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बड़ी खबर: अधिकारियों ने बेच दी ‘देवभूमि’ की जमीन, DM-SDM समेत दर्जन भर अधिकारी सस्पेंड

BY -
Vinita Choubey  CE
Vinita Choubey CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 16, 2026, 5:36:32 PM

टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : ‘देवभूमि’ कहे जाने वाले उत्तराखंड के हरिद्वार में हुए जमीन घोटाला मामले में सीएम धामी ने कड़ा एक्शन लिया है. नगर निगम के इस जमीन घोटाले में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने डीएम-एसडीम समेत दर्जन भर अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है. राज्य सरकार के इस कार्रवाई से अधिकारियों में हड़कंप मच गया है. बता दें कि राज्य में यह पहला ऐसा मामला है जिसमें किसी जिलाधिकारी, नगर निगम आयुक्त और एसडीएम को पद पर रहते हुए एक साथ निलंबित किया गया है.

जानिए क्या है पूरा मामला

बताते चलें कि मामला हरिद्वार नगर निगम से जुड़ा है, जिसमें 14 करोड़ रुपये की जमीन को 54 करोड़ रुपये में खरीदा गया. शिकायत के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आदेश पर इसकी जांच कराई गई. मामले की जांच उत्तराखंड सरकार में सचिव रणवीर चौहान ने की. सचिव रणवीर चौहान ने खुद हरिद्वार जाकर मामले की जांच की और 100 पन्नों की रिपोर्ट सरकार को सौंपी, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई है.

एक दर्जन अधिकारी व कर्मचारियों पर गिरी गाज

आपको बता दें कि उत्तराखंड के बहुचर्चित हरिद्वार नगर निगम भूमि घोटाले में दो आईएएस और एक पीसीएस अधिकारी समेत कुल 12 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है. प्रदेश में सत्तारूढ़ सरकार ने पहली बार अपने ही सिस्टम में बैठे शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ इतनी सख्त कार्रवाई की है. मुख्यमंत्री धामी ने कहा है कि हमारी 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत यह कार्रवाई प्रदेश की प्रशासनिक कार्यशैली में निर्णायक बदलाव मानी जा रही है. उन्होंने साफ संदेश दिया है कि अधिकारी कितना भी बड़ा क्यों न हो, किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

जांच रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, एसडीएम ने 143 की पूरी प्रक्रिया महज 2 से 3 दिन में पूरी कर फाइल को जल्दी निपटाने के लिए राजस्व राय देने का जिम्मा अपने स्टेनोग्राफर को सौंप दिया. प्रक्रिया में न सिर्फ असामान्य तेजी बरती गई, बल्कि नियमों की भी अनदेखी की गई. जमीन कूड़े के ढेर के पास थी और इसकी तत्काल जरूरत भी नहीं थी और न ही जमीन खरीद के लिए पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई गई. सर्किल रेट के आधार पर जमीन खरीदकर भारी वित्तीय अनियमितताएं की गईं. जांच रिपोर्ट में पाया गया कि इस सौदे में जमीन के चयन, कीमत निर्धारण, प्रक्रिया अनुपालन और भूमि उपयोग परिवर्तन जैसे सभी स्तरों पर गंभीर अनियमितताएं हुई हैं.

 

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