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बड़े-बड़े सियासी सुरमाओं को चित कर एक मजदूर के बेटे ने मारी बाजी, जानिये कौन है ढुल्लू महतो जिसपर बाहरी-भीतरी के नारे बीच भाजपा ने लगाया दांव

BY -
Sanjeev Thakur CW
Sanjeev Thakur CW
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 16, 2026, 6:36:43 PM

रांची (RANCHI) : बाघमारा विधायक ढुल्लू महतो एक लोकप्रिय मजदूर नेता हैं. उनकी पहचान कोयलांचल में खासकर मजदूरों में एक कद्दावर नेता के रूप में होती है. वे बाघमारा विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार विधायक बने हैं. विधायक रहते ढुल्लू महतो ने अपने क्षेत्र के साथ-साथ मजदूरों के हितों में कई काम किये. विधायक रहते इनकी प्रसिद्धि इतनी बढ़ी की वे जनता के दिलों में छाए रहे. इसी का परिणाम है कि इस बार भाजपा ने उनपर भरोसा जताते हुए धनबाद लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया है. 

बाघमारा विधायक ढुल्लू महतो का जन्म अविभाजित बिहार 12 मई, 1975 को हुआ. उनका पैतृक गांव बाघमारा के चिटाही में है. उनके पिता का नाम पूना महतो और माता का नाम रुकवा है. उनकी प्रारंभिक शिक्षा उत्क्रमित मध्य विद्यालय टुंडी से हुई. कतरा डीएवी इंटर कॉलेज से ढुल्लू महतो ने 12वीं की पढ़ाई की. आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने पढ़ाई बीच में छोड़ दी और वह सेल जोगीडीह कोलियरी में काम करने लगे. ढुल्लू के पिता पूना महतो महेशपुर कोलियरी में मजदूर थे. ढुल्लू महतो भाईयों में सबसे छोटे हैं. उनकी शादी सावित्री देवी से हुई है.

ढुल्लू को विरासत में नहीं मिली राजनीति

बताया जाता है कि जब वे जोगीडीह कोलियरी में काम कर रहे थे उस समय वहां पर मजदूरों को काफी प्रताड़ित किया जाता था, जो वे बर्दाश्त नहीं कर पाये और उनकी हक और अधिकार की लड़ाई करने लगे. इसके बाद मजदूरों ने उन्हें अपना नेता मानने लगे. शोहरत और इज्जत मिलता देख ढुल्लू महतो ने मजदूरों के साथ-साथ आम लोगों की भी समस्याओं को दूर करने में जुट गए. इसी दौरान ढुल्लू की जिंदगी में वरिष्ठ नेता समरेश सिंह की एंट्री हुई. इसके बाद समरेश सिंह ने सियासत की बारकीरियां समझानी शुरू कर दी, और मजदूरों की लड़ाई लड़ने का गुरुमंत्र दिया. साल 2000 में समरेश सिंह ने उनको टाइगर की उपाधि दी. बाद में ढुल्लू ने टाइगर फोर्स नामक संस्था का गठन किया जिसकी गूंज कोयलांचल ही नहीं पूरे राज्य में सुनाई देने लगी.

बाघमारा से ढुल्लू महतो ने लगाई जीत की हैट्रिक

वर्ष 2009 में समरेश सिंह के बदौलत ही ढुल्लू महतो को बाबूलाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा से टिकट मिला. उन्होंने जदयू के प्रत्याशी जलेश्वर महतो को भारी मतों से हराया. ढुल्लू ने 56026 मतों से पहली बार बाघमारा विधानसभा से जीत हासिल की. इसके बाद जेवीएम से नाता तोड़ साल 2014 में बीजेपी की टिकट पर चुनाव लड़े. भाजपा की उम्मीदों पर खरे उतरकर पिछले रिकॉर्ड को तोड़कर 86603 मत से विजयी हुए और इस बार भी उन्होंने निकटतम प्रतिद्वंदी जलेश्वर महतो को हराया. 2019 में फिर भाजपा ने उन्हें टिकट दिया. हालांकि इस बार मुकाबला कांटे का रहा. उन्होंने 824 मतों के मामूली अंतर से बाघमारा से विधायक चुने गए. हालांकि, इस दौरान उनके ऊपर कई आरोप भी लगते रहे, जिसके कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा. 

करोड़ों के संपत्ति के मालिक हैं ढुल्लू महतो

बाघमारा विधायक व धनबाद लोकसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी ढुल्लू महतो करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं. विधायक रहते उन्होंने करोड़ों की संपत्ति बना ली है. विधानसभा चुनाव में नामांकन के दौरान दिए शपथपत्र के अनुसार उनकी संपत्ति 33355483 करोड़ है. वहीं उनके खिलाफ चार आपराधिक मामले चल रहे हैं. 

ढुल्लू महतो की उपलब्धियां

अपने कार्यकाल के दौरान ढुल्लू महतो ने बाघमारा विधानसभा क्षेत्र में कई काम किये. बाघमारा की जनता को विभिन्न विकास योजनाओं से जोड़ा. क्षेत्र में कई सड़कें बनवायी. शिक्षा, बिजली और पानी के क्षेत्र में कई काम किये. मजदूरों की आवाज बनकर उनकी कई समस्याओं का हल किया. आज भी कोयलांचल में मजदूरों की समस्याओं को भाजपा प्रत्याशी ढुल्लू महतो उठाते रहते हैं.

धनबाद लोकसभा सीट का जातीय समीकरण

कोयलांचल के नाम से मशहूर धनबाद लोकसभा सीट के अंतर्गत छह विधानसभा क्षेत्र आते हैं. जिनमें धनबाद, बोकारो, सिंदरी, झरिया, चंदनकियारी और निरसा विधानसभा क्षेत्र शामिल है. यह क्षेत्र बीजेपी का गढ़ माना जाता है. 22 लाख से अधिक मतदाता वाले धनबाद लोकसभा क्षेत्र में एसटी, एससी, मुस्लिम, ठाकुर, ब्राह्मण वोटरों का दबदबा है. अनुसूचित जनजाति-14 प्रतिशत, अनुसूचित जाति करीब 9 फीसदी और अल्पसंख्यक की करीब 15 फीसदी आबादी है. जबकि कुड़मी की आबादी लगभग 10 फीसदी है. इसके साथ एक बड़ी संख्या दूसरी पिछड़ी जातियों की है.

क्या है चुनावी मुद्दे

प्रतिवर्ष अरबों रुपए का राजस्व देने वाले धनबाद में एयरपोर्ट नहीं है, जो इस बार के चुनाव में प्रमुख मुद्दा होगा. एयरपोर्ट को लेकर समय-समय पर आंदोलन होता रहा है, लेकिन इस पर अभी तक कोई ठोस पहल नहीं हुआ है. धनबाद में विस्थापन और नियोजन भी एक बड़ा मुद्दा रहा है. कोयला उद्योग में आउटसोर्सिंग परियोजनाओं को लेकर लगातार जमीन अधिग्रहण में समस्या आ रही है. मुआवजा को लेकर आंदोलन भी होते रहा है. प्रदूषण भी एक बड़ी समस्या है. यहां सार्वजनिक परिवजन की व्यवस्था सहीं नहीं होने के कारण तय मानक से अधिक वायु प्रदूषण रहता है. जिसके कारण लोग बीमारियों से ग्रसित रहते हैं. झरिया पुनर्वास योजना में तेजी तथा अग्नि प्रभावित इलाके के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पुनर्वास करने करने का भी इस चुनाव में बड़ा मुद्दा होगा. जिस पर सभी दलों की नजरें होंगी. हालांकि इंडिया गठबंधन ने अभी तक किसी प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है. देखना होगा कि आने वाले चुनाव में ढुल्लू महतो इन मुद्दे से कैसे पार पाते हैं.

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