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AK 47 लेकर कभी घुसे थे जेल में, अपराधियों ने छोड़ दिया था बिहार, जानें कौन हैं RJD सांसद सुधाकर सिंह से भिड़ने वाले IPS कुंदन कृष्णन

Manjesh Kumar Patna
Manjesh Kumar Patna
Senior News Publisher • TheNewsPost.in

पटना: बिहार में विभिन्न राजनीतिक मुद्दों के साथ ही एक पुलिस अधिकारी और सांसद के बीच का विवाद काफी चर्चा में है. मामला शुरू हुआ है जून से जब भोजपुर में भरत तिवारी के कथित एनकाउंटर मामले में बक्सर के राजद सांसद सुधाकर सिंह ने एसटीएफ के तत्कालीन प्रमुख पर कई गंभीर आरोप लगाए थे. अब अक्टूबर में डीजी कुंदन कृष्णन ने सुधाकर सिंह को नोटिस भेज माफी मांगने के लिए कहा साथ ही मानहानि का मुकदमा करने की चेतावनी दी जिसके बाद से राजद सांसद लगातार कुंदन कृष्णन के ऊपर हमलावर हैं. राजद सांसद ने इस संबंध में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी पत्र लिखा है. 

बिहार के नालंदा के रहने वाले कुंदन कृष्णन 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं जो वर्तमान में बिहार पुलिस ने डीजी के पद पर कार्यरत हैं. वह पटना समेत कई जिलों में एसपी रह चुके हैं. अपने 32 वर्षों की सेवा में वह पुलिस विभाग के कई पदों पर योगदान दे चुके हैं. अपनी सेवा के दौरान उन्होंने कई साहसिक कार्रवाई भी की जिसकी काफी चर्चा होती है. उनके साहसिक कार्रवाई की वजह से ही उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक समेत कई पदक से सम्मानित किया जा चुका है. 2005 में नीतीश कुमार की सरकार बनने के बाद बिहार के कई कुख्यात और बाहुबलियों के विरुद्ध कार्रवाई के कारण कुंदन कृष्णन की छवि सख्त मिजाज अधिकारी के रूप में बन गई. कहा जाता है कि आज के समय में भी उनका नाम सुन कर अपराधियों में खौफ का माहौल हो जाता है.

एके 47 वाले अधिकारी

वर्ष 2002 में कुंदन कृष्णन छपरा में एसपी के पद पर तैनात थे. उस दौरान छपरा जेल में कैदियों ने विद्रोह कर दिया तथा स्थिति ऐसी बन गई थी जैसे कि अब जेल पर कब्जा लेंगे. छपरा से लेकर पटना तक पुलिस महकमे में अफरातफरी का माहौल था. तब आईपीएस कुंदन कृष्णन हाथ में एके 47 लेकर जेल में घुस गए और स्थिति को नियंत्रित किया. कहा जाता है कि वो पूरा सीन किसी एक्शन फिल्म से कम नहीं था. पुलिस को मार डालने पर उतारू 5 कैदी गोली खाकर ढेर हो गए. इस एनकाउंटर में कुंदन कृष्णन के एक हाथ में भी फ्रैक्चर आया लेकिन तब भी उनके हाथ से हथियार नहीं छूटा. इसके बाद सिर्फ एक अफसर के सामने सैकड़ों खतरनाक कैदियों ने सरेंडर कर दिया. उनके इस साहसिक कदम के बाद वह काफी चर्चा में आ गए थे और तब से उन्हें एके 47 वाले अधिकारी के रूप में भी जाना जाता है.

राष्ट्रपति शासन के दौरान दिखाई थी वर्दी की हनक

आईपीएस कुंदन कृष्णन ने वर्ष 2005 में बिहार में लागू राष्ट्रपति शासन के दौरान भी अपनी वर्दी की हनक दिखाई थी. उस वक्त वह पटना में एसपी के पद पर पदस्थापित थे. कहा तो यहां तक जाता है कि उनकी तब की पुलिसिंग के चलते कई अपराधियों ने एनकाउंटर के डर से बिहार ही छोड़ दिया था. गली-गली में पाए जाने वाले डॉन रातों-रात या तो अंडरग्राउंड हो गए या फिर बिहार छोड़ भाग छूटे.

आनंद मोहन से टकराव

मामला 2006 का है जब बाहुबली नेता आनंद मोहन को सहरसा जेल से पेशी के लिए देहरादून ले जाया गया था. वापसी में आनंद मोहन पटना में ही एक होटल में रुक गए थे. जब मामले की जानकारी पटना के तत्कालीन एसएसपी कुंदन कृष्णन को हुई तो वह खुद ही वहां पहुंच गए थे. इस दौरान आनंद मोहन के समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई थी लेकिन उन्होंने आनंद मोहन को जेल भेज कर ही दम लिया था.

मुकेश पाठक जैसे दुर्दान्त को भी दबोचा था

वर्ष 2015 में दरभंगा में एक सरकारी प्रोजेक्ट की सड़क बनवा रहे दो इंजीनियर ब्रजेश कुमार सिंह और मुकेश कुमार सिंह को अपराधियों ने एके 56 से भून दिया था. मामले की जांच में दुर्दांत अपराधी मुकेश पाठक का नाम सामने आया लेकिन वह नेपाल भाग गया था. कहा जाता है कि उसे गिरफ्तार करने की पुलिस की हर कोशिश नाकाम हो रही थी. तब आईपीएस कुंदन कृष्णन ने जाल बिछाया और फिर वह एसटीएफ के हत्थे चढ़ा था.

कोलकाता में भी दिखाया दम

आईपीएस कुंदन कृष्णन ने अपनी पुलिसिंग सिर्फ बिहार में ही नहीं दिखाई बल्कि केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर रहते हुए भी कई बार अपना दम दिखाया. बीते वर्ष कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप कांड के वक्त कुंदन कृष्णन सीआईएसएफ में एडीजी थे. उस वक्त सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उन्होंने कॉलेज के सुरक्षा की कमान संभाली थी.

गोपाल खेमका हत्याकांड की जांच में अहम भूमिका

इसके साथ ही बीते वर्ष राजधानी पटना में एक चर्चित कारोबारी गोपाल खेमका हत्याकांड मामले में भी कुंदन कृष्णन की काफी चर्चा हुई. इस मामले में एसटीएफ और पटना पुलिस ने काफी तेजी से कार्रवाई की थी. कहा जाता है कि इस कार्रवाई में कुंदन कृष्णन ने काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उनके नेतृत्व में एसटीएफ और पटना पुलिस ने मामले में तेजी से कदम उठाए. यह मामला भी उन घटनाओं में शामिल है जिनके कारण कुंदन कृष्णन की पुलिस कार्यशैली चर्चा में रही.