टीएनपी डेस्क (TNP DESK): सरकारी स्कूल का नाम सुनते ही हमारे ज़हन में कई तरह के सवाल आते हैं. सवाल यह भी रहता है कि क्या इस स्कूल में बेहतर शिक्षा व्यवस्था और मूलभूत सुविधाओं की अपेक्षा की जा सकती है. पर अब राज्य की तस्वीर धीरे-धीरे बदलने लगी है. यहाँ तक की राज्य में एक ऐसे सरकारी स्कूल की भी खूब चर्चा हुई जहां से निकले बच्चों ने अपने ज़िंदगी में बड़ा मकाम हासिल किया है. यह भी माना जाता है कि इस स्कूल में पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चे डॉक्टर इंजीनियर या किसी प्रतिष्ठित नौकरी पेशे में जाते हैं. राज्य के खूंटी जिले के कर्रा थाना क्षेत्र में स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की बच्चियों ने इस कथन को सच कर दिखाया है.
इस स्कूल की सबसे बड़ी खासियत इसका शानदार ट्रैक रिकॉर्ड है, जहां से पढ़ने वाली छात्राएं लगातार बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर रही हैं. हाल ही में यहां की कई छात्राओं ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में सफलता पाकर यह साबित कर दिया कि मेहनत और सही मार्गदर्शन से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है. खास बात यह है कि इनमें से अधिकतर छात्राएं किसान और मजदूर परिवारों से आती हैं.
इस सफलता के पीछे स्कूल और जिला प्रशासन की विशेष पहल अहम भूमिका निभा रही है. छात्राओं को स्कूल स्तर पर ही नीट और जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाई जा रही है. उन्हें नियमित कोचिंग, मार्गदर्शन और अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाती है, जिससे वे बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का आत्मविश्वास हासिल करती हैं.
इसके अलावा, प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत उन बच्चियों को भी पढ़ाई से जोड़ा जा रहा है, जो किसी कारणवश 10वीं के बाद अपनी शिक्षा छोड़ देती थीं. घर-घर जाकर उन्हें प्रेरित किया जा रहा है और आगे की पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में इस पहल को और विस्तारित किया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा छात्राएं इसका लाभ उठा सकें. यह मॉडल अब पूरे राज्य के लिए एक प्रेरणा बनता जा रहा है, जहां सरकारी स्कूल भी उत्कृष्ट शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य की गारंटी दे सकते हैं.