TNP DESK- बिहार नए साल का उत्साह के साथ स्वागत कर रहा है. लेकिन यह नया साल बिहार के लोगों के लिए कितनी खुशहाली लाएगा,यह सवाल भी बड़ा होता जा रहा है. वैसे नीतीश कुमार की सरकार अपनी बातों को पूरी तरह से निभाने की ओर अग्रसर होती दिख रही है.यह भी सच है कि 2026 का साल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए चुनौती भरा साल होगा. क्योंकि 2025 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक बिहार की खुशहाली के लिए कई वादे किए हैं.
उन वादों को निभाने की शुरुआत 2026 से ही करनी होगी. यह अलग बात है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित उनके मंत्रिमंडल के तमाम सहयोगियों ने अपनी संपत्ति का डिटेल्स सार्वजनिक कर दिया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से ज्यादा पैसे वाले उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी साबित हुए हैं. किसके पास कितना धन है, इसकी चर्चा तो बिहार में शुरू हो गई है. लोग मंत्रियों की संपत्ति की चर्चा अपने-अपने ढंग से करने लगे हैं.
बिहार के लिए 2026 इसलिए भी उम्मीद से भरा होगा, क्योंकि विधानसभा चुनाव के समय केंद्र और राज्य सरकार की ओर से की गई घोषणाएं जमीन पर उतारने का समय होगा. सबसे अधिक उम्मीद बिहार के उन बेरोजगारों को होगी, जो सरकारी नौकरी की प्रतीक्षा कर रहे हैं. चुनाव के पहले एनडीए ने घोषणा की थी कि एक करोड़ लोगों को नौकरी और रोजगार दिया जाएगा. इसकी शुरुआत भी नए साल से ही होगी. 5 वर्षों को अगर बांटा जाए, तो नीतीश सरकार को 2026 में कम से कम 20 लाख युवाओं को नौकरी देनी होगी. बात इतनी ही खत्म नहीं हो जा रही, महिलाओं की भी नीतीश सरकार से बड़ी उम्मीद है.
बिहार सरकार ने जीविका समूह से जुड़ी डेढ़ करोड़ से अधिक महिलाओं को कारोबार के लिए ₹10,000 दिया हैं. इनकी संख्या अभी भी बढ़ रही है और यह संख्या एक करोड़ 80 लाख तक जा सकती है. सरकार की घोषणा है कि 10,000 रुपए से कारोबार शुरू करने वाली महिलाएं अगर अपनी सफलता का प्रमाण देती है, तो उनमें से हर एक को एक लाख 90,000 रुपए और दिए जाएंगे. यह अलग बात है कि इसका आकलन अभी मुश्किल है कि इतनी महिलाओं में से कितनी को राशि मिलेगी. लेकिन इतना तो तय है कि अगर 25 से 30 परसेंट तक भी महिलाएं प्रमाण पत्र दे पाती हैं ,तो बिहार का ग्रामीण परिवेश पूरी तरह से बदल सकता है .
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार की चुनावी सभा में कहा था कि विकास अब बिहार का होगा और बिहार से कोई बाहर नहीं जाएगा. इसके लिए काम भी बिहार सरकार को 2026 में ही शुरू करना होगा. नए बिजली प्लांट पर भी काम हो रहा है ,लेकिन इसमें तेजी की जरूरत होगी. बिहार सरकार ने बंद चीनी मिलों को चालू करने की दिशा में काम शुरू किया है. बिहार की अगर चीनी मिल खुल जाए ,तो बहुत बड़ी राहत की बात होगी .एक आंकड़े के मुताबिक बिहार में कम से कम दो दर्जन चीनी मिल किसी न किसी वजह से बंद है. कोई 10 साल से बंद है, तो कोई 20 साल से और कई उससे भी अधिक समय से. बिहार में चीनी मील ग्रामीण इलाकों के लिए एक मजबूत आधार पहले भी थी और अगर सभी बंद चीनी मिल चालू हो गई, तो बिहार के कम से कम ग्रामीण इलाके को भारी मजबूती मिल सकती है.
कहा जा सकता है कि नया साल 2026 नीतीश सरकार के लिए चुनौती लेकर आया है. जिस तरह से बिहार में एनडीए की बंपर जीत हुई है, उससे बिहार सरकार पर भी जिम्मेवारी बढ़ गई है और लोगों की अपेक्षाएं भी उसी अनुपात में बढ़ी है. वैसे तो 2025 में नीतीश कुमार 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री की शपथ ली. मंत्रिमंडल का भी विस्तार हो गया. मंत्री भी काम करने शुरू कर दिए हैं .अब सरकार की परीक्षा की घड़ी है. 5 सालों में नीतीश सरकार को किए गए वादों को पूरा करना होगा.
यह अलग बात है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन का एक तरह से सुपड़ा साफ हो गया है. महागठबंधन में खटपट भी शुरू हो गई है. बिहार की सबसे मजबूत पार्टी रही राजद को मात्र 25 सीट मिली है. चुनाव के पहले कहा तो जा रहा था कि यह चुनाव नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव का राजनीतिक भविष्य तय करेगा. नीतीश कुमार तो राजनीति के मुख्य धारा में फिर से लौट आए हैं ,लेकिन लालू प्रसाद यादव हाशिए पर चले गए हैं. सिर्फ लालू प्रसाद यादव ही नहीं बल्कि उनके पुत्र तेजस्वी यादव भी हाशिए पर हैं.
यह अलग बात है कि लालू प्रसाद यादव स्वास्थ्य कारणों से बहुत सक्रिय नहीं रह पा रहे हैं. इसका परिणाम भी चुनाव परिणाम में दिखा. चुनाव रिजल्ट आने के बाद लालू प्रसाद के परिवार में विवाद हुआ. उनको किडनी देने वाली बेटी रोते हुए घर से निकलकर अपने ससुराल सिंगापुर चली गई. सोशल मीडिया पर इसको लेकर कई बातें लिखी गई. अब तो राबड़ी देवी के आवास खाली करने को लेकर भी राजनीति शुरू हो गई है .
जदयू का आरोप है कि राबड़ी देवी के आवास में कोई ना कोई तहखाना है, जिस वजह से वह आवास खाली करना नहीं चाहती. दूसरी ओर राजद के प्रवक्ता ने भी सवाल खड़ा किए हैं कि एनडीए के कई नेताओं को भी ऐसा आवास आवंटित है, जिसके वह हकदार नहीं है. ऐसे में क्या एनडीए के नेताओं के सरकारी आवास में भी तहखाने हैं? बिहार में अभी तहखाना की राजनीति खूब चल रही है और लोग इसे चटकारे के साथ जानने और समझने की कोशिश कर रहे हैं .
बहरहाल ,नीतीश कुमार अब एक्शन मूड में दिख रहे हैं. वादों को पूरा करने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं. उम्मीद की जानी चाहिए कि साल 2026 बिहार के लोगों के लिए नई उम्मीद लेकर आगे बढ़ेगा. लेकिन सब कुछ सरकार के मनोदशा पर निर्भर करेगा. देखना है साल 2026 बिहार के लिए कितनी खुशहाली लेकर आगे बढ़ता है.
रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो
