टीएनपी डेस्क(TNP DESK): सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को तीन दशक पुराने असॉल्ट केस में एक साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई, इस असॉल्ट में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी.
27 दिसंबर, 1988 को सिद्धू ने कथित तौर पर एक गुरनाम सिंह के सिर पर एक विवाद के बाद मारा था, जिससे उसकी मौत हो गई थी. हालांकि, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति एस के कौल की पीठ ने सिद्धू पर आईपीसी की धारा 304ए के तहत गैर इरादतन हत्या का आरोप लगाने की याचिका खारिज कर दी. 2018 में, कांग्रेस नेता को स्वेच्छा से चोट पहुंचाने के अपराध के लिए दोषी ठहराया गया था, लेकिन उन्हें गैर इरादतन हत्या के आरोपों से बरी कर दिया गया था. अदालत ने सिद्धू पर एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया था.
हाई कोर्ट ने सुनाई थी 3 साल की सजा
मामला सेशन कोर्ट से और हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक जा चुका है. पटियाला के सत्र न्यायालय के न्यायाधीश ने 22 सितंबर, 1999 को सिद्धू और उनके सहयोगी को मामले में सबूतों के अभाव और बेनेफिट ऑफ डाउट के कारण बरी कर दिया था. इसके बाद पीड़ित परिवारों ने इसे पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में चुनौती दी, जिसने 2006 में सिद्धू को दोषी ठहराया था और तीन साल की सजा सुनाई थी. सिद्धू ने इस आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में अपील दायर की थी. जिसमें आज यह फैसला आया है.
