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युवाओं की अचानक मौत पर AIIMS का बड़ा खुलासा, कहा, एकाएक नहीं पहले से पनप रहा होता है मर्ज

BY -
Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 18, 2026, 8:59:32 AM

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): भारत में युवाओं की अचानक हो रही मौतें अब एक गंभीर स्वास्थ्य चिंता बनती जा रही हैं. 20 से 40 वर्ष की उम्र के ऐसे लोग, जो देखने में पूरी तरह स्वस्थ नजर आते हैं, अचानक गिरकर दम तोड़ देते हैं. खासकर कोरोना महामारी के बाद शादी, खेल या रोजमर्रा की गतिविधियों के दौरान युवाओं के गिरने के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए हैं, जिससे लोगों में डर और भ्रम बढ़ा है.

इन घटनाओं को समझने के लिए एम्स, नई दिल्ली ने एक विस्तृत अध्ययन किया है, जो इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित हुआ है. यह शोध भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) की एक बड़ी परियोजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य युवाओं में अचानक मौतों की आवृत्ति, कारण और जोखिम कारकों की पहचान करना था.

18 से 45 साल के युवाओं पर ज्यादा खतरा
एम्स के शोधकर्ताओं ने मई 2023 से अप्रैल 2024 के बीच 2,214 मेडिको-लीगल पोस्टमॉर्टम का विश्लेषण किया. इनमें 180 मामलों (8.1%) को ‘अचानक मृत्यु’ की श्रेणी में रखा गया. चौंकाने वाली बात यह रही कि इनमें से 57 प्रतिशत से अधिक मौतें 18 से 45 वर्ष की उम्र के युवाओं की थीं. परिजनों के मुताबिक, इन लोगों में घटना से पहले किसी गंभीर बीमारी के लक्षण नहीं दिखे थे.

दिल की बीमारी सबसे बड़ा कारण
रिपोर्ट का सबसे अहम निष्कर्ष यह है कि युवाओं में अचानक मौत की सबसे बड़ी वजह हृदय रोग है. करीब 42.6 प्रतिशत मामलों में मौत का कारण दिल से जुड़ी बीमारियां पाई गईं. पोस्टमॉर्टम में कई युवाओं की हृदय धमनियों में 70 प्रतिशत से ज्यादा ब्लॉकेज मिली. खासतौर पर लेफ्ट एंटीरियर डिसेंडिंग (LAD) आर्टरी सबसे ज्यादा प्रभावित पाई गई, जिसे खतरनाक हार्ट अटैक का प्रमुख कारण माना जाता है.

शोध में यह भी सामने आया कि अधिकांश युवाओं ने कभी दिल की जांच नहीं कराई थी और न ही वे किसी तरह की हृदय संबंधी दवाएं ले रहे थे. इसका मतलब साफ है कि दिल की गंभीर बीमारी बिना किसी चेतावनी के धीरे-धीरे बढ़ती रहती है.

हर पांचवीं मौत अब भी रहस्य
एम्स की रिपोर्ट में 21.3 प्रतिशत मामलों में मौत की स्पष्ट वजह सामने नहीं आ सकी. इन्हें ‘नेगेटिव ऑटोप्सी’ कहा गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में दिल की इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी यानी रिदम डिसऑर्डर जिम्मेदार हो सकती है, जो सामान्य पोस्टमॉर्टम में पकड़ में नहीं आती.

सांस की बीमारियां और अन्य कारण
रिसर्च के अनुसार, अचानक मौत सिर्फ दिल की बीमारी से नहीं हो रही. करीब 21.3 प्रतिशत मौतें सांस से जुड़ी बीमारियों जैसे टीबी और निमोनिया के कारण हुईं. कुछ मामलों में शराब के अधिक सेवन से नींद के दौरान उल्टी आने और दम घुटने से मौत दर्ज की गई. वहीं महिलाओं में फटी एक्टोपिक प्रेग्नेंसी और गर्भाशय फटने जैसी स्थितियां भी अचानक मौत का कारण बनीं.

घर और यात्रा के दौरान ज्यादा घटनाएं
अध्ययन में यह भी पाया गया कि 55 प्रतिशत से अधिक मौतें घर पर हुईं, जबकि लगभग 30 प्रतिशत घटनाएं यात्रा के दौरान हुईं. करीब 40 प्रतिशत मौतें रात या तड़के के समय दर्ज की गईं. परिजनों ने अचानक बेहोशी, सीने में दर्द, सांस फूलना और पेट दर्द जैसे लक्षण बताए, जिससे साफ होता है कि युवाओं में हार्ट अटैक हमेशा पारंपरिक लक्षणों के साथ नहीं आता.

कोविड वैक्सीन से कोई सीधा संबंध नहीं
शोधकर्ताओं ने कोविड संक्रमण और टीकाकरण की स्थिति का भी विश्लेषण किया. रिपोर्ट में कोविड संक्रमण या वैक्सीन और अचानक मौतों के बीच कोई ठोस संबंध नहीं पाया गया. अधिकांश आयु वर्ग के लोगों ने टीकाकरण कराया था, लेकिन मौतों का सीधा कारण वैक्सीन नहीं निकला.

विशेषज्ञों की चेतावनी
PSRI हार्ट इंस्टीट्यूट के चेयरमैन डॉ. के.के. तलवार के मुताबिक, यह अध्ययन युवाओं में समय से पहले होने वाली कोरोनरी आर्टरी डिजीज की गंभीरता को उजागर करता है. उन्होंने जेनेटिक जांच और परिवार के अन्य सदस्यों की स्क्रीनिंग पर जोर दिया.

‘अचानक’ नहीं, पहले से मौजूद होती है बीमारी
एम्स की इस रिपोर्ट का निष्कर्ष साफ है, युवाओं की मौतें अचानक नहीं होतीं, बल्कि शरीर में पहले से पनप रही बीमारियों का नतीजा होती हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर हृदय जांच, धूम्रपान और शराब से दूरी, स्वस्थ जीवनशैली और पारिवारिक स्तर पर स्क्रीनिंग ही ऐसी त्रासदियों को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है.

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