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हूल दिवस के बहाने हुई राजनीतिक बयानबाजी के बीच पक्ष विपक्ष सभी कर रहे है गुरुजी की सलामती की दुआ

BY -
Vinita Choubey  CE
Vinita Choubey CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 18, 2026, 12:01:10 PM

दुमका (DUMKA) : भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में 30 जून का ऐतिहासिक महत्व है. 1857 की क्रांति को इतिहासकारों ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की प्रथम लड़ाई का दर्जा दिया है, लेकिन उससे 2 वर्ष पूर्व 30 जून 1855 को संताल परगना की धरती से जमींदारों और ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंका गया था, जिसे संताल हूल विद्रोह के नाम से जाना जाता है. हूल विद्रोह के नायक थे सिदो, कान्हु, चांद और भैरव नामक चार भाई. इनकी दो बहनें फूलो और झानो ने भी भाई के साथ कंधे से कंधा मिलाकर ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लड़ाई लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुई थी.

पोखरा चौक पर स्थापित सिदो कान्हु की प्रतिमा पर माल्यार्पण के लिए उमड़ी भीड़

आज पूरा देश 170 वां हूल  दिवस मना रहा है. इस अवसर पर न केवल दुमका बल्कि पूरे झारखंड खासकर संताल परगना प्रमंडल में उत्सवी माहौल है. मुख्य समारोह साहिबगंज के भोगनाडीह में आयोजित है जो हूल विद्रोह के नायक का जन्म स्थली भी है. दुमका की बात करें तो शहर के पोखरा चौक पर स्थापित सिदो और कान्हु की प्रतिमा पर माल्यार्पण के लिए सुबह से ही राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठन के सदस्यों का तांता लगा है. हूल दिवस के बहाने राजनीतिक बयानबाजी भी खूब हो रही है.

आदिवासी सभ्यता और संस्कृति को सुरक्षित रखने का संकल्प लेने का है दिन : सुनील सोरेन

पूर्व सांसद सुनील सोरेन और पूर्व विधायक सीता सोरेन के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ता पोखरा चौक पहुंचे और सिदो कान्हु की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया. इस मौके पर सुनील सोरेन ने कहा कि सिदो कान्हु के द्वारा बताए गए रास्ते पर हम सभी को चलना है. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में आदिवासी पर चारों तरफ से हमला हो रहा है, संताल परगना में डेमोग्राफी चेंज हो रहा है यह चिंता का विषय है. इसलिए आज संकल्प लेने का समय है कि जिस उद्देश्य के साथ सिदो, कान्हु, चांद, भैरव, फूलो और झानो के द्वारा लड़ाई लड़ी गई उस उद्देश्य को आगे बढ़ाना है ताकि आदिवासी सभ्यता, संस्कृति, परंपरा और रीति रिवाज को बचाया जा सके.

हाल ब्रिटिश काल से भी बदतर, सरकार शहीदों का सम्मान करती है या अपमान : सीता सोरेन

वहीं भाजपा नेत्री सीता सोरेन ने कहा कि आज हूल विद्रोह के नायक को नमन करने का दिन है लेकिन सरकार ने जो बर्बरता दिखाई उसकी घोर निंदा करते है. सरकार अपनी नाकामी छुपाने के लिए सिदो कान्हु के वंशज मंडल मुर्मू के साथ जो व्यवहार कर रही है वह निंदनीय है. मीडिया के माध्यम से सीता सोरेन सरकार से पूछना चाहती है कि वह शहीदों का सम्मान करती है या अपमान. संताल समाज यह अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा. सीता ने कहा कि वर्तमान स्थिति ब्रिटिश काल से भी बदतर हो गई है. हम अपने समाज को एकजुट करेंगे इसके लिए बरहेट में बैठक करेंगे जिसमें नया हूल का संकल्प लेंगे.

गुरुजी की तबियत खराब होने से हूल दिवस का उत्साह हुआ फीका, कार्यकर्ता है मायूस : डॉ लुईस मरांडी

जामा विधायक डॉ लुईस मरांडी के नेतृत्व में पोखरा चौक पहुंचे झामुमो कार्यकर्ताओं ने सिदो कान्हु की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. अपने संबोधन में डॉ लुईस मरांडी ने कहा कि संगठन द्वारा धूम धाम से हूल दिवस मनाने का संकल्प लिया गया था लेकिन इस बीच दिसोम गुरु शिबू सोरेन अस्वस्थ हो गए. इस वजह से हूल दिवस कुछ फीका हो गया. उन्होंने कहा कि ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ सिदो कान्हु ने हूल का बिगुल फूंका था इस क्षेत्र के जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा का आह्वान सिदो कान्हु ने किया था. उस कार्य को दिसोम गुरु शिबू सोरेन ने आगे बढ़ाया. गुरु जी आज आदिवासी के सर्वोच्च नेता हैं. कार्यकर्ता इस बात को लेकर उदास है कि हूल दिवस के मौके पर हमारे अभिभावक सशरीर उपस्थित नहीं हो सके. कार्यक्रम में न तो सीएम और न ही दुमका विधायक शरीक हो पाए हैं. सारे लोग गुरुजी की सेवा में लगे हुए हैं. संगठन का काम हम सभी कार्यकर्ता मिलकर आगे बढ़ा रहे है.

पक्ष हो या विपक्ष, गुरुजी की सलामती के लिए सभी कर रहे है दुआ

राजनीतिक बयानबाजी के बीच पक्ष हो या विपक्ष सभी दिसोम गुरु शिबू सोरेन की सलामती के लिए दुआ कर रहे है. जामा विधायक डॉ लुईस मरांडी ने कहा कि आज हमारे नेता कठिन परिस्थिति से गुजर रहे है. आज हम अपने महापुरुषों से भी गुरुजी की सलामती की दुआ करते हैं. गुरुजी के लिए हर मजहब के लोग अपने अपने धार्मिक स्थलों में पूजा कर रहे हैं. उम्मीद है कि बहुत जल्द गुरुजी हमलोगों के बीच आकर अपना मार्गदर्शन देंगे.

वहीं पूर्व सांसद सुनील सोरेन ने कहा कि गुरु जी बहुत अनुभवी नेता हैं. हम भगवान से प्रार्थना करते है को वह जल्द स्वस्थ्य होकर  लौटें ताकि उनके अनुभव का लाभ झारखंड को मिल सके. वहीं सीता सोरेन ने कहा कि परिवार में पिता से भी बढ़कर गुरुजी बाबा का स्नेह मिला. बीमार हालत में हम उन्हें देख नहीं सकते इसलिए मंदिर जाकर उनकी सलामती के लिए पूजा अर्चना की.

इसमें कोई शक नहीं कि आज के समय में दिसोम गुरु शिबू सोरेन सर्वमान्य नेता है. राजनीतिक बयानबाजी अपनी जगह है लेकिन जब बात गुरु जी के स्वास्थ्य की आती है तो पक्ष से लेकर विपक्ष तक सभी उनकी सलामती की दुआ कर रहे है.

रिपोर्ट-पंचम झा

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