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ममता देवी ही नहीं झारखंड के कई और विधायकों की सजा मिलने के बाद गई है विधायकी, जानिए लिस्ट में कौन-कौन नाम शामिल

BY -
Vishal Kumar
Vishal Kumar
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 16, 2026, 3:01:26 AM

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): गोला गोलीकांड में रामगढ़ विधायक ममता देवी को 8 दिसंबर को दोषी करार किया गया था. वहीं, इस मामले पर कोर्ट ने आज फैसला सुनाया है. कोर्ट ने विधायक ममता देवी समेत सभी 13 दोषियों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई है. इसके अलावा कोर्ट ने विधायक पर 10 हजार का जुर्माना भी लगाया है. सजा के ऐलान के साथ ही ममता देवी की विधायकी भी चली गई. लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि झारखंड में ममता देवी पहली विधायक नहीं है जिन्हें विधायक रहते कोर्ट ने सजा सुनाई है और उनकी सदस्यता गई है.

कई और विधायकों की गई है सदस्यता

झारखंड राज्य गठन के बाद से ही राज्य में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल रहा है. विधायकों से लेकर मुख्यमंत्री तक कई आरोप लगे हैं. लेकिन आज हम बात करेंगे राज्य के उन विधायकों की जिन्हें कोर्ट में दोषी करार और सजा मिलने के बाद विधायकी छोड़नी पड़ी है. इस लिस्ट में ताजा नाम ममता देवी का जुड़ा है. लेकिन इससे पहले भी कमल किशोर भगत, योगेंद्र प्रसाद, अमित महतो, एनोस एक्का, बंधु तिर्की और निजामुद्दीन अंसारी के नाम शामिल हैं. हम आपको इस स्टोरी में बतायेंगे कि उन्हें कब और किस मामले में सजा हुई थी. 

ममता देवी (Mamta Devi) 
रामगढ़ से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीतकर ममता देवी पहली बार साल 2019 में विधायक बनी थी. लेकिन जिस मामले में ममता देवी को सजा हुई है वो साल 2016 का इनलैंड पावर गोलीकांड का मामला  है. दरअसल, आइपीएल कंपनी में गोलीकांड के बाद दो लोगों की मौत हुई थी, कई लोगों को जेल भेजा गया था, तत्कालीन जिला परिषद सदस्य के रूप में ममता देवी इस आंदोलन का नेतृत्व कर रही थी. सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग आइपीएल कंपनी के मुख्य गेट के पास धरना प्रदर्शन कर रहे थे. आंदोलनकारी धीरे-धीरे काफी उग्र हो गया, पथराव भी हुआ था. मजबूरी में पुलिस को गोली चलाना पड़ा, 47 राउंड गोली चलने के बाद विधि व्यवस्था सामान्य हुई थी. इस दौरान दो आंदोनकारियों की मौत भी हुई. वहीं, प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे राजीव जायसवाल और ममता देवी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था. इसी मामले में उन्हें आज यानी मंगलवार को कोर्ट से पांच साल की सजा सुनाई गई है.

बंधु तिर्की (Bandhu Tirkey)
मांडर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक बंधु तिर्की की सदस्यता साल 2022 में गई थी. दरअसल, आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में उन्हें CBI की स्पेशल कोर्ट ने 28 मार्च 2022 को दोषी पाया था. इस मामले में तिर्की को 3 साल की सज़ा और तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था. जिसके बाद इस सीट से उनकी बेटी शिल्पी नेहा तिर्की विधायक बनी. 

अमित महतो (Amit Mahto) 
सिल्ली के झामुमो विधायक अमित महतो को अपर न्यायायुक्त (एजेसी) दिवाकर पांडे की अदालत ने सोनाहातू के पूर्व सीओ आलोक कुमार के साथ मारपीट करने का दोषी पाते हुए साल 2018 में दो साल की सजा सुनायी थी. सजा के अलावा 45 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया था. वहीं, जुर्माना नहीं देने पर सभी को 14-14 महीने की अतिरिक्त सश्रम सजा काटनी होती. इसी मामले में उनकी सदस्यता चली गई. 

योगेंद्र साव (Yogendra saw)
गोमिया विधानसभा सीट से विधायक योगेंद्र साव की साल 2018 में विधायकी गई थी. बता दें कि विधायक योगेंद्र महतो को कोयला चोरी के मामले में कोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाई थी. कोर्ट के फैसले के बाद उनकी भी विधायकी चली गई थी. कुछ समय पहले ही उन्हें जेल से रिहा किया गया है. योगेंद्र साव की बेटी अंबा प्रसाद फिलहाल बड़कागांव विधानसभा सीट से कांग्रेस की टिकट से विधायक है. 

कमल किशोर भगत (Kamal Kishor Bhagat)
लोहरदगा विधानसभा सीट से आजसू विधायक कमल किशोर भगत की भी विधायक रहते साल 2015 में सदस्यता गई थी. दरअसल, भगत को कोर्ट ने डॉ. केके सिन्हा के साथ मारपीट करने मामले में सात साल की सजा और 10 हजार का जुर्माना लगाया था. जिसके बाद उनकी विधायकी चली गई थी. बता दें कि कमल किशोर भगत अब इस दुनिया में नहीं है उनका देहांत पिछले साल ही हुआ था. 

एनोस एक्का (Enos Ekka)
विधायक रहते सदस्यता जाने वालों नेता की लिस्ट में एनोस एक्का का नाम भी शामिल है. उन्हें साल 2014 में हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. 4 जुलाई 2018 को उन्हें हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई गयी, जिसके बाद उनकी सदस्यता चली गई. बता दें कि साल 2005 से 2008 तक वो झारखंड सरकार में मंत्री रहे थे.

निजामुद्दीन अंसारी (Nizamuddin Ansari)
इस लिस्ट में विधायक निजामुद्दीन अंसारी का नाम भी शामिल है. दरअसल, साल 2013 में गिरिडीह कोर्ट ने एक मामले में उन्हें 2 साल और 1 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी. जिसके बाद उनकी सदस्यता चली गई थी.

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