रांची(RANCHI): देश में नक्सलवाद के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू है. 31 मार्च 2026 तक नक्सली के खात्मे की तारीख गृह मंत्रालय ने तय कर दी. इस टारगेट को हिट करने के लिए सुरक्षा बल के जवान आगे बढ़ रहे है.कई जंगल पहाड़ से नक्सलियों का सफाया भी कर दिया. लेकिन इस अभियान के नजदीक आते आते अब सवाल उठने लगा. क्या जंगल किसी बड़े उद्योगपति को देने की तैयारी है. इस अभियान की सच्चाई क्या है.इसे समझने के लिए झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का बयान भी समझना होगा. साथ ही कांग्रेस विधायक ने भी सवाल उठा दिया है.
सबसे पहले बात सारंडा की कर लेते है. पश्चिमी सिंहभूम जिला के सारंडा जंगल को साल के पेड़ के लिए मशहूर माना जाता है. यह एशिया का सबसे बड़ा जंगल जंगल है. इस वजह से इसकी पहचान अलग है. लेकिन जंगल के साथ साथ इस जमीन के अंदर मिनरल्स भी है. लेकिन इन सब के बीच नक्सलवाद का मुख्यालय भी हाल के दिनों में सारंडा बना है.जिसमें एक करोड़ के तीन इनामी नक्सली बैठे है. इनके साथ इनके दस्ते के 60 से अधिक लोग है.जिनके खिलाफ सुरक्षा बल के जवान अभियान चला रहे है.
इसके साथ ही छत्तीसगढ़ का बस्तर नक्सलियों का सेफ जोन माना जाता है. यह इलाका भी पठार वाला है. जंगल के साथ साथ जमीन के अंदर कई खनिज दबे है. लेकिन बस्तर रेंज में लाल आतंक का गढ़ भी है. जो अब हद तक कंट्रोल हो गया. कभी बड़े माओवादियों का गढ़ माना जाता है. लेकिन कुछ इलाकों को छोड़ दे तो अब सुरक्षा बल के जवानों के कब्जे में हर इलाका है.सैकड़ों कैम्प बना है.
लेकिन इन सब के बीच सुरगुजा को देख आकर सवाल खड़ा होने लगा की क्या सच में नक्सलवाद के बाद जमीन जंगल खत्म हो जाएगा. सुरगुजा में देखा गया की नक्सल के बाद अब ग्रामीण पुलिस से भीड़ रहे है. वह खनन का विरोध कर रहे है. जिसकी तस्वीर पूरे देश में सामने आई. इस पूरे मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी विधानसभा में एक बयान दिया था. जिसमें उन्होंने जिक्र किया की बॉर्डर से ज्यादा जंगल में युद्ध हो रहा है. बॉर्डर छोड़ कर जंगल में जवानों को उतार दिया गया.
इस बयान पर जब कांग्रेस विधायक दल के नेता राजेश कच्छप से सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि नक्सल अभियान के नाम पर हसदेवा जंगल को उद्योगपति को दे दिया गया. केंद्र की मंशा कुछ और है. जिसपर पूरा देश सवाल पूछेगा. वहीं डुमरी विधायक जयराम महतो का मानना है कि नक्सली जंगल में रहते है. लेकिन पूरा देश छोड़ कर अब सुरक्षा बल के जवानों को जंगल में उतार दिया गया. जिससे जमीन लूटी जा सके.
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