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Special Story: 31 मार्च से पहले ‘लाल आतंक’ पर अंतिम प्रहार की तैयारी ! बस्तर 96% मुक्त, बुढ़ा पहाड़-सारंडा अंतिम टार्गेट

BY -
Rajesh Tomar
Rajesh Tomar
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: April 10, 2026, 1:01:55 PM

राँची: मार्च 2026 की तय समयसीमा नजदीक आते ही देश में वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) के खिलाफ अब निर्णायक लड़ाई अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. सुरक्षा बलों ने छत्तीसगढ़ और झारखंड के उन दुर्गम इलाकों में भी दबदबा कायम कर लिया है, जिन्हें कभी नक्सलियों का अभेद्य गढ़ माना जाता था. सरकार अब “नक्सल मुक्त भारत” की घोषणा के बेहद करीब नजर आ रही है.

छत्तीसगढ़: बस्तर में निर्णायक बढ़त

छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री के अनुसार, बस्तर क्षेत्र का लगभग 96% हिस्सा अब नक्सल प्रभाव से मुक्त हो चुका है. यह उपलब्धि दशकों से चल रहे अभियान की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है.

मार्च 2026 के अंतिम सप्ताह में एक ऐतिहासिक घटनाक्रम सामने आया, जब कुख्यात वरिष्ठ नक्सली कमांडर पापा राव ने 17 साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया. करीब 25 वर्षों तक सक्रिय रहे राव पर ₹25 लाख का इनाम था. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह सरेंडर नक्सल संगठन की कमर तोड़ने वाला साबित हुआ है.

इसके अलावा, कांकेर और बीजापुर जिलों में हालिया ऑपरेशनों के बाद 100 से अधिक नक्सलियों ने हथियार डाल दिए हैं. लगातार बढ़ते दबाव और संसाधनों की कमी ने नक्सली संगठनों को कमजोर कर दिया है.

सरकार अब इन इलाकों में शांति स्थापित करने के लिए नई रणनीति पर काम कर रही है. बस्तर में बनाए गए करीब 400 सुरक्षा शिविरों को स्कूल, अस्पताल और स्किल डेवलपमेंट सेंटर में बदलने की योजना तैयार की गई है, ताकि विकास की मुख्यधारा को मजबूत किया जा सके.

झारखंड: सारंडा और बूढ़ा पहाड़ में अंतिम अभियान

झारखंड में भी सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के अंतिम गढ़ों को ध्वस्त कर दिया है. खासतौर पर सारंडा जंगल, जो कभी एशिया का सबसे बड़ा नक्सली ठिकाना माना जाता था, अब पूरी तरह सुरक्षा बलों के नियंत्रण में है.

छत्तीसगढ़ से CoBRA बटालियन की विशेष यूनिट्स को सारंडा में अंतिम सफाई अभियान के लिए तैनात किया गया है. इनका लक्ष्य बचे हुए नक्सलियों को पकड़ना या आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करना है.

सबसे बड़ी सफलता तब मिली जब हजारीबाग और चतरा जिलों में ऑपरेशन के दौरान ₹1 करोड़ के इनामी सेंट्रल कमेटी सदस्य साहिद सोरिन उर्फ ‘प्रवेश’ को दो अन्य कमांडरों के साथ मार गिराया गया. इससे संगठन के शीर्ष नेतृत्व को भारी झटका लगा है.

सरकार ने आधिकारिक रूप से घोषणा की है कि बूढ़ा पहाड़, पारसनाथ और चक्रबंधा जैसे दुर्गम इलाके अब पूरी तरह नक्सलियों से मुक्त हो चुके हैं.

अंतिम घेराबंदी: 150 के आसपास बचे हथियारबंद नक्सली

29 मार्च 2026 तक की स्थिति के अनुसार, सुरक्षा बल अब अंतिम चरण में प्रवेश कर चुके हैं. अनुमान है कि करीब 130-150 सशस्त्र नक्सली अब भी सक्रिय हैं, जो मुख्य रूप से सुकमा-बीजापुर सीमा और सारंडा के घने जंगलों में छिपे हुए हैं.

इनकी तलाश के लिए व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है, जिसमें ड्रोन, आधुनिक सर्विलांस और स्पेशल फोर्सेस का इस्तेमाल किया जा रहा है. सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि आने वाले कुछ दिनों में यह संख्या और घटेगी.

संसद ‘नक्सल मुक्त भारत’ का मुद्दा

इस पूरे अभियान की सफलता पर 30 मार्च 2026 को लोकसभा में विशेष चर्चा प्रस्तावित है. सरकार यहां अपने प्रयासों का ब्योरा देगी और “नक्सल मुक्त भारत” की दिशा में अंतिम घोषणा का संकेत भी दे सकती है.

पुनर्वास और विकास पर फोकस 

सुरक्षा ऑपरेशन के साथ-साथ सरकार अब आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास और प्रभावित इलाकों के विकास पर फोकस कर रही है. रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के जरिए इन क्षेत्रों को मुख्यधारा में लाने की कोशिश तेज कर दी गई है.


कुल मिलाकर, दशकों से चली आ रही नक्सल समस्या अब अपने अंतिम पड़ाव पर दिखाई दे रही है. सुरक्षा बलों की सख्ती, रणनीतिक ऑपरेशन और विकास योजनाओं के संयोजन ने वह स्थिति बना दी है, जहां “लाल गलियारा” सिमटकर इतिहास बनने की कगार पर खड़ा है.

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