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BIG NEWS : कुख्यात नक्सली कुंदन पाहन को बड़ी राहत, 17 साल पुराने मामले में आरोप साबित नहीं

BY -
Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 19, 2026, 7:19:58 AM

रांची (RANCHI): रांची सिविल कोर्ट ने लगभग 17 वर्ष पुराने नक्सल हिंसा और कथित मुठभेड़ से जुड़े चर्चित मामले में बड़ा निर्णय सुनाया है. अपर न्यायायुक्त शैलेंद्र कुमार की अदालत ने कुख्यात नक्सली कुंदन पाहन उर्फ विकास जी और राम मोहन सिंह मुंडा को साक्ष्यों के अभाव में सभी मामलों से दोषमुक्त कर दिया है.

यह मामला बुंडू थाना कांड संख्या 18/2009 से संबंधित है. दोनों पर भारतीय दंड संहिता, आर्म्स एक्ट, सीएलए एक्ट और यूएपीए जैसी कठोर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था. अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को प्रमाणित करने में पूरी तरह विफल रहा .

मामले के अनुसार 5 फरवरी 2009 की रात पुलिस को सूचना मिली थी कि बुंडू थाना क्षेत्र में नक्सली हथियारों के साथ सक्रिय हैं. इसके बाद सर्च ऑपरेशन और मुठभेड़ का दावा किया गया था, जिसमें भारी गोलीबारी और हथियारों की बरामदगी की बात कही गई. हालांकि दोनों आरोपी वर्ष 2017 से न्यायिक हिरासत में थे.

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष केवल एक गवाह पेश कर पाया जो तत्कालीन बुंडू थाना प्रभारी थे और वही इस केस के सूचक भी थे. अदालत ने कहा कि इतने गंभीर मामले में न तो कोई स्वतंत्र गवाह प्रस्तुत किया गया और न ही अन्य पुलिसकर्मियों की गवाही कराई गई. वर्षों तक समन और वारंट जारी होने के बावजूद गवाह अदालत में उपस्थित नहीं हुए.

अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी की प्रक्रिया संदेह के घेरे में है. सूचक गवाह ने जिरह के दौरान स्वीकार किया कि उन्होंने न तो आरोपियों को घटनास्थल पर देखा था और न ही गिरफ्तारी में उनकी कोई भूमिका थी. दोनों आरोपियों को उन्होंने पहली बार अदालत में देखा.

पुलिस ने सैकड़ों राउंड फायरिंग का दावा किया था, लेकिन घटनास्थल से एक भी खोखा बरामद नहीं हुआ. कथित हथियार और कारतूस न तो मौके पर सील किए गए और न ही अदालत में विधिवत पेश किए जा सक. खून या खून लगी मिट्टी की कोई बरामदगी भी रिकॉर्ड में नहीं पाई गई.

इन सभी कमियों को आधार बनाते हुए अदालत ने आईपीसी की धारा 147, 148, 353/149, 307/149, आर्म्स एक्ट, सीएलए एक्ट और यूएपीए की धारा 13 सहित सभी आरोपों से दोनों आरोपियों को बरी कर दिया. बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता ईश्वर दयाल किशोर ने पैरवी की.

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