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Art of waste material : बेकार समान और फुर्सत के पल का सार्थक उपयोग कर आत्मनिर्भर हो रही महिलाएं

BY -
Samiksha Singh
Samiksha Singh
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 16, 2026, 11:45:21 AM

आरा (AARA) : भोजपुर जिले के जगदीशपुर में इन दिनों हुनर हाट चल रहा है.  कोरोना की लंबी बंदी झेलने के बाद मेला आकर जहां खरीदार खुश हो रहे, वहीं दस्तकारों, शिल्पकारों, कारीगरों और उससे जुड़े लोगों को इस बेरोजगारी में रोजगार के अवसर मिलने लगे हैं. बता दें कि हुनर हाट में स्वदेशी सामानों को बढ़ावा दिया जाता है. वैसे ही जगदीशपुर के हुनर हाट में वेस्ट मटेरियल (कबाड़ के समान) से खिलौना, सजावट की सामग्री व जरूरत की चीजे बनाई जा रही हैं. साथ ही गांव और शहर से गायब हो रहे कपड़ों की वॉल हैंगिंग जैसी परंपरागत कलाओं को उभारने की भी कोशिश की जा रही है. इसमें गांव की महिलाओं को मुफ्त ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि महिलाएं आज के दौर में आत्मनिर्भर बने और अपनी कला और मेहनत से आगे बढ़े.

महिलाओं के सपनों में लगाया पंख

24 फरवरी 2021 को स्वयं सेवी संस्था जन विकास क्रांति द्वारा हुनर हाट केंद्र खोलने के बाद से जगदीशपुर और आस पास के देहाती क्षेत्र की जुड़ी महिलाओं के सपने साकार हो रहे हैं. एक उम्मीद की किरण महिलाओं के सामने दिख रही है. पिछले साल हुनर हाट केंद्र का उद्घाटन किया गया था. इस दौरान 50 लड़कियां काम किया करती थी. अब उनकी संख्या 200 के करीब हैं. सभी औरतों, लड़कियों को नि:शुल्क शिक्षा दी जा रही है.  

वेस्ट मटेरियल से बनायी जाती हैं आकर्षक चीज

हुनर हाट में ज्यादातर ऐसे चीजों का प्रयोग करना सिखाया जाता है जो वेस्ट हो या कबाड़ में फेका गया हो. उन वेस्ट मटेरियल से बच्चों के लिए खिलौना समेत कई प्रकार के चीजें बनाई जा रही हैं. सभी महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है. दीपावली के सजावट से लेकर,तिलक,शादी,गृह प्रवेश में उपयोग और सजावट जैसे कई प्रकार के सामान तैयार किए जा रहे हैं. महिलाएं इस कला की मदद से आत्मनिर्भर भी बन रही हैं.

गांव के बाद अब ऑनलाइन भी होगी खरीदारी

संस्था के महासचिव हिमराज सिंह ने बताया कि वेस्ट मटेरियल से  बने सामान अब भारत सरकार के पोर्टल (जीएसएमएस) पर भी अब उपलब्ध हैं. साथ ही अमेजन,फ्लिपकार्ट जैसी ऑनलाइन शॉप पर भी कुछ ही दिनों में हमारा प्रोडक्ट दिखने लगेगा. कुमारी स्नेहा सिंह बताती हैं कि भोजपुरिया हुनर हाट केंद्र में 15 दिनों की ट्रेनिंग महिलाओं को दी जाती है. घरों में या अपने आसपास बेकार पड़े शादी के कार्ड्स,एक्सरे फिल्म,चाय का कप,प्लास्टिक,शीशे की बोतल,कार्टून, जूट के बोरे, पुरानी मिट्टी के दीए, मोम व लकड़ी के समान रहते हैं, उससे समुचित उपयोग कर उसे आकर्षक रूप देकर हम अपने घर, ऑफिस, व दुकान को सजाने के साथ उसे बिक्री कर आय भी कर रहे हैं. प्रशिक्षण ले रही सोनामुनी देवी ने बताया कि पहले हमलोग काम खत्म होने के बाद बेकार घर में बैठते थे, लेकिन स्नेहा दीदी ने हमलोगों आत्मनिर्भर बनने के साथ–साथ हुनर सिखाई. इस हुनर से महीने में आठ से दस हजार रुपए कमा लेते हैं. घर में बेकार बैठकर महिलाओं को कुछ सीखना और करना चाहिए ताकि वो आत्मनिर्भर बन सके.

प्रोडक्ट            लागत       बिक्री

स्टोन पॉट          20         100

जुट का कप       20          80

बोतल आर्ट        40         100

डोर मेट            30          100

सुजनी             100          200

पोटली            50          100

जूट आर्ट        50           100

मोर दीया       40           80

गमले            50         100

ये यह रेट आम दिन के लिए है. पर्व,त्योहार और समारोह का मौसम आने के बाद डिमांड के अनुसार कीमत बढ़ जाती है.

Tags:News

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