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ये हैं झारखंड़ के 8 सबसे प्रसिद्ध मंदिर, आप भी जानिए इन खूबसूरत मंदिरों के बारे

ये हैं झारखंड़ के 8 सबसे प्रसिद्ध मंदिर, आप भी जानिए इन  खूबसूरत मंदिरों के बारे

रांची- झारखंड़ खनिज संपदा से भरपूर होने के साथ साथ हरियाली और प्राकृतिक सौर्दय के लिए भी खूब चर्चा में रहता है लेकिन क्या आपको ये पता है की यहां प्रकृति की गोद में  बेहद खूबसूरत और अद्भूत अनेकों मंदिरें  बसे है जो काफी प्रसिद्ध हैं,आज हम आपको इस लेख में  झारखंड़ के 8 सबसे प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में बताने जा रहे है.

                                                            टांगीनाथ मंदिर

टांगीनाथ मंदिर- टांगीनाथ मंदिर गुमला जिले के डुमरी प्रखंड में पहाड़ों पर स्थित है गुमला शहर से 75 किलोमिटर की दूरी पर है और राजधानी रांची से करीब 150 किमी दूरी पर  है. यह शिवस्थली के रूप में प्रसिद्ध है. टांगीनाथ पहाड़ पर लगभग 300 फीट ऊंचे स्थान पर स्थित है टांगीनाथ मंदिर को लेकर कई दिलचस्प कहानियां है और ये भी मान्यता है कि यहां खुद भगवान शिव का वास है. इस मंदिर की खासियत ये हैं की यहां के पहाड़ों पर शिवलिंग की भरमार है, जो देखने में अद्भुत लगती है. कहा जाता है कि झारखंड के गुमला जिले का यह स्थल भगवान परशुराम का तप स्थल है. भगवान परशुराम ने यहां शिव की घोर तपस्या की थी जिसके बाद  उन्होंने फरसा को वहीं गाड़ दिया था जिसके बाद से लोग यहां इस फरसे की ही पूजा करते आ रहे हैं.

                                                        देवरी मंदिर

देवरी मंदिर- रांची-टाटा से करीब 60 किलोमीटर तमाड़ में विराजित हैं मां दिउड़ी का मंदिर. यहां 8 नहीं 16 भुजाओं वाली देवड़ी मां का स्वरूप स्थापित है.कहा जाता है इस मंदिर का निर्माण 10वीं से 12वीं शताब्दी में हुआ था मंदिर में करीब तीन से साढ़े तीन फीट ऊंची देवड़ी वाली मां दुर्गा की मूर्ति स्थापित है. मंदिर की परंपराओं में झारखंड की आदिवासी संस्‍कृति की पूरी छाप दिखती है.

 

                                                    बैधनाथ धाम मंदिर

बैधनाथ धाम मंदिर- देवधर स्थित तीर्थस्थल बैधनाथधाम स्थापित शिवलिंग द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से नौवां ज्योतिर्लिंग है, यह देश का पहला ऐसा स्‍थान है जो ज्योतिर्लिंग के साथ ही शक्तिपीठ भी है.शिवजी के ज्योतिर्लिंग के पीछे एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है.रावण ने वरदान के रूप में शिवजी से लंका में शिवलिंग के रूप में स्थापित होने का वरदान मांगा था. शिवजी ने रावण की बात मानी और रावण को चेतावनी दी कि रास्ते में किसी भी जगह पर रावण उस शिवलिंग को न रखें, क्योंकि जिस भी जगह पर शिवलिंग को रास्ते में रावण रखेगा वह शिवलिंग वहीं स्थापित हो जाएगा. सावन के महीने में शिवभक्तों की भारी भीड़ मंदिर में उमड़ती है.

                                                       रजप्पा मंदिर

रजप्पा मंदिर- झारखंड प्रदेश के रामगढ़ जिला में स्थित एक तीर्थस्थल है. यह झारखंड की राजधानी रांची से करीब 80 किलोमीटर दूर स्थित है. यह जलप्रपात भैरवी-भेड़ा और दामोदर नदी के संगम पर मां छिन्नमास्तिका का मंदिर स्थित है छिन्नमस्तिका मंदिर के अलावा यहां महाकाली, सूर्य मंदिर, दस महाविद्या मंदिर, बाबाधाम मंदिर, बजरंग बली मंदिर, शंकर मंदिर और विराट रूप मंदिर के नाम से 7 मंदिर हैं.

                                                         मलूटी मंदिर

मलूटी मंदिर- झारखंड़ के दुमका जिला में शिकारीपाडा के पास एक छोटे से गांव में बसा है मलूटी मंदिर, यहां 108 मंदिरों का निर्माण हुआ था, जिसमें से आज मात्र 72 मंदिर ही बचे है.देखरेख के अभाव में कुछ मंदिर विलुप्त होते जा रहे हैं, बताया जाता है कि इन मंदिरों का निर्माण बाज बसंत वंश के राज्यकाल में बनाये गये थे यहां कई मंदिरों को देवी-देवताओं के अलग अलग संप्रदायों से सजाया गया है. साथ ही सभी मंदिरों पर टेराकोटा से नक्काशी की गई है.  

                                                    जगन्नाथ मंदिर

जगन्नाथ मंदिर - रांची  के धुर्वा में  भगवान जगन्नाथ मंदिर पुरी मंदिर की तर्ज  पर बनाया गया है,यह जगन्नाथ पुरी के मंदिर की हूबहू कलाकृति इस मंदिर में नजर आती है, प्रकृति की गोद में अध्यात्म का यह महत्वपूर्ण केंद्र है यह मंदिर 328 साल पुराना है कहा जाता है कि 1691 में बड़कागढ़ में नागवंशी राजा ठाकुर एनीनाथ शाहदेव ने रांची में धुर्वा के पास भगवान जगन्नाथ मंदिर का निर्माण कराया था. रांची का यह मंदिर इसका निर्माण ओडिशा शैली की तर्ज पर करवाया गया था. इस मंदिर में पूजा से लेकर भोग चढ़ाने का विधि-विधान भी पुरी जगन्नाथ मंदिर जैसा ही  है. हर साल लोग  मंदिर में भगवान के दर्शन के लिए पहुंचते है.

                                                  हरिहर धाम मंदिर

हरिहर धाम मंदिर- झारखंड के गिरिडीह में लगभग 25 एकड़ भूमि पर स्थित है  विशाल शिव लिंग, इस शिव लिंग का निर्माण किया गया है हरिहर धाम मंदिर में. शिवलिंग 65 फीट की ऊंचाई के साथ दुनिया में सबसे ऊंचा शिवलिंग  माना जाता है,यह मंदिर पर्यटन स्थल के रूप में प्रसिद्ध है हर साल सावन के महीने में खास तौर पर पूर्णिमा पर भगवान शिव की पूजा करने के लिए इस स्थान पर भक्तों की भीड़ उमड़ती है.इतना ही नहीं इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि  हरिहर धाम हिंदू विवाहों के लिए एक लोकप्रिय स्थान है हर साल यहां भारी संख्य में जोड़ें भगवान भोलेनाथ को साक्षी मान कर विवाह करते हैं.

Published at:20 Aug 2021 06:23 PM (IST)
Tags:News
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