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क्या AI सच में छीन सकती है लोगों की नौकरियां? जानिए इसके पीछे का सच

BY -
Diksha Benipuri
Diksha Benipuri
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: May 10, 2026, 1:04:12 PM

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): AI को लेकर लंबे समय से एक बहस चलते आई है कि AI सारी नौकरियां खा जाएगा. अब इस मुद्दे पर चीन की एक अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है जिसने दुनिया भर में जितने भी टेक कंपनी और कर्मचारी हैं उनका ध्यान अपनी तरफ आकर्षित कर लिया है. अदालत का साफ कहना है कि केवल AI आने की वजह से किसी कर्मचारी को नहीं निकल जाएगा.

पूरा मामला चीन के टेक हब माने जाने वाले हांगझोउ शहर से जुड़ा है. यही वह शहर है जहां से अलीबाबा और डीपसीक जैसी बड़ी कंपनियां निकली हैं. यहां एक कंपनी में काम कर रहे कर्मचारी का काम धीरे-धीरे AI टूल्स और बड़े लैंग्वेज मॉडल्स के इस्तेमाल की वजह से कम होने लगा. कंपनी को लगा कि अब वही काम मशीनों से कराया जा सकता है, इसलिए कर्मचारी को दूसरी पोस्ट ऑफर की गई.

हालांकि नई पोस्ट में वेतन कम था और काम की शर्तें भी पहले से अलग थीं. कर्मचारी ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया. इसके बाद कंपनी ने उसे नौकरी से हटा दिया. मामला अदालत पहुंचा, जहां कोर्ट ने कर्मचारी के पक्ष में फैसला सुनाया.

अदालत ने कहा कि कंपनियां तकनीक बदल सकती हैं और AI अपना सकती हैं, लेकिन इससे कर्मचारियों के अधिकार खत्म नहीं हो जाते. कोर्ट के मुताबिक अगर कोई कंपनी ऑटोमेशन या AI लागू कर रही है तो उसे श्रम कानूनों का पालन करना ही होगा. सिर्फ यह कह देना कि “अब मशीनें इंसानों का काम कर सकती हैं”, किसी को नौकरी से निकालने का वैध कारण नहीं माना जा सकता.

फैसले में यह भी कहा गया कि अगर किसी कर्मचारी का रोल बदला जाता है, तो उसे उचित वेतन और सम्मानजनक शर्तें मिलनी चाहिए. वहीं नौकरी खत्म करने की स्थिति में भी तय कानूनी प्रक्रिया अपनाना जरूरी होगा. अदालत ने साफ संकेत दिया कि लागत कम करने के लिए AI का इस्तेमाल करना कंपनियों का अधिकार हो सकता है, लेकिन इसके नाम पर कर्मचारियों के साथ मनमानी नहीं की जा सकती.

कोर्ट ने कर्मचारियों को भी बदलते दौर के लिए तैयार रहने की सलाह दी. अदालत ने कहा कि तकनीक तेजी से बदल रही है और लोगों को खुद को नए स्किल्स के साथ अपडेट करते रहना होगा. AI को रोका नहीं जा सकता, लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि इंसानों को बिना उचित कारण के नौकरी से बाहर कर दिया जाए.

यह पहला मामला नहीं है जब चीन की अदालत ने ऐसा रुख अपनाया हो. इससे पहले 2024 में गुआंगझू की एक अदालत ने भी कहा था कि तकनीकी अपग्रेड किसी कर्मचारी की नौकरी खत्म करने का सीधा आधार नहीं बन सकता. चीन फिलहाल AI के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए कई नई नीतियों और कानूनी प्रावधानों पर काम कर रहा है, ताकि टेक्नोलॉजी के विस्तार के बावजूद रोजगार पर ज्यादा असर न पड़े.

इस फैसले की चर्चा अब वैश्विक स्तर पर हो रही है. Microsoft, Google और Amazon जैसी दिग्गज कंपनियां तेजी से AI आधारित सिस्टम विकसित कर रही हैं और कई जगह कर्मचारियों की संख्या घटाने की खबरें भी सामने आ रही हैं. ऐसे माहौल में चीन की अदालत का यह फैसला कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है.

अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या दूसरे देश भी AI और रोजगार को लेकर इसी तरह के कानून बनाएंगे. आने वाले समय में AI का असर मीडिया, टेक्नोलॉजी, कस्टमर सपोर्ट और क्रिएटिव इंडस्ट्री समेत लगभग हर क्षेत्र में दिखाई देने वाला है. ऐसे में यह बहस और तेज होगी कि तकनीकी प्रगति और मानव रोजगार के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए.

चीन की अदालत के इस फैसले ने फिलहाल इतना जरूर स्पष्ट कर दिया है कि AI के बढ़ते दौर में भी कर्मचारियों के अधिकारों को पूरी तरह नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा.

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