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भारत सरकार ने अमेरिकी कंपनी को दिया दो टूक जवाब- पहले भारत में ही कार का निर्माण करो,

BY -
Shreya Gupta
Shreya Gupta
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 17, 2026, 3:08:25 PM

दिल्ली(DELHI)-मशहूर कार निर्माता कंपनी “टेस्ला” भारतीय बाजार में अपना पाँव पसारना चाह रही है. जिसके लिए कंपनी लगातार प्रयास कर रही है. हाल ही में टेस्ला ने भारत सरकार से इलेक्ट्रॉनिक वाहनों (EVs) पर लगने वाले आयात शुल्क को घटाने की गुजारिश की. जिसके जवाब में भारी उद्योग मंत्रालय ने अमेरिकी कार निर्माता कंपनी को कहा कि अगर किसी भी तरह की टैक्स में छूट चाहिए तो कंपनी को पहले भारत में ही अपने प्रतिष्ठित इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्माण शुरू करना होगा.    
इस पर टेस्ला ने कहा कि सरकार किसी भी ऑटो फर्म को ऐसी रियायतें नहीं दे रही है और अगर भारत सरकार टेस्ला को ऐसी रियायतें देती है तो भारत में अरबों डॉलर का निवेश करने वाली अन्य कंपनियों के लिए यह एक अच्छा संकेत नहीं होगा. 


एलोन मस्क ने किया था ट्वीट 

जुलाई महीने में, टेस्ला के सीईओ एलोन मस्क ने ट्वीट किया था कि वह इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए अस्थायी टैरिफ राहत की उम्मीद कर रहे हैं. मस्क ने कहा था कि टेस्ला जल्द ही भारत में अपनी कारों को लॉन्च करना चाहती है, लेकिन भारतीय आयात शुल्क किसी भी बड़े देश के मुकाबले दुनिया में सबसे ज्यादा है. वर्तमान में,  आयात की जाने वाली कारों पर उनके इंजन के आकार, लागत,  उनकी बीमा और माल ढुलाई (सीआईएफ) आदि के आधार पर 40,000 डालर तक के मूल्य से कम या अधिक के वाहनों पर 60% से 100% तक सीमा शुल्क लगता है. 


इलेक्ट्रिक कारों पर 10 प्रतिशत का social welfare surcharge वापस ले सरकार 

सड़क मंत्रालय को लिखे एक पत्र में, अमेरिकी फर्म ने कहा था कि 40,000 अमरीकी डालर से अधिक के सीमा शुल्क वाले वाहनों, खासकर zero-emission वाहनों पर 110 प्रतिशत का प्रभावी आयात शुल्क लगाना सही नहीं है. टेस्ला ने सरकार से अनुरोध किया है कि सीमा शुल्क के बावजूद इलेक्ट्रिक कारों पर टैरिफ को 40 प्रतिशत तक तय किया जाए और इलेक्ट्रिक कारों पर 10 प्रतिशत का social welfare surcharge  वापस लिया जाए. कंपनी ने तर्क दिया है कि इन प्रस्तावों का भारतीय ऑटोमोटिव बाजार पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि वर्तमान में भारत में एक्स-फैक्ट्री सीमा शुल्क से अधिक में केवल 1-2 प्रतिशत कारें (EV or ICE) ही बेची जाती है और उनके अलावा कोई भी भारतीय OEM ऐसी कार (EV or ICE) का उत्पादन नहीं करता है जिसकी एक्स-फ़ैक्टरी कीमत 40,000 डॉलर से अधिक है. 
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इसके बारे मे कहा था कि देश में ई-वाहनों पर जोर दिए जाने को देखते हुए टेस्ला के पास भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग सुविधा स्थापित करने का सुनहरा अवसर है.

Tags:News

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