टीएनपी डेस्क (TNP DESK): आज के समय में जब हम ऊर्जा की बात करते हैं, तो सबसे पहले हमारे दिमाग में एक ही चीज आती है, सोलर पैनल, विंड मिल और इलेक्ट्रिक उपकरणों जैसे आधुनिक विकल्पों का नाम. लेकिन इन सब के बीच में कुछ ऐसे संसाधन हैं, जिन्होंने सदियों से दुनिया की अर्थव्यवस्था और ताकत को दिशा दी है, वो है कोयला जिसे “ब्लैक डायमंड”भी कहा जाता हैं. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आज भी यह “ब्लैक डायमंड” दुनिया की असली ताकत बना हुआ है या फिर सिर्फ एक कहानी बन के रह गया है.
इसकी असली कहानी शुरू होती है 18वीं सदी से, जब दुनिया में औद्योगिक क्रांति आई. उस जमाने में मशीन चलाने के लिए ताकत की जरूरत पड़ती थी, और इस ताकत की जरूरत को कोयला ने पूरा किया. इंग्लैंड से शुरू हुई यह चीज धीरे-धीरे पूरे दुनिया में फैल गई. रेल इंजन, फैक्ट्रियां, और बड़े उद्योग कोयले पर निर्भर हो गए है. स्टीम इंजन के आने के बाद कोयले की मांग और भी ज्यादा बढ़ गई है और यह सिर्फ एक ईंधन ही नहीं रहा,बल्कि आर्थिक ताकत का प्रतीक बन गया है.
“ब्लैक डायमंड” को सबसे ज्यादा मजबूत किया है तो वो है धनबाद. झारखंड का ये शहर coal capital of India के नाम से जाना जाता हैं, और इसकी सबसे बड़ी वजह है वहाँ की कोयला खदानें.
धनबाद की धरती के नीचे छिपा कोयला सिर्फ एक मिन्रल नहीं हैं बल्कि देश की ताकत का आधार हैं. धनबाद के झरिया से निकलने वाले कोयले देश के बड़े-बड़े पावर प्लांट्स और स्टील इंडस्ट्री तक पहुचाया जाता हैं और यही कोयला लाखों घरों में बिजली पहुंचाने का भी काम करता है. लेकिन इस “ब्लैक डायमंड” की असली चमक के पीछे एक सच्चाई हैं. धनबाद के बहुत से इलाकों में वर्षों से जमीन के अंदर आग जल रही हैं, जिसके कारण पर्यावरण और जो लोग वहाँ रह रहे है उनके भी जीवन को प्रभावित करता है.
अगर आज के समय की बात करें, तो दुनिया तेजी से ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ रही है. हर देश कार्बन का इस्तेमाल कम और पर्यावरण बचाने की बात कर रहा है, लेकिन इसके बावजूद भी कोयला आज भी पूरी तरह से खतम नहीं हुआ हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह है, कोयले की सस्ती कीमत और लगातार उपलब्धता.
अगर हम आकड़ों पर नजर डालें, तो दुनिया आज भी करीब 35% बिजली कोयले से बनती है, जबकि भारत की बात करें तो यहाँ आज भी लगभग 70% बिजली कोयले से बनती है.
कोयला सिर्फ एक ताकत ही नहीं बल्कि एक बड़ा व्यापार बन चुका हैं. ट्रांसपोर्ट, रेलवे, खनन कंपनियां और पावर सेक्टर, इन सभी की चेन इस पर निर्भर करती है. जिन देशों के पास ज्यादा कोयला है, उनकी अर्थव्ययस्था सुकक्षित और मजबूत होती है. यही कारण है कि कई देश आज भी कोयले के उत्पादन को पूरी तरह बंद नहीं कर पा रहे है, भले ही वे ग्रीन एनर्जी की बात कर रहे हों.