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सावधान! कहीं आप भी तो नहीं हैं फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम बीमारी के शिकार, जानिए इसके बारे में

BY -
Samir Hussain
Samir Hussain
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 17, 2026, 9:52:16 PM

टीएनपी डेस्क(TNP DESK):आज दुनिया ने बहुत विकास कर लिया है. लोग शारीरिक मेहनत से ज्यादा मशीनों पर डिपेंड रहते हैं. लेकिन सबसे ज्यादा लोगों को मोबाईल फोन ने प्रभावित किया है. लोग के लिए खाना, सोना, घूमना इस सभी जरुरतों के साथ मोबाईल भी जिंदगी का जरुरी हिस्सा बन गया है. या सच कहे तो कई लोगों के लिए इन जरुरतों से ज्यादा जरुरी मोबाईल हो गया है. आज की स्थिति ऐसी हो गई है. कि लोग खाना भूल सकते हैं. लेकिन मोबाईल फोन यूज करना नहीं भूलते हैं. जरुरत से ज्यादा इसके इस्तेमाल से लोग ना चाहते हुए भी फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम जैसी बीमारी का शिकार हो रहे हैं.

क्या है फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम बीमारी

डॉक्टर्स की माने तो फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम एक ऐसी बीमारी है. जिसमे हमारा दिमाग हमेशा उन चीजों के बारे में सोचता है, या महसूस करता है, जो असल जीवन में होती ही नहीं है. जैसे हमारा फोन वाइब्रेशन मोड में चार्ज में लगा हो. और वो किसी वजह से वाइब्रेट करने लगे. तो हमारे दिमाग में वहम की स्थिति पैदा होती है.

क्या है फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम के लक्षण

सायकोलॉजिस्ट चिकित्सकों की माने तो फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम में लोगों को मोबाइल बिना बजे ही इस बात का भ्रम होता है, कि उनका फोन बज रहा है. इसके साथ ही बार-बार बिना किसी वजह के फोन फोन चेक करना. ऐसा भ्रम होना कि कही किसी का कॉल या मैसेज तो नहीं आया है. इस बीमारी के शिकार धीरे-धीरे दुनिया के आधे लोग हो चुके हैं. ये बीमारी बच्चे और बड़ों में फोन के ज्यादा इस्तेमाल से तेजी से फैल रहा है.

यदि आपके अंदर भी फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम के लक्षण तो हो जाइए सावधान

यदि आपके अंदर भी फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम लक्षण है. तो सावधान हो जाईये. और अपने आप को मोबाइल से दूर रखिये. अब भी आपने मोबाइल को अपने से दूर नहीं किया तो इसके अधिक इस्तेमाल से आपको ब्रेन ट्यूमर या ब्रेन हेमरेज भी हो सकता है. इसके साथ ही कई तरह की मानसिक बीमारियों का आप शिकार हो सकते हैं.

फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम पर डॉक्टरों की क्या है राय

वहीं डॉक्टर्स के अनुसार हर दस में से 7 व्यक्ति फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम का शिकार है. बड़े के साथ बच्चे भी फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम का शिकार होना शुरू हो चुके हैं. आज कल के लोग फोन को शरीरिक अंग समझ लिये हैं. जो सबके स्वास्थ्य की दृष्टी से काफी नुकसानदेह है. जब लोग किसी दूसरी बीमारी के  इलाज के लिए डॉक्टर के पास जाते है. तो, फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम बीमारी के बारे में पता चलता है.

इन उपायों से आप फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम से बच सकते हैं

यदि आप फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम बीमारी का शिकार हो चुके हैं. तो, घबराने की कोई बात नहीं है. कुछ उपायों के जरीये आप फिर से इससे छुटकारा पा सकते हैं. इसके लिए आप मोबाईल से अपने आप को दूर रखे. मोबाईल पर समय बिताने के आलावा दूसरा विकल्प तलाश करें. अपने फोन को हमेशा रिंगिंग मोड में रखें. कोई भी घर के या बाहर का काम करते समय फोन को दूर रखे. इसके साथ ही यदि हो सके तो सोने से पहले फोन बंद कर दें. तकिया के नीचे फोन बिल्कुल नहीं रखे.

इंटरनेट एडिक्शन सिंड्रोम के शिकार हो रहे बूढ़े-बच्चे

आजकल के बच्चों को इंटरनेट की लत लग गई है. इसके साथ ही आज आधी दुनिया इंटरनेट की गुलाम हो चुकी है. एक साल के बच्चे को भी फोन देने पर वो चुप हो जाता है. बच्चों की जिद और रोने से बचने के लिए मां-बाप मोबाईल देकर उन्हें चुप करा देते हैं. जिससे बच्चों को धीरे-धीरे इसकी आदत हो जाती है. इसके साथ ही लोग रियल लाईफ में लोगों से बात करने से ज्यादा सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से बात करने में ज्यादा रुची दिखाते हैं. जिससे लोगों को सतर्क रहने की जरुरत है.

आज का जीवन फोन के बिना संभव नहीं है

इन सभी बातों के साथ ही ये बात भी सच है. कि इसके बिना आज का जीवन संभव नहीं है. क्योंकि सब कुछ डिजिटल हो चुका है. इसलिए जरुरत के हिसाब से ही इसको प्राथमिकता दी जानी चाहिए. इसको ही जीवन नहीं समझना है.

रिपोर्ट-प्रियंका कुमारी

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