TNP DESK- बिहार के पूर्वी चंपारण में अपराधियों के साथ मुठभेड़ में एक जवान की शहादत के बाद बिहार पुलिस सजग हो गई है. इस एनकाउंटर में दो अपराधी भी मारे गए थे. बिहार के डीजीपी ने कहा है कि अपराधियों के खिलाफ छापेमारी करने के पहले एसओपी का पालन जरूरी होना चाहिए। उन्होंने छापेमारी को लेकर एसओपी का निर्धारण भी कर दिया है. कहा गया है कि किसी भी छापेमारी से पहले कम से कम क्षेत्र के सर्किल इंस्पेक्टर और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी को इसकी सूचना जरूर दी जाए,तब ही टीम रेड को जाए.
हाल के दिनों में बिहार में पुलिस पर हमले बढ़ गए है. मोतिहारी एनकाउंटर तो बहुत चर्चित हुआ है. दरअसल सोमवार की देर रात को मोतिहारी के चकिया थाना क्षेत्र में एसटीएफ और अपराधियों के बीच मुठभेड़ हुई थी. यह मुठभेड़ उस समय हुई, जब पुलिस धमकी देने वाले बदमाशों को खोज कर घेराबंदी की. अपराधियों की ओर से ताबड़तोड़ फायरिंग की गई. अपराधियों की गोली से एसटीएफ के जवान श्रीराम यादव शहीद हो गए. वहीं पुलिस की जवाबी कार्रवाई में कुख्यात गैंगस्टर कुंदन ठाकुर और प्रियांशु दुबे मौके पर ही मारे गए थे.
बता दें कि मोतिहारी में हुई मुठभेड़ के पहले अपराधी कुंदन ठाकुर और प्रियांशु दुबे ने चकिया थाने के एसएचओ को फोन कर धमकाया था. नेपाल के नंबर से कॉल कर बदमाशों ने कहा था शहर अब हमारी गुंडई देखेगा। पुलिस को चेतावनी दी थी कि अगली खबर 10- 15 पुलिसकर्मियों की मौत की होगी। इसी कॉल को ट्रेस करते हुए एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की टीम ने उनके लोकेशन का पता लगाया।
जैसे ही पुलिस और एसटीएफ की टीम ने अपराधियों को चारों तरफ से घेर बदमाशों को सरेंडर करने को कहा , बदमाश सरेंडर के बजाय गोलीबारी शुरू कर दी. खुद को पुलिस से घिरता देख वह गोलियां बरसाने लगे. इसी क्रम में एसटीएफ जवान श्रीराम यादव गंभीर रूप से घायल हो गए. उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस एनकाउंटर में अपराधियों की गोली के जवाब में पुलिस ने भी फायरिंग की ,जिसमें कुंदन ठाकुर और प्रियांशु दुबे मारे गए. इन दोनों पर पहले से ही आर्म्स एक्ट के कई मामले दर्ज थे. नेपाल से सटे होने के बाद के कारण अपराधी यहां घटना कर नेपाल भाग जाते है.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो