रांची (RANCHI): जन सुराज पार्टी के डिजिटल कम्युनिकेशन मैनेजर देवपालिक गुप्ता की मौत ने रेलवे पुलिस और झारखंड पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. 26 अक्टूबर को रांची से पटना जा रही जनशताब्दी एक्सप्रेस में सफर के दौरान देवपालिक लापता हो गए थे. अगले दिन 27 अक्टूबर को उनका शव रांची जिले के अनगड़ा थाना क्षेत्र में रेलवे ट्रैक के पास झाड़ियों से बरामद हुआ. उनकी मौत से एक दिन पहले सोशल मीडिया पर उनके एक परिचित की पोस्ट सामने आई थी, जिसमें देवपालिक को खोजने के दौरान पुलिस और रेलवे प्रशासन के बीच समन्वय की कमी का आरोप लगाया गया था.
26 अक्टूबर: दोपहर करीब 3 बजे अचानक लापता हुए देवपालिक
देवपालिक गुप्ता अपने दो सहयोगियों के साथ रांची से पटना जाने के लिए जनशताब्दी एक्सप्रेस में सवार हुए थे. साथियों के मुताबिक, मुरी स्टेशन से पहले उन्होंने पैंट्री कार में खाना ऑर्डर करने के लिए जाने की बात कही. इसके बाद वह वापस नहीं लौटे. काफी देर तक इंतजार करने के बाद साथियों ने फोन किया, लेकिन उनका मोबाइल बंद मिला. इसके बाद टीटी और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवानों की मदद से पूरी ट्रेन में उनकी तलाश की गई. मुरी स्टेशन पर भी खोजबीन हुई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला.
शाम करीब 4:30 बजे , बोकारो में भी नहीं मिली मदद
देवपालिक के एक परिचित ने रात 12 बजे लिखी अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि ट्रेन बोकारो पहुंचने पर रेल मदद के माध्यम से शिकायत की गई, लेकिन तत्काल सहायता नहीं मिली. पोस्ट के मुताबिक, RPF ने मामला GRP का बताते हुए जिम्मेदारी दूसरे विभाग पर डाल दी. बोकारो GRP में शिकायत करने पर उन्हें मुरी जाने को कहा गया. मुरी पहुंचने पर कथित तौर पर रांची में मामला दर्ज कराने की बात कही गई. इस दौरान देवपालिक के दोनों साथी अपने वरिष्ठ सहयोगी को खोजने के लिए लगातार अलग-अलग अधिकारियों से संपर्क करते रहे.
रात करीब 9 बजे: छह घंटे बाद दर्ज हुई FIR
परिचित की पोस्ट के अनुसार, घटना दोपहर करीब 3 बजे हुई थी, जबकि FIR रात करीब 9 बजे दर्ज हो सकी. पोस्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि देवपालिक की आखिरी लोकेशन के आसपास जंगल और रेलवे ट्रैक का इलाका होने के बावजूद रात में तत्काल तलाशी अभियान शुरू नहीं किया गया. पोस्ट लिखने वाले ने दावा किया कि करीब तीन घंटे बाद संबंधित स्टेशन पर संपर्क करने पर बताया गया कि वहां कोई टीम नहीं पहुंची थी. रात 12 बजे तक रांची GRP से भी तलाशी दल की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी थी. पोस्ट में मुरी स्टेशन पर शिकायत करने गए लोगों को रांची जाने से रोके जाने और उनके फोन जब्त किए जाने का आरोप भी लगाया गया. इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है. पुलिस और रेलवे प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा.
27 अक्टूबर, रेलवे ट्रैक के पास मिला शव
मंगलवार को देवपालिक का शव रांची-मुरी रेलखंड पर जरवाडीह के पास झाड़ियों से बरामद किया गया. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की. शुरुआती आशंका जताई गई कि वह चलती ट्रेन से गिर गए होंगे, हालांकि मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से होनी है.
जन सुराज ने की निष्पक्ष जांच की मांग
देवपालिक की मौत के बाद जन सुराज ने शोक जताते हुए मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच की मांग की. पार्टी के अनुसार, देवपालिक पिछले करीब चार वर्षों से डिजिटल कम्युनिकेशन और सोशल मीडिया से जुड़े काम संभाल रहे थे. देवपालिक की मौत के मामले में अब सबसे अहम सवाल यह है कि उनके लापता होने की सूचना मिलने के बाद तलाश कितनी तेजी से हुई और क्या समय पर समन्वित कार्रवाई की गई? इन सवालों के जवाब पुलिस जांच, रेलवे के रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक पक्ष से ही स्पष्ट हो सकेंगे.
कौन थे देवपालिक गुप्ता
देवपालिक गुप्ता प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के डिजिटल कम्युनिकेशन मैनेजर और सोशल मीडिया टीम के लीडर थे. वह उत्तर प्रदेश के कुशीनगर के रहने वाले थे और उन्होंने दिल्ली के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की थी. वो 2018 बैच के स्टूडेंट थे. वह पिछले करीब चार वर्षों से प्रशांत किशोर की टीम और जन सुराज के सोशल मीडिया अभियानों से गहराई से जुड़े हुए थे.
