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हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी : केंद्रीय मंत्री के बयान से लखीमपुर में हुई हिंसा, अपने पद की गरिमा के अनुरूप करें आचरण

BY -
Prakash Tiwary
Prakash Tiwary
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 5:40:56 AM

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने लखीमपुर खीरी हिंसा के मुख्य आरोपी केन्द्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा है कि पिछले अक्टूबर की लखीमपुर खीरी घटना, जिसमें चार किसानों सहित आठ लोग मारे गए थे, शायद नहीं होती, अगर, केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी ने स्थानीय किसानों को निष्कासन की धमकी नहीं दी होती. इस टिप्पणी के साथ ही लखीमपुर के तिकोनिया में 3 अक्टूबर, 2021 को चार किसानों और एक पत्रकार की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा के साथ चार सह-आरोपियों की जमानत याचिकाओं को कोर्ट ने खारिज कर दिया है. अदालत ने कहा कि चारों आरोपियों सुमित जायसवाल, अंकित दास, शीशपाल और लवकुश में से प्रत्येक के खिलाफ पर्याप्त हैं.

मंत्री के बयान पर कोर्ट ने कही ये बात

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबू बनारसी दास के पोते, अंकित दास की जमानत याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह ने कहा कि उच्च पदों पर आसीन राजनीतिक व्यक्तियों को समाज में नतीजों को देखते हुए सभ्य भाषा में सार्वजनिक भाषण देना चाहिए. उन्हें गैर-जिम्मेदाराना बयान नहीं देना चाहिए. क्योंकि, उन्हें अपनी स्थिति और उच्च पद की गरिमा के अनुरूप आचरण करना होता है. अदालत ने आगे कहा कि जैसा कि चार्जशीट में जांच एजेंसी की ओर से दायर जवाबी हलफनामे में बताया गया है और इसका उल्लेख भी किया गया कि यह घटना नही होती, यदि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने कथित बयान नहीं दिया होता.

मंत्री ने दिया था बयान

बता दें कि 25 सितंबर, 2021 को विरोध करने वाले किसानों को खुद को सुधारने की बात कही थी नहीं तो अन्यथा वह खुद सुधारने के लिए दो मिनट से भी अधिक समय नहीं लेंगे. केन्द्रीय मंत्री अजय मिश्रा ने जनप्रतिनिधि चुने जाने से पहले अपने पिछले रिकॉर्ड की याद दिलाते हुए कहा था कि वह किसी भी चुनौती से नहीं भागते. यही वह बयान था जिसने कथित तौर पर किसानों द्वारा 3 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था, जब वह अपने पैतृक गांव बनवीरपुर में कुश्ती प्रतियोगिता के आयोजन में पहुंचे थे.

धारा 144 लागू होने के बाद भी उपमुख्यमंत्री आयोजन में क्यों शामिल हुए?

कोर्ट ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि जब इलाके में धारा 144 लगा दी गई तो कुश्ती प्रतियोगिता रद्द क्यों नहीं किया गया. कोर्ट ने कहा कि कानून निर्माताओं को कानून का उल्लंघन करने वाले के रूप में नहीं देखा जा सकता है. अदालत विश्वास नहीं कर सकती है कि राज्य के उपमुख्यमंत्री (केशव प्रसाद मौर्य) की जानकारी में नहीं रहा होगा कि क्षेत्र में धारा 144 लागू है. इलाके में किसी भी सभा या आयोजन को प्रतिबंधित कर दिया गया था. इसके बावजूद कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन किया गया और इसके बावजूद केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और उपमुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि आदि के तौर पर उपस्थित रहने का फैसला किया.  

 

Tags:News

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