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Bangal Election: तृणमूल कांग्रेस और भाजपा को क्यों मिल रही घर के भीतर के "विभीषण" से  चुनौती, आगे क्या ?

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: March 22, 2026, 4:37:15 PM

धनबाद(DHANBAD) : बंगाल विधानसभा चुनाव में दोनों प्रमुख दलों को घर के भीतर के "विभीषण" से  चुनौती मिल रही है.  कहा जा रहा है कि बंगाल में चुनाव की घोषणा होते ही प्रमुख दल भाजपा और तृणमूल को "बाहरी ताकत" से ज्यादा घर के "विभीषण" से लड़ना चुनौती बनती जा रही है.  टिकट बंटवारे के बाद असंतुष्ट कार्यकर्ताओं का गुस्सा अब सड़क पर दिखने लगा है.  बांकुड़ा से लेकर हावड़ा तक दोनों ही दल   के उम्मीदवारो का   विरोध शुरू हो गया है.  ऐसी बात नहीं है कि यह केवल भाजपा में ही है.  सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस में भी असंतोष बढ़ रहा है. 

"पुराने बनाम नए" की लड़ाई भी दिख रही सड़क पर 

 पूर्व बर्दवान  जिले में "पुराने बनाम नए" की लड़ाई सड़क पर आ गई है.  आरोप  है कि कई नेताओं के करीबियों को टिकट दिया गया है.  उत्तर 24 परगना और हुगली के कुछ क्षेत्रों में भी तृणमूल कार्यकर्ताओं ने उम्मीदवारों के चयन पर सवाल उठाया है.  विरोध प्रदर्शन तक किया है.  उनका कहना है कि जो नेता पिछले 5 वर्षों में जमीन पर सक्रिय नहीं थे, उन्हें फिर से उम्मीदवार बनाकर हार को आमंत्रित किया जा रहा है.  हालांकि पार्टी के बड़े नेता कल्याण बनर्जी का दावा है कि यह छोटे-मोटे मतभेद हैं, पार्टी एकजुट होकर चुनाव लड़ेंगी।  

तृणमूल कांग्रेस ने इस बार 74 विधायकों का टिकट काट दिया है

बता दें कि तृणमूल कांग्रेस ने इस बार पिछले चुनाव में जीते 74 विधायकों का टिकट काट दिया है.  वे लोग अब निर्दलीय अथवा किसी अन्य दल से चुनाव लड़ सकते हैं.  इधर, भाजपा में भी "बाहरी बनाम  भूमिपुत्र" की जंग देखने को मिल रही है.  बांकुड़ा जिले की  एक विधानसभा में भाजपा को भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है.  वर्तमान विधायक  को दोबारा टिकट देने से स्थानीय कार्यकर्ता नाराज हैं.  प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि विधायक पड़ोसी क्षेत्र के निवासी हैं और जीतने के बाद उन्होंने क्षेत्र की कोई सुध नहीं ली.  उनका कहना है कि उन्हें "भूमिपुत्र" उम्मीदवार चाहिए।  वहीं विष्णुपुर में भाजपा की महिला प्रत्याशी के खिलाफ भी पोस्टर लगाए गए हैं.  हालांकि उन्होंने इसे तृणमूल की साजिश बताया है.  तृणमूल का कहना है कि यह भाजपा के आंतरिक कलह  का परिणाम है. 

भाजपा उम्मीदवार संजय सिंह को बाहरी बता रहे कार्यकर्ता 
 
हावड़ा के एक  विधानसभा क्षेत्र के भाजपा प्रत्याशी संजय सिंह को बाहरी बताते हुए 70 बूथ अध्यक्षों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया है.  प्रत्याशी के सामने ही कार्यकर्ताओं ने बाहरी वापस जाओ का नारा लगाया।  जानकार बताते हैं कि समय रहते अगर दोनों दल अपने कार्यकर्ताओं के असंतोष को नियंत्रित नहीं किया तो चुनाव परिणाम का गणित बिगड़  सकता है.  दरअसल, इस बार बंगाल का चुनाव कोई साधारण चुनाव नहीं होने जा रहा है.  बंगाल में ममता बनर्जी के 15 साल के शासनकाल की "अग्नि परीक्षा" होने जा रही है तो भाजपा की भी "परीक्षा" होगी।   यह अलग बात है कि तृणमूल कांग्रेस और भाजपा दोनों चौकन्ने हैं.  

तृणमूल  कांग्रेस नंदीग्राम सीट  को वापस पाने की कोशिश में 

इधर, जानकारी मिली है कि तृणमूल  कांग्रेस नंदीग्राम सीट  को वापस पाने के लिए विशेष रणनीति तैयार कर रही है.  भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी पवित्र कर को तृणमूल कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाया है.  जैसी की सूचना है अब नंदीग्राम सीट पर कब्जा करने के लिए अभिषेक बनर्जी खुद वहां डेरा डालेंगे।  अभिषेक बनर्जी  संगठन को मजबूत बनाने के लिए कार्यकर्ताओं के साथ निरंतर बैठक करेंगे। 
 
ममता बनर्जी 2021 में सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव लड़ी थी
 
ममता बनर्जी 2021 में खुद नंदीग्राम में सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव लड़ी थी.  हालांकि उन्हें हार   का सामना करना पड़ा था.  इस बार शुभेंदु अधिकारी भवानीपुर से ममता दीदी को हराने के लिए फिर से उनके खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं.  नंदीग्राम में इस बार मुकाबला कड़ा होगा।  शुभेंदु अधिकारी के लिए वोट का जुगाड़ करने वाला ही इस बार तृणमूल  कांग्रेस का उम्मीदवार है.  बताया जा रहा है कि 24 मार्च से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उत्तर बंगाल से चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत करेंगी।  कई जगह सभाएं होंगी।  राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इस बार बंगाल में चुनाव में मुकाबला कड़ा  होगा।  तृणमूल  और भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने की लगातार कोशिश हो रही है. 

रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो

Tags:Bengal Assembly ElectionTMC vs BJP BengalBengal political crisisTMC internal conflictWest Bengal election news

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