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क्या सच में अशोक स्तंभ के मूल स्वरूप के साथ हुई छेड़छाड़, विपक्ष क्यों कर रहा सवाल, जानें पूरा इतिहास

क्या सच में अशोक स्तंभ के मूल स्वरूप के साथ हुई छेड़छाड़, विपक्ष क्यों कर रहा सवाल, जानें पूरा इतिहास

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): जब से नए संसद भवन की छत पर विशालकाय अशोक स्तंभ का अनावरण हुआ है, तब से ही तमाम तरह के आरोप विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे हैं. किसी को प्रधानमंत्री के पूजा करने से परेशानी है तो किसी को इस अनावरण आयोजन में नहीं बुलाए जाने की नाराज़गी है. मगर इन सभी से अलग एक नया अब आरोप विपक्ष की ओर से लगाया जा रहा है. विपक्ष का कहना है कि देश के इतिहास के साथ छेड़छाड़ की जा रही है. पहले अशोक स्तंभ में शेर का मुंह बंद हुआ करता था मगर नए संसद भवन में जो स्तंभ लगाया गया है, उसमें शेर के मुंह को खुला रखा गया है. विपक्ष इसे इतिहास के साथ छेड़छाड़ बता रहा है तो सरकार अपने तर्क रख रही है. आएं जानते हैं कि इस पर सरकार, विपक्ष और इतिहास क्या कहता है.

विपक्ष का आरोप

विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने नए संसद भवन में लगाई गई 6.5 मीटर लंबी और 9500 किलो वजनी अशोक स्तंभ की प्रतिमा के साथ छेड़छाड़ की है. उनका कहना है कि पहले के अशोक स्तंभ में शेर का मुंह बंद रहता था, मगर इस बार जो स्तंभ बनाया गया है उसमें शेर का मुंह खुला छोड़ दिया गया है. विपक्ष का कहना है कि सरकार देश विरोधी काम कर रही है.

सरकार ने रखा अपना पक्ष

सारे आरोपों के बीच सरकार ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नए संसद भवन में जो अशोक स्तंभ बनाया गया है वो सारनाथ मॉडल से प्रेरित होकर बना है. मूर्तिकारों को कहा गया था जैसा स्तंभ सारनाथ मॉडल में है वैसा ही स्तंभ आपको बनाना है.

 

अशोक स्तंभ का इतिहास 

सम्राट अशोक मौर्य वंश के तीसरे शासक थे और प्राचीन काल में भारतीय उपमहाद्वीप के सबसे शक्तिशाली राजाओं में से एक थे. उसने 273 ई.पू. से 232 ई.पू. भारत में शासन किया. अशोक के साम्राज्य में अधिकांश भारत, दक्षिण एशिया और उससे आगे, अब का अफगानिस्तान और पश्चिम में फारस के कुछ हिस्सों, पूर्व में बंगाल और असम और दक्षिण में मैसूर शामिल हुआ था. बौद्ध साहित्य में अशोक एक क्रूर और निर्दयी सम्राट बताया गया है लेकिन कंलिंग के युद्ध के बाद उसने बौद्ध धर्म ग्रहण किया और धर्म के सिद्धांतों के प्रसार के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया. अशोक ने देश के विभिन्न भागों में कई स्तूपों और स्तंभों का निर्माण कराया. इनमें से एक स्तंभ जो सारनाथ में स्थित है, उसको भारत के राष्ट्रीय प्रतीक (National Emblem) के रुप में अपनाया गया है.  संवैधानिक रूप से भारत सरकार ने 26 जनवरी, 1950 को राष्ट्रीय चिन्ह के तौर पर अशोक स्तंभ को अपनाया था क्योंकि इसे शासन संस्कृति और शांति का सबसे बड़ा प्रतीक माना गया था.  

Published at:13 Jul 2022 03:19 PM (IST)
Tags:News
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