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मानसून के आते ही आखें दिखाने लगी कोशी और गंगा नदी! पूर्णिया, कटिहार और पश्चिमी चंपारण में बाढ़ का खतरा

BY -
Priyanka Kumari CE
Priyanka Kumari CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 11, 2026, 3:03:24 PM

पटना(PATNA):बिहार में मानसून की शुरूआत होते ही कोशी क्षेत्र में बाढ़ और कटाव शुरू हो गया है. नेपाल के तराई वाले इलाकों में लगातार हो रही बारिश ने बिहार में भी अब बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी है. कोसी-सीमांचल की नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. नेपाल द्वारा बीरपुर बैराज से 1.34 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है.जिससे महानंदा, कोसी और गंगा नदी का जलस्तर में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. इसकी वजह से पूर्णिया, कटिहार और पश्चिमी चंपारण के कुछ प्रखंडों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है. 

नेपाल में बारिश से बिहार में आयी आफत

 नेपाल और बिहार में हो रही बारिश की वजह से प्रमुख नदियों का जलस्तर बढ़ गया है. कोशी और सीमांचल के जिलों में कोशी नदी के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई है. कटिहार में महानंदा, गंगा और खगड़िया में बागमती नदी के जलस्तर में भी वृद्धि देखी जा सकती है.कोशी बैराज पर रविवार शाम चार बजे 1 लाख 34 हजार क्यूसेक डिस्चार्ज रिकॉर्ड किया गया है. जिसकी वजह से कटिहार के कई गांवों में भीषण कटाव देखने को मिल रही है.प्रशासन और ग्रामीणों की ओर से कटाव से बचाव के लिए कई इंतजाम किये गए हैं.लेकिन, नदी के रौद्र रुप के आगे ये नाकाफी साबित हो रही हैं. 

बढ़ते हुए जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट 

कोशी और महानदी के साथ बागमती भी लोगों को आंखें दिखा रही है. इसके कारण, कई गांवों में कटाव तेज हो गयी है. जिला प्रशासन के द्वारा बढ़ते हुए जलस्तर को देखते हुए बांध-तटबंधों की चौकसी बरती जा रही है. 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है. बाढ़ नियंत्रण अंचल खगड़िया ने सभी बांध-तटबंधों को सुरक्षित बताया है. हालांकि, निचले गांवों से लोगों का पलायन भी शुरू हो गया है. ग्रामीण खुद के लिये और अपने जानवरों के लिये सुरक्षित स्थान तलाश रहे हैं.बाढ की वजह से किसानों के सैकड़ों हेक्टेयर फसल बर्बाद हो गयी है. 

कोसी बैराज से नेपाल ने कब किस दिन छोड़ा पानी 

27 जून 2024- 1.03 लाख क्यूसेक28 जून 2024- 1.30 लाख क्यूसेक29 जून 2024- 1.23 लाख क्यूसेक30 जून 2024- 1.34 लाख क्यूसेक01 जुलाई 2024- 1.63 लाख क्यूसेकराज्य की नदियों में उफान जारी है. कोसी-सीमांचल क्षेत्र की नदियों का भी जलस्तर अब भी बढ़ रहा है. बाढ़ जैसे हालात बन चुके हैं. बाढ़ की दस्तक ने लोगों का जनजीवन प्रभावित किया है. कई गांवों में पानी घुस चुका है. हालांकि, जिला प्रशासन के द्वारा बाढ़ पीड़ितों को राहत पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर इंतजाम किये जा रहे हैं.  

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