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LS Poll 2024 : लोहरदगा में इसबार भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने, कांटे की टक्कर के बीच बेहद रोमांचक होगा मुकाबला, समझिए लोहरदगा का चुनावी चरित्र

BY -
Sanjeev Thakur CW
Sanjeev Thakur CW
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 15, 2026, 9:37:49 PM

रांची (TNP Desk) : लोहरदगा सीट पर इस बार लोकसभा चुनाव कांटे की टक्कर होने वाला है. वजह साफ है कि जहां हैट्रिक मारने वाली बीजेपी एक बार फिर से अपने अभेध किला को बचाने की जुगत में होगी, वहीं कांग्रेस अपने पुराने परंपरागत सीट पर फिर से काबिज होने की पुरजोर कोशिश करेगी. अगर पिछले छह लोकसभा चुनाव की गणित को समझे तो टक्कर बराबरी का है. पिछले बार कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर सुखदेव भगत बहुत ही कम अंतर से बीजेपी से हार गए थे, लेकिन इस बार लोहरदगा लोकसभा के अंदर छह विधानसभा में गैर भाजपा दलों का कब्जा है. वहीं जातिगत और धार्मिक दृष्टिकोण से भी लोकसभा में मतदाताओं की संख्या भाजपा और कांग्रेस के लिए बराबरी का समीकरण देखने को मिलेगा. वहीं उम्मीदवारों के हिसाब से देखें जहां भाजपा अपने पुराने सांसद तीन के बार सांसद सुदर्शन भगत का पत्ता काटकर पूर्व राज्यसभा सांसद समीर उरांव को उम्मीदवार बनाया है. वहीं इंडिया गठबंधन से अभी किसी प्रत्याशी के नामों की घोषणा नहीं हुई है. लेकिन, कयास लगाया जा रहा है कि इस बार फिर सुखदेव भगत को कांग्रेस उम्मीदवार घोषित कर सकती है. ऐसे में चुनाव बेहद दिलचस्प और रोमांचक होगा इससे इंकार नहीं किया जा सकता है.

बहुत ही मुश्किल में जीती थी बीजेपी 

2019 में हुए चुनाव को देखेंगे तो कांग्रेस और बीजेपी में कड़ा मुकाबला देखने को मिला था. इस सीट पर तीन बार के सांसद रहे सुदर्शन भगत बहुत ही मुश्किल में जीत पाये. उन्होंने 2019 में कांग्रेस के सुखदेव भगत को 10,363 मतों से हराया था. हालांकि, इस बार एंटी इनकंबेसी देखने को नहीं मिलेगी. क्योंकि इस बार बीजेपी ने समीर उरांव को मैदान में उतारा है. 

किस प्रत्याशी को कितना मिला था वोट

बिहार से अलग होने के बाद पहली बार 2004 में चुनाव हुआ था. 2004 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रामेश्वर उरांव ने बाजी मारी थी. इसके बाद इस सीट पर बीजेपी का दबदबा बना रहा. यहां से सुदर्शन भगत ने 2009, 2014 और 2019 में लगातार जीत की हैट्रिक लगाकर संसद पहुंचे थे. 2019 के चुनाव में सुदर्शन भगत को 371,595 वोट मिले, यानि कि कुल 45.45 प्रतिशत वोट मिले. वहीं कांग्रेस प्रत्याशी सुखदेव भगत को 361,232 वोट प्राप्त हुए थे. वोट प्रतिशत की बात करें तो इनका 44.18 प्रतिशत रहा. 2014 के चुनाव में सुदर्शन भगत ने रामेश्वर उरांव को हराया था. बीजेपी सांसद को 226,666 वोट मिले, यानि 34.79 प्रतिशत वोट मिले. वहीं कांग्रेस के रामेश्वर उरांव को 220,177 मत मिला था. 33.80 प्रतिशत वोट मिला. जीत का अंतर मात्र 6,489 रहा. अगर इस बार के चुनाव में कांग्रेस सुखदेव भगत को टिकट देती है तो फिर से कांटे की टक्कर होने की संभावना है.

सबसे ज्यादा एसटी मतदाता

यह सीट एसटी के लिए आरक्षित है. लोहरदगा, रांची का मांडर और गुमला जिले का गुमला, विशुनपुर और सिसई मिलकर लोहरदगा संसदीय क्षेत्र बना है. लोहरदगा लोकसभा सीट में पड़ने वाले सभी विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं. 2011 की जनगणना के अनुसार लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र में करीब 64 फीसदी एसटी मतदाता हैं. एससी मतदाताओं की संख्या 2.7 प्रतिशत, मुस्लिम मतदाता करीब 14.4 प्रतिशत है. ग्रामीण मतदाताओं की बात करें तो करीब 93.5 प्रतिशत है. वहीं शहरी मतदाता लगभग 6.5 प्रतिशत है. 2019 के चुनाव में करीब 1263023 मतदाताओं ने वोट का प्रयोग किया. लगभग 65.9 प्रतिशत मतदान हुए.

क्या है यहां की मुख्य समस्या

लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र का पूरा इलाका वन, पहाड़ और पठार से घिरा हुआ है. क्षेत्र में बॉक्साइट और लिग्नाइट प्रचूर मात्रा में पाये जाते हैं. फिर भी इस इलाके की पहचान आर्थिक रूप से पिछड़ों में होती है. इस क्षेत्र को प्रकृति ने बहुत कुछ दिया है, उसके बावजूद यहां की तस्वीर और तकदीर नहीं बदली है. यहां कई समस्याएं हैं, जिसके वजह से यहां की जनता को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. यहां की मुख्य समस्या पानी, बिजली, उद्योग, बेरोजगारी, सिंचाई, सड़क आदि है. जिसके कारण विकास की गति यहां थम सी गई है. डेढ़ साल पहले लोहरदगा बाईपास सड़क निर्माण का शिलान्यास हुआ था, उसके बावजूद अभी तक सड़क निर्माण शुरू नहीं हुआ. जबकि लोहरदगा वासियों की पुरानी मांग है.

कौन मारेगा बाजी?

भाजपा प्रत्याशी समीर उरांव एक साफ-सुथरी छवि के नेता हैं. वे राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं. राज्यसभा सांसद रहते उन्होंने कई काम किए. वहीं सुखदेव भगत पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं. इनकी भी छवि साफ-सुथरी रही है. कुछ दिनों के लिए कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए थे. बाद में मोहभंग होने के बाद फिर से कांग्रेस में शामिल हो गए. अभी लगातार क्षेत्र में जनता से मुलाकात कर रहे हैं. अब देखना होगा कि आने वाले चुनाव में जनता किसे सांसद चुनती है और किसे नहीं. 

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