जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): चांडिल के आसनबनी स्थित 10th माइल स्टोन होटल में होटल कारोबारी निखार सबलोक की दिनदहाड़े हत्या ने जमशेदपुर के अपराध जगत के साथ-साथ जमीन कारोबार से जुड़े पुराने विवादों को भी सामने ला दिया है. दो हमलावरों ने होटल से बाहर निकलते समय निखार पर गोलियां बरसाईं और फरार हो गए. सीसीटीवी में संदिग्ध हमलावरों के दिखने की बात सामने आई है. अब पुलिस जमीन विवाद, आपराधिक नेटवर्क, रंगदारी और पुराने गैंग कनेक्शन समेत कई एंगल से जांच कर रही है.लेकिन इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है की क्या निखार की हत्या का असली कारण गैंगवार था या फिर करीब 3 से 3.5 एकड़ जमीन का वह विवाद, जिस पर हत्या से ठीक पहले तक बातचीत चल रही थी?
कौन थे निखार सबलोक?
33 वर्षीय निखार सबलोक होटल कारोबार से जुड़े परिवार से आते थे. परिवार के होटल कारोबार के अलावा निखार ने थाईलैंड के पटाया में भी होटल कारोबार संभाला था. बाद में जमशेदपुर लौटकर उन्होंने होटल कारोबार के साथ जमीन के कारोबार में भी सक्रियता बढ़ाई. रिपोर्टों के मुताबिक वह एनएच किनारे एक बड़े होटल प्रोजेक्ट की तैयारी में थे. यही होटल प्रोजेक्ट अब उनकी हत्या की जांच में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बनता दिखाई दे रहा है.
3 से 3.5 एकड़ जमीन का पूरा विवाद क्या है?
सूत्रों के मुताबिक 10th माइल स्टोन होटल के पीछे पिंडरा पहाड़िया इलाके में करीब 3 से 3.5 एकड़ जमीन है. बताया जा रहा है कि यह जमीन किसी तनेजा नाम के व्यक्ति ने एपेक्स कंपनी के नाम से खरीदी थी. निखार इस जमीन पर कब्जा लेकर बाउंड्रीवॉल का काम करवा रहे थे. यहीं से विवाद की दूसरी परत सामने आती है. स्थानीय स्तर पर जाताल बाबा पूजा स्थल और आदिवासी समुदाय से जुड़े लोगों के विरोध की बात भी सामने आ रही है. यानी जमीन का विवाद सिर्फ कारोबारी दावेदारी तक सीमित था या इसमें स्थानीय धार्मिक और सामुदायिक हित भी जुड़े थे. यह जांच का अहम हिस्सा होना चाहिए. हत्या वाले दिन भी निखार इसी जमीन और उससे जुड़े ठेके को लेकर बैठक में थे. मीटिंग खत्म होने के बाद जब वह होटल से बाहर निकले, तभी उन पर हमला हुआ. उपलब्ध रिपोर्टिंग में भी यह बात सामने आई है कि निखार पिछले कुछ दिनों से लगातार 10th माइल स्टोन जा रहे थे और जमीन से जुड़े लोगों से मुलाकात कर रहे थे. यही टाइमलाइन इस केस का सबसे बड़ा सवाल बनती है.
फिर गैंगवार का एंगल कहां से आया?
निखार की हत्या के बाद गणेश सिंह, विक्रम शर्मा और पुराने जमशेदपुर गैंगवार के नाम चर्चा में आने लगे. निखार के गणेश सिंह से कथित संपर्क की भी चर्चा है. दूसरी तरफ विक्रम शर्मा के करीबी एक व्यक्ति को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की खबर ने इस एंगल को और हवा दी है. यहीं से एक और सवाल खड़ा होता है. क्या विक्रम शर्मा की हत्या से जुड़े पुराने विवाद का बदला लेने के लिए निखार को निशाना बनाया गया? या फिर गैंग के नामों का इस्तेमाल किसी अलग मकसद से किया गया?इसका जवाब अभी जांच से निकलना बाकी है.
अखिलेश सिंह के शूटरों का एंगल कितना मजबूत ?
जमशेदपुर में अखिलेश सिंह और दूसरे आपराधिक गिरोहों के बीच पुरानी अदावत किसी से छिपी नहीं है. इसलिए निखार की हत्या के बाद अखिलेश गैंग के शूटरों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. लेकिन अभी तक उपलब्ध जानकारी में अखिलेश सिंह के शूटरों द्वारा निखार की हत्या किए जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.ऐसे में इस एंगल को तथ्य के बजाय जांच की संभावित दिशा के रूप में देखना जरूरी है.
सबसे बड़ा सवाल: क्या जमीन की कहानी गैंगवार के शोर में दब सकती है?
यही इस पूरे हत्याकांड की सबसे महत्वपूर्ण इनसाइट है. अगर हत्या की वजह वास्तव में जमीन विवाद निकलती है, तो जांच का फोकस सिर्फ अपराधी गिरोहों और पुराने गैंगवार तक सीमित नहीं रहना चाहिए. जमीन की खरीद, उसके स्वामित्व के दस्तावेज, एपेक्स कंपनी से जुड़े लोग, बाउंड्रीवॉल का काम, ठेकेदार, स्थानीय विरोध, जाताल बाबा पूजा स्थल से जुड़े विवाद और हत्या वाले दिन की बैठक में शामिल हर व्यक्ति की भूमिका की जांच उतनी ही जरूरी है.
क्योंकि अगर हत्या से ठीक पहले उसी जमीन और ठेके को लेकर बैठक हुई थी, तो यह महज संयोग है या हत्या की साजिश की अहम कड़ी—इसका जवाब जांच को देना होगा. दूसरी तरफ पुलिस के पास गैंगवार एंगल को खारिज करने की भी वजह नहीं है. दो शूटरों का आना, रेकी की आशंका और सुनियोजित तरीके से हत्या के बाद फरार होना किसी पेशेवर साजिश की ओर इशारा करता है. पुलिस ने जांच के लिए एसआईटी गठित की है और जमीन विवाद समेत अन्य संभावित कारणों की पड़ताल की जा रही है.
क्या राजनीतिक कनेक्शन की भी जांच होगी?
इस मामले में स्थानीय झामुमो नेताओं से जुड़े विवाद की बात भी सामने आ रही है. अगर जमीन को लेकर स्थानीय राजनीतिक प्रभाव, आदिवासी समुदाय के विरोध और कारोबारी हितों के बीच टकराव था, तो इस पहलू की भी निष्पक्ष जांच जरूरी होगी. हालांकि अभी तक किसी राजनीतिक दल या नेता की निखार सबलोक की हत्या में भूमिका का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है. इसलिए इसे आरोप की तरह नहीं, बल्कि जांच के सवाल के तौर पर देखना चाहिए. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर पुलिस शुरुआत से ही हत्या को पुराने गैंगवार से जोड़कर देखती है, तो जमीन विवाद से जुड़े संभावित कारण और उसमें शामिल लोगों की भूमिका कहीं जांच के दायरे से बाहर न रह जाए. वहीं अगर जमीन विवाद को ही पूरी कहानी मान लिया जाता है, तो पेशेवर शूटरों और पुराने आपराधिक नेटवर्क की भूमिका की अनदेखी भी गंभीर चूक हो सकती है.
असली जांच यही है
इस केस में सबसे जरूरी सवाल यह नहीं कि गणेश, अखिलेश या विक्रम से कौन जुड़ा है?” बल्कि यह है कि निखार की हत्या से सबसे ज्यादा फायदा किसे हो सकता था और हत्या से ठीक पहले जमीन को लेकर क्या बातचीत हुई थी?” अगर जमीन विवाद असली वजह है, तो गैंगवार का नैरेटिव जांच को गलत दिशा में ले जा सकता है. और अगर गैंगवार ही असली वजह है, तो जमीन विवाद महज एक परदा हो सकता है.इसलिए निष्पक्ष जांच के लिए दोनों एंगल को बराबर गंभीरता से खंगालना होगा. निखार सबलोक हत्याकांड का सच सिर्फ शूटरों की गिरफ्तारी से नहीं, बल्कि हत्या की वजह, जमीन विवाद, स्थानीय विरोध, कारोबारी हित और संभावित आपराधिक नेटवर्क के पूरे कनेक्शन के खुलासे से सामने आएगा.
