अनुयायियों से इस स्थल की पवित्रता व सुचिता बनाये रखने और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार के अधिसूचना संख्या का०आ० 2795 (अ) दिनांक 02.08.2019 को निरस्त करने के लिए आवेदन प्राप्त हुए हैं. इस अधिसूचना के कंडिका 2.3(VI) और कंडिका 3(3) में पर्यटन सहित पारिस्थितिक पर्यटन का उल्लेख है जिसपर जैन समुदाय को आपत्ति होने का उल्लेख प्राप्त आवेदनों में दर्ज है. इसके आगे सीएम हेमंत सोरेन ने कहा था कि इसे निरस्त करने को लेकर कोई भी कार्रवाई भारत सरकार के द्वारा ही की जा सकती है. इसलिए इस संदर्भ में उन्होंने केन्द्रीय मंत्री ने निर्णय लेने का आग्रह किया था.

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