टीएनपी डेस्क (TNP DESK): 15 नवंबर 2000 को झारखंड अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया. करीब 26 साल के इस राजनीतिक सफर में राज्य ने कई बड़े नेताओं को खोया है. इनमें पांच ऐसे मंत्री भी शामिल हैं, जिनकी सांसें मंत्री पद की जिम्मेदारी संभालते हुए थम गईं. किसी की जान नक्सली हमले में गई, तो किसी ने गंभीर बीमारी और स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के चलते दम तोड़ा. ऐसे में अब सुदिव्य कुमार सोनू के असामयिक निधन के बाद यह सूची एक बार फिर चर्चा में है. इसी कड़ी में जानिए उन नेताओं के बारे में जिन्होंने मंत्री पद पर रहते हुए अपनी जान गवा दी है.
रमेश सिंह मुंडा: नक्सली हमले में गई जान
झारखंड गठन के बाद पूर्व मंत्री और तत्कालीन विधायक पद पर रह कर जान गंवाने वाले नेताओं में रमेश सिंह मुंडा का नाम सबसे पहले आता है. तमाड़ से जनता दल (यूनाइटेड) के विधायक रहे मुंडा तत्कालीन अर्जुन मुंडा सरकार में मंत्री थे. 9 जुलाई 2008 को बुंडू के बारूहातु स्थित एक हाईस्कूल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान नक्सलियों ने हमला कर दिया. इस गोलीबारी में रमेश सिंह मुंडा की मौत हो गई. उनके दो अंगरक्षक और एक अन्य व्यक्ति की भी जान चली गई. इस घटना ने पूरे राज्य को हिला दिया था. बाद में यह मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी तक पहुंचा और आरोपियों के खिलाफ लंबे समय तक जांच और कानूनी कार्रवाई चलती रही.
हाजी हुसैन अंसारी: कोरोना के बाद कार्डियक अरेस्ट
झारखंड के वरिष्ठ JMM नेता और मधुपुर विधायक हाजी हुसैन अंसारी भी मंत्री पद पर रहते दुनिया से विदा हुए. 28 जनवरी 2020 को मंत्री पद की शपथ लेने के बाद 3 अक्टूबर 2020 को उनका निधन हो गया. कोरोना संक्रमण के बाद उनका इलाज चल रहा था. हालांकि बाद में उनकी कोविड रिपोर्ट निगेटिव आ गई थी, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी परेशानी बनी रही. 3 अक्टूबर को रांची के एक निजी अस्पताल में कार्डियक अरेस्ट से उनका निधन हो गया. उनके निधन के बाद तत्कालीन राज्य सरकार ने दो दिन के राजकीय शोक की घोषणा की थी. हाजी हुसैन अंसारी झारखंड के पहले मुस्लिम मंत्री भी रहे.
जगरनाथ महतो: बीमारी के बावजूद निभाते रहे जिम्मेदारी
डुमरी के तत्कालीन विधायक और शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो को झारखंड की राजनीति में ‘टाइगर’ के नाम से जाना जाता था. कोरोना संक्रमण के बाद उनकी तबीयत बेहद खराब हो गई थी. इलाज के लिए उन्हें चेन्नई ले जाया गया, जहां उनका लंग ट्रांसप्लांट भी हुआ. स्वास्थ्य चुनौतियों के बावजूद वह झारखंड लौटे और मंत्री पद की जिम्मेदारियां संभालते रहे. बाद में तबीयत दोबारा बिगड़ने पर उन्हें चेन्नई ले जाया गया. 6 अप्रैल 2023 को मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर और पोस्ट-कोविड जटिलताओं के बीच उनका निधन हो गया. उनके निधन के बाद डुमरी विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ, जिसमें उनकी पत्नी बेबी देवी ने जीत दर्ज की.
रामदास सोरेन: दिल्ली में इलाज के दौरान निधन
15 अगस्त 2025 को झारखंड के शिक्षा मंत्री और घाटशिला विधायक रामदास सोरेन का निधन हो गया. वह हेमंत सोरेन सरकार में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. 2 अगस्त 2025 को घर में गिरने के बाद उन्हें ब्रेन हेमरेज हुआ था. गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें दिल्ली ले जाया गया, जहां कई दिनों तक इलाज चला. डॉक्टरों के प्रयास के बावजूद 15 अगस्त को उनका निधन हो गया. उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया.
सुदिव्य कुमार सोनू: शिक्षक दिवस के अगले दिन निधन
अब इस दर्दनाक सूची में सुदिव्य कुमार सोनू का नाम भी जुड़ गया है. गिरिडीह सदर के विधायक और झारखंड सरकार में नगर विकास एवं आवास, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, पर्यटन, कला-संस्कृति तथा खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे सोनू का 6 सितंबर 2026 को असामयिक निधन हो गया. जानकारी के मुताबिक रात में अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया. हालांकि उन्हें बचाया नहीं जा सका. शुरुआती रिपोर्टों में कार्डियक अरेस्ट या हार्ट अटैक को मौत की वजह बताया गया है. सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से जुड़ा एक संयोग भी बेहद भावुक करने वाला है. 5 सितंबर यानी शिक्षक दिवस पर वह शिक्षा और विद्यालय से जुड़े कार्यक्रम में सक्रिय नजर आए थे. इसके ठीक अगले दिन उनके निधन की खबर ने राजनीतिक गलियारों के साथ शिक्षा जगत और उनके समर्थकों को भी गहरे शोक में डाल दिया.
झारखंड के राजनीतिक इतिहास में मंत्री पद पर रहते इन पांच नेताओं का निधन अलग-अलग परिस्थितियों में हुआ. रमेश सिंह मुंडा की हत्या नक्सली हमले में हुई, जबकि हाजी हुसैन अंसारी, जगरनाथ महतो, रामदास सोरेन और सुदिव्य कुमार सोनू का निधन स्वास्थ्य संबंधी कारणों से हुआ. इन नेताओं के निधन ने न सिर्फ उनके परिवार और समर्थकों को गहरा आघात पहुंचाया, बल्कि झारखंड की राजनीति में भी ऐसी खाली जगह छोड़ी, जिसकी भरपाई आसान नहीं रही.
