TNP DESK- चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी का तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. पार्टी को एकजुट रखना उनकी सबसे बढ़ी चुनौती है. पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस की बड़ी हार हुई है. सूत्रों के अनुसार चुनाव हारने के बाद बीजेपी सरकार के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस ने पहली बार बंगाल विधानसभा परिसर में विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया था. लेकिन सूत्र बता रहे हैं कि उसमें जो हुआ, उससे ममता बनर्जी की परेशानी बढ़ गई है. पार्टी में फूट सार्वजनिक हो गई है.
धरना में पार्टी के 46 विधयक नहीं पहुचें -------
दरअसल, चुनाव के बाद हिंसा, बुलडोजर एक्शन, अतिक्रमण हटाने के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस ने विधानसभा परिसर में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के सामने धरना प्रदर्शन का आयोजन किया था. इस धरने में पार्टी के 80 में से 46 विधायक पहुंचे ही नहीं । इसके बाद तो चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया. इस धरने में केवल 34 विधायक ही उपस्थित थे. धरना भी बहुत देर तक नहीं चला. इधर, सूत्र बता रहे हैं कि कुछ दिन पहले ममता बनर्जी के घर पर जब नए विधायकों की बैठक हुई थी, उसमें भी पार्टी के करीब 15 विधायक नहीं पहुंचे थे. दरअसल, 2026 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस केवल 80 सीटों पर सिमट गई है. भाजपा ने पहली बार बंगाल में सरकार बनाई है और सुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बने हैं.
ममता बनर्जी के दावे में कितना दम ---------
इस हार के बाद भले ही ममता बनर्जी दावा कर रही है कि वह पार्टी को नए सिरे से खड़ा करेंगी , लेकिन उनके विधायक आगे क्या करेंगे यह देखने वाली बात होगी? वैसे चर्चा तेज है कि ममता बनर्जी नंदीग्राम सीट से उपचुनाव लड़ सकती है. 2021 में नंदीग्राम सीट से वह सुभेंदु अधिकारी के हाथों पराजित हुई थी. 2026 में वह भवानीपुर से भी चुनाव हार गई है. भवानीपुर से ममता बनर्जी का चुनाव हारना बंगाल की राजनीति का "टर्निंग पॉइंट" माना जा रहा है. कहा जा रहा है कि विधायकों को एकजुट रखना बड़ी परेशानी है और इसी वजह से वह नंदीग्राम से उपचुनाव लड़कर विधायक बनना चाहती हैं. देखना है आगे आगे इस पूरे मामले में होता है क्या है, उल्लेखनीय है कि बंगाल फलता विधानसभा में जहा आज पुनर्मतदान हो रहा है ,वहां से तृणमूल उम्मीदवार चुनाव के दो दिन पहले मैदान छोड़ दिया था.